व्रत कथा की सेवा राशि 1500 है
The service amount for the Vrat Katha is Rs 1500.
छठ पूजा न केवल एक पर्व है, बल्कि यह प्रकृति, शुचिता और अनुशासन का महापर्व है। यह एकमात्र ऐसा उत्सव है जिसमें न केवल उगते सूर्य, बल्कि डूबते सूर्य (अस्तचलगामी सूर्य) को भी अर्घ्य दिया जाता है।
छठ पूजा सूर्य उपासना का सबसे पवित्र पर्व है। यह मुख्य रूप से साल में दो बार मनाया जाता है:
कार्तिक छठ (प्रमुख): दीपावली के छठे दिन, कार्तिक शुक्ल षष्ठी को।
चैती छठ: चैत्र शुक्ल षष्ठी को।
यह चार दिवसीय अनुष्ठान है जो नहाय-खाय से शुरू होकर उषा अर्घ्य (सप्तमी की सुबह) पर समाप्त होता है।
इस व्रत में विशेष रूप से भगवान सूर्य और उनकी मानस पुत्री छठी मइया (जिन्हें शास्त्रों में 'षष्ठी देवी' कहा गया है) की पूजा की जाती है।
मान्यता: सूर्य को जीवन, ऊर्जा और आरोग्य का कारक माना जाता है। छठी मइया बच्चों की रक्षा करने वाली और वंश की वृद्धि करने वाली देवी मानी जाती हैं।
यह व्रत निम्नलिखित कामनाओं के लिए किया जाता है:
संतान प्राप्ति और दीर्घायु: संतान की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए।
आरोग्य: कुष्ठ रोग जैसे चर्म रोगों से मुक्ति और अच्छी सेहत के लिए।
समृद्धि: परिवार में सुख, शांति और आर्थिक संपन्नता के लिए।
वैज्ञानिक लाभ: जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से 'प्रिज्म' प्रभाव बनता है, जिससे सूर्य की किरणें शरीर की ऊर्जा और आंखों की रोशनी बढ़ाती हैं।
शास्त्रों और लोककथाओं के अनुसार यह व्रत सबसे पहले किसने किया, इसके कई संदर्भ मिलते हैं:
| पात्र | संदर्भ |
| माता सीता | मुदगल ऋषि की सलाह पर रावण वध के बाद आत्मशुद्धि और सूर्य देव के आशीर्वाद के लिए मुंगेर (बिहार) में व्रत किया। |
| द्रौपदी | पांडवों का खोया हुआ राज्य वापस पाने के लिए धौम्य ऋषि के परामर्श पर यह व्रत रखा। |
| प्रियव्रत | राजा प्रियव्रत ने मृत संतान को पुनर्जीवित करने के लिए देवी षष्ठी की पूजा की थी। |
| कर्ण | अंग देश के राजा कर्ण सूर्य पुत्र थे और वे घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य की उपासना करते थे। |
ऋग्वेद: इसमें सूर्य उपासना के महत्व और 'अदिति' (देवताओं की माता) की महिमा का वर्णन है, जो छठी मइया का ही एक रूप मानी जाती हैं।
ब्रह्मवैवर्त पुराण: प्रकृति खंड में 'षष्ठी देवी' के स्वरूप और उनके द्वारा प्रियव्रत के पुत्र की रक्षा का विस्तार से वर्णन है।
छठ पूजा अपने कठिन नियमों के लिए प्रसिद्ध है:
निर्जला व्रत: व्रती लगभग 36 घंटे तक निर्जला (बिना पानी के) व्रत रखते हैं।
शुचिता: भोजन पूरी तरह सात्विक (बिना प्याज-लहसुन) और नए चूल्हे पर बनता है।
भूमि शयन: व्रत के दौरान जमीन पर चटाई बिछाकर सोया जाता है।
पवित्रता: पूजा के बर्तनों और सामग्री को छूने से पहले स्नान करना अनिवार्य है।
कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) ऐप्प इस कठिन व्रत को विधि-विधान से पूर्ण करने में आपकी डिजिटल मार्गदर्शक बन सकती है:
सटीक मुहूर्त: अर्घ्य देने का सही समय (सूर्यास्त और सूर्योदय) आपके शहर के अक्षांश-देशांतर के अनुसार प्राप्त करें।
पूजा विधि निर्देश: स्टेप-बाय-स्टेप ऑडियो या वीडियो गाइड के माध्यम से 'खरना' और 'अर्घ्य' की विधि जान सकते हैं।
ज्योतिषीय परामर्श: आपकी कुंडली के अनुसार सूर्य दोष निवारण के लिए विशेष मंत्रों का सुझाव।
व्रत कथा: ऐप्प पर उपलब्ध छठ व्रत कथा को परिवार के साथ सुनकर अनुष्ठान पूरा कर सकते हैं।
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