व्रत कथा की सेवा राशि 1500 है
The service amount for the Vrat Katha is Rs 1500.
अपने घर पर करवाने पर आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी
If you get it done at your home, you will have to pay for the travel expenses separately and bring the materials yourself.
गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव और उनकी असीम कृपा प्राप्ति का महापर्व है। इसे 'विनायक चतुर्थी' या 'कलंक चतुर्थी' भी कहा जाता है।
तिथि: यह व्रत प्रत्येक वर्ष भाद्रपद (भादो) मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
मास व्रत - यह व्रत प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को किया जाता है
समय: अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह अगस्त या सितंबर के महीने में आता है। इसी दिन से 10 दिवसीय 'गणेशोत्सव' का प्रारंभ होता है जो अनंत चतुर्दशी तक चलता है।
प्रारम्भ: पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने तन के उबटन (चंदन) से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण फूँक दिए। उन्होंने बालक को द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया। जब भगवान शिव आए, तो बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। क्रोधवश शिव जी ने बालक का सिर काट दिया।
पुनर्जन्म: देवी पार्वती के विलाप और क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे (गजानन) का सिर उस बालक के धड़ पर जोड़ दिया और उन्हें पुनर्जीवित किया। देवताओं ने उन्हें 'प्रथम पूज्य' होने का वरदान दिया। इसी दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
अधिष्ठातृ देवता: इस व्रत के मुख्य देवता भगवान श्री गणेश हैं, जो बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के अधिष्ठाता हैं।
शास्त्रों में उल्लेख: इसका विस्तृत वर्णन गणेश पुराण, मुद्गल पुराण, और पद्म पुराण में मिलता है। वेदों में भी 'गणानां त्वा गणपतिं हवामहे' मंत्र के माध्यम से उनकी स्तुति की गई है।
मनोकामना: यह व्रत मुख्य रूप से विघ्न विनाश (बाधाओं को दूर करने), ज्ञान की प्राप्ति, और घर में सुख-समृद्धि की स्थापना के लिए रखा जाता है।
लाभ:
कार्य में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
विद्यार्थियों को बुद्धि और एकाग्रता प्राप्त होती है।
आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है और घर में 'रिद्धि-सिद्धि' का वास होता है।
चंद्र दर्शन निषेध: इस दिन रात को चंद्रमा देखना वर्जित है, क्योंकि माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति पर झूठा कलंक (दोष) लग सकता है।
भोजन: व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन करना चाहिए। कई लोग इस दिन निराहार रहकर शाम को भगवान को भोग लगाने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं।
पूजन विधि: मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित करना, उन्हें 21 दूर्वा (घास) चढ़ाना और 21 मोदक का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण पर जब 'स्यमंतक मणि' चोरी करने का झूठा कलंक लगा था, तब उन्होंने देवर्षि नारद के परामर्श पर इस व्रत को किया था और इसकी कथा सुनी थी। इसके प्रभाव से वे कलंक मुक्त हुए थे।
जो लोग अपने जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
विद्यार्थी जो शिक्षा में सफलता चाहते हैं।
व्यापारी जो नए कार्य की शुरुआत कर रहे हैं।
वह हर व्यक्ति जो मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति चाहता है।
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ऑनलाइन मूर्ति स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा: ऐप के विद्वान आचार्य वीडियो कॉल के माध्यम से आपके घर की गणेश प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा और षोडशोपचार पूजन संपन्न करवाते हैं।
कथा श्रवण: आप ऐप के 'लाइव कथा' सेक्शन में जुड़कर गणेश चतुर्थी की प्रामाणिक कथा सुन सकते हैं।
21 दूर्वा अर्चन: यदि आप विशेष अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो ऐप के माध्यम से काशी के पंडितों द्वारा अपने नाम से 'सहस्त्रार्चन' (हजारों नामों के साथ अर्चन) करवा सकते हैं।
मुहूर्त और पंचांग: चतुर्थी तिथि के प्रारंभ और समापन का सबसे सटीक समय आपको ऐप के पंचांग में मिल जाएगा।
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