अनुष्ठान सेवा राशि 2500 है
Anushthan Seva amount is Rs 2500
घर पर करवाने पर मार्ग में आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी
If you get it done at home, you will have to pay for the travel expenses separately and bring the materials yourself.
दीपावली, जिसे 'रोशनी का त्योहार' कहा जाता है, हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पर्व है। यह अंधकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है।
दीपावली संस्कृत के दो शब्दों 'दीप' (दीपक) और 'आवली' (पंक्ति) से बना है, जिसका अर्थ है 'दीपकों की श्रृंखला'। यह पर्व हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। अमावस्या की काली रात को करोड़ों दीयों की रोशनी से जगमग कर दिया जाता है।
श्री राम का आगमन: सबसे प्रमुख मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास काटकर और रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में घी के दीये जलाए थे।
समुद्र मंथन: पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन ही समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था।
वामन अवतार: इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बलि से तीनों लोक मुक्त कराए थे।
दीपावली की मुख्य अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी (धन की देवी) हैं। उनके साथ निम्नलिखित की पूजा अनिवार्य है:
भगवान गणेश: बुद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में (लक्ष्मी जी के साथ प्रथम पूज्य)।
कुबेर देव: धन के कोषाध्यक्ष।
माता सरस्वती: ज्ञान और विद्या की देवी।
महाकाली: शक्ति और दुखों के नाश के लिए।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जिस घर में स्वच्छता और प्रकाश होता है, वहां वे निवास करती हैं।
आर्थिक लाभ: दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार में उन्नति मिलती है।
मानसिक लाभ: दीपों का प्रकाश मन के अवसाद और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
सामाजिक लाभ: यह भाईचारे और मेल-मिलाप का संदेश देता है।
शास्त्रों के अनुसार, दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन का विधान अत्यंत प्राचीन है। माना जाता है कि राजा बलि की कैद से मुक्त होने के बाद देवताओं ने माता लक्ष्मी की स्तुति कर सबसे पहले दीप प्रज्वलित किए थे। एक अन्य मत के अनुसार, पृथ्वी पर सुख-समृद्धि के लिए महर्षि भृगु ने लक्ष्मी साधना का उपदेश दिया था।
स्कंद पुराण: इसमें दीपावली के दीपदान के महत्व को 'पद्म' (कमल) के समान शुभ बताया गया है।
पद्म पुराण: कार्तिक मास के महात्म्य में दीपावली के प्रकाश को यमराज के भय से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है।
अथर्ववेद: इसमें प्रकाश की महत्ता और आरोग्य के लिए अग्नि व दीप की वंदना की गई है।
स्वच्छता: घर के कोने-कोने की सफाई करें (लक्ष्मी जी का निवास शुद्ध स्थान पर होता है)।
उपवास: कई लोग इस दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं और रात्रि पूजन के बाद ही भोजन करते हैं।
अखंड दीप: पूजा स्थल पर एक बड़ा दीपक (अखंड जोत) पूरी रात जलना चाहिए।
प्रदोष काल: पूजन हमेशा 'स्थिर लग्न' और 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त के बाद का समय) में करना चाहिए।
कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) आपके दीपावली पूजन को शास्त्रसम्मत बनाने में आपकी सहायता करता है:
सटीक लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (Auspicious Muhurat): दीपावली पर प्रदोष काल, वृषभ लग्न और सिंह लग्न का विशेष महत्व होता है। ऐप्प आपको आपके स्थान के अनुसार सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त की जानकारी देता है।
वर्चुअल लक्ष्मी-कुबेर पूजन (Online Pujan): यदि आप विद्वान पंडितों के सानिध्य में पूजा करना चाहते हैं, तो आप ऐप्प के माध्यम से 'ऑनलाइन लाइव पूजन' बुक कर सकते हैं।
श्री यंत्र और कुबेर यंत्र स्थापना (Yantra Installation): धन वृद्धि के लिए यंत्रों को सिद्ध करने की सही विधि ऐप्प पर उपलब्ध विशेषज्ञों से जान सकते हैं।
दुकान और व्यापार पूजन (Business Pujan): व्यापारी वर्ग अपने बही-खाता (Chopda Pujan) और तिजोरी पूजन की विशेष विधि ऐप्प से प्राप्त कर सकते हैं।
ज्योतिषीय उपाय (Astrological Remedies): आपकी राशि के अनुसार दीपावली की रात कौन सा मंत्र जपना या कौन सा दीप जलाना शुभ होगा, इसके लिए आप ऐप्प पर ज्योतिषियों से परामर्श ले सकते हैं।
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