व्रत अभिषेक की सेवा राशि 1500 है
The service amount for fast Abhishek is Rs 1500.
घर पर अभिषेक पूजन करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी
If Abhishek Puja is performed at home, the travel expenses will have to be paid separately and the materials will have to be brought by yourself.
महाशिवरात्रि का व्रत हिंदू धर्म के सबसे अंधकार-निवारक और कल्याणकारी व्रतों में से एक माना जाता है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का उत्सव है।
महाशिवरात्रि का अर्थ है "शिव की महान रात"। यह व्रत हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी रात को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी रात भगवान शिव ने 'ज्योतिर्लिंग' के रूप में प्रकट होकर ब्रह्मांड को आलोकित किया था।
यह व्रत लौकिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की कामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है:
अखंड सौभाग्य: अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत करती हैं।
मुक्ति और मोक्ष: शिव भक्त जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पाने के लिए यह व्रत रखते हैं।
नकारात्मकता का नाश: जीवन के दुखों, शत्रुओं और आंतरिक विकारों (काम, क्रोध, लोभ) को समाप्त करने की कामना से यह व्रत किया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति महाशिवरात्रि का व्रत विधि-विधान से करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।
यह व्रत इंद्रियों पर नियंत्रण करना सिखाता है और मन को एकाग्र करता है।
ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान और जप अनंत गुना फल प्रदान करता है।
इस दिन मुख्य रूप से शिवलिंग की पूजा की जाती है। पूजा में महादेव के साथ-साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की भी आराधना होती है। पूजा में 'पंचामृत' (दूध, दही, शहद, घी, शक्कर), बेलपत्र, धतूरा, भांग और गंगाजल का विशेष महत्व है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या और व्रत किया था। एक अन्य कथा के अनुसार, चित्रभानु नामक एक शिकारी ने अनजाने में बेलपत्र शिव पर अर्पित कर यह व्रत किया था, जिससे उसे मोक्ष मिला। देवताओं ने भी कालकूट विष के प्रभाव से बचने के लिए इस दिन भगवान शिव की स्तुति की थी।
शिव पुराण: इसमें महाशिवरात्रि के महात्म्य और चारों प्रहर की पूजा का सबसे विस्तृत वर्णन मिलता है।
स्कंद पुराण: यहाँ शिवरात्रि के व्रत की महिमा और इसके पुण्य फलों के बारे में बताया गया है।
लिंग पुराण: इसमें ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य और उसकी महिमा का उल्लेख है।
चार प्रहर की पूजा: शिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित किया जाता है और हर प्रहर में अलग-अलग अभिषेक किया जाता है।
जागृति (Night Vigil): इस रात सोना वर्जित माना जाता है; पूरी रात शिव के भजनों और 'ॐ नमः शिवाय' का कीर्तन करना चाहिए।
खान-पान: यह व्रत फलाहारी होता है। अनाज और तामसिक भोजन का त्याग करना अनिवार्य है।
शुचिता: मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और पूरी तरह भक्ति में लीन रहें।
कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप्प आपकी शिव भक्ति को सरल और शास्त्रसम्मत बनाने में मदद करता है:
निशिता काल मुहूर्त (Nishita Kaal Timing): महाशिवरात्रि की पूजा का सबसे मुख्य समय 'निशिता काल' (मध्यरात्रि) होता है। ऐप्प आपको आपके शहर के अनुसार सटीक समय बताता है।
रुद्राभिषेक बुकिंग (Rudrabhishek Booking): यदि आप अपने नाम और गोत्र से विशेष रुद्राभिषेक करवाना चाहते हैं, तो आप ऐप्प के जरिए अनुभवी विद्वानों से ऑनलाइन अभिषेक सेवा ले सकते हैं।
चार प्रहर की विधि (Chaar Prahar Rituals): प्रत्येक प्रहर में किन वस्तुओं से अभिषेक करना चाहिए (जैसे प्रथम प्रहर में दूध, द्वितीय में दही आदि), इसका पूरा गाइडेंस ऐप्प पर उपलब्ध है।
मंत्र जप काउंटर (Mantra Counter): 'महामृत्युंजय मंत्र' या 'पंचाक्षरी मंत्र' का जाप करते समय आप ऐप्प के डिजिटल काउंटर का उपयोग कर सकते हैं।
पंडित परामर्श (Astrologer Consultation): अपनी कुंडली के दोषों (जैसे कालसर्प दोष) के निवारण के लिए शिवरात्रि पर क्या विशेष उपाय करें, इसके लिए आप ऐप्प पर मौजूद ज्योतिषियों से लाइव बात कर सकते हैं।
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