व्रत कथा की सेवा राशि 1500 है
The service amount for the Vrat Katha is Rs 1500.
घर पर पूजन कथा करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी
If you are getting the puja katha organised at home, you will have to pay the travel expenses separately and bring the materials yourself.
जन्माष्टमी का व्रत हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र व्रतों में से एक है। यह भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशी में रखा जाता है। यह हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि (रात 12 बजे) कान्हा का जन्म हुआ था।
यह व्रत हर प्रकार की मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है। विशेष रूप से:
संतान प्राप्ति: निःसंतान दंपत्ति 'संतान गोपाल' मंत्र के साथ यह व्रत रखते हैं।
अखंड सौभाग्य: महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं।
मोक्ष की प्राप्ति: आध्यात्मिक उन्नति और पापों के नाश के लिए भी यह व्रत फलदायी है।
शास्त्रों के अनुसार, एक जन्माष्टमी का व्रत करने से हजार एकादशी व्रतों के समान पुण्य मिलता है।
यह मन को शुद्ध करता है और व्यक्ति में धैर्य व भक्ति का संचार करता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सात जन्मों के पाप कट जाते हैं।
इस दिन मुख्य रूप से बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की पूजा की जाती है। पूजा में उनके बाल स्वरूप को स्नान कराना (अभिषेक), नए वस्त्र पहनाना, झूले में झुलाना और माखन-मिश्री का भोग लगाना शामिल है। साथ ही माता देवकी, वासुदेव, बाबा नंद, माता यशोदा और राधा रानी का भी स्मरण किया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में माता यशौदा ने कान्हा के स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए यह व्रत किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, स्वयं माता देवकी ने कारागार में भगवान के दर्शन और उनकी सुरक्षा की कामना से मानसिक रूप से यह व्रत किया था।
श्रीमद्भागवत पुराण: इसमें श्री कृष्ण के जन्म और लीलाओं का सबसे विस्तार से वर्णन है।
भविष्य पुराण: इस पुराण में जन्माष्टमी व्रत के महात्म्य और विधि का उल्लेख मिलता है।
अग्नि पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण: इन ग्रंथों में भी कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र के महत्व को समझाया गया है।
ब्रह्मचर्य: व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना चाहिए।
फलाहार: यह व्रत निर्जला या फलाहारी रखा जाता है। रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद ही 'पारण' (व्रत खोलना) किया जाता है।
सात्विकता: घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का प्रयोग वर्जित होता है।
कीर्तन: पूरे दिन भगवान के भजनों और मंत्रों (जैसे- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जाप करना चाहिए।
कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप्प आपकी धार्मिक यात्रा में एक डिजिटल मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। इस ऐप्प के माध्यम से आप अपनी पूजा को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं:
सटीक मुहूर्त (Accurate Muhurat): आपके स्थान के अनुसार अष्टमी तिथि कब शुरू हो रही है और पूजा का 'निशिता काल' (मध्यरात्रि पूजा का समय) क्या है, इसकी सटीक जानकारी प्राप्त करें।
पूजा विधि (Pooja Vidhi): अगर आप घर पर अकेले पूजा कर रहे हैं, तो ऐप्प पर उपलब्ध 'स्टेप-बाय-स्टेप' पूजा विधि का पालन कर सकते हैं।
विद्वान पंडितों से परामर्श (Consultation with Astrologers): यदि आप विशेष 'संतान गोपाल अनुष्ठान' या कोई विशिष्ट पूजा करवाना चाहते हैं, तो आप ऐप्प के माध्यम से अनुभवी पंडितों से ऑनलाइन संकल्प और मार्गदर्शन ले सकते हैं।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products