व्रत कथा की सेवा राशि 1500 है
The service amount for the Vrat Katha is Rs 1500.
अपने घर पर करवाने पर आने जाने का व्यय अलग से देना होगा और सामग्री स्वयं से लानी होगी
If you get it done at your home, you will have to pay for the travel expenses separately and bring the puja materials yourself.
तीज का त्यौहार भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, अटूट प्रेम और साधना का प्रतीक है। मुख्य रूप से 'तीज' तीन प्रकार की होती है (हरियाली, कजरी और हरतालिका), लेकिन इनमें हरतालिका तीज को सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है।
तिथि: यह व्रत भाद्रपद (भादो) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
समय: यह अगस्त या सितंबर के महीने में आता है। यह गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले पड़ता है।
इसका प्रचलन मुख्य रूप से उत्तर और मध्य भारत में है।
प्रमुख राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड।
दक्षिण भारत: यहाँ इसे 'गौरी हब्बा' (Gowri Habba) के रूप में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मनाया जाता है। नेपाल में भी यह त्यौहार बहुत भव्यता के साथ मनाया जाता है।
पूज्य देव: इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है।
कामना: सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएँ मनचाहा और सुयोग्य वर पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
इस व्रत का प्रारम्भ माता पार्वती की कठिन तपस्या से हुआ था।
कथा: माता पार्वती ने महादेव को पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर अन्न-जल त्याग कर 108 वर्षों तक घोर तपस्या की। उनके पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन पार्वती जी शिव को अपना मान चुकी थीं। उनकी सहेलियों ने उन्हें वन में 'हर' (अपहरण) लिया ताकि वह छिपकर तपस्या कर सकें, इसीलिए इसका नाम हरतालिका (हरत + आलिका यानी सखी द्वारा हरण) पड़ा।
परिणाम: भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत (बालू) का शिवलिंग बनाकर पूजन किया, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
तीज का धार्मिक महत्व लिंग पुराण, स्कंद पुराण, हरिवंश पुराण और भविष्योत्तर पुराण जैसे शास्त्रों में मिलता है। इन ग्रंथों में इसे 'हरितालिका व्रतोद्यापन' और अखंड सौभाग्य देने वाला व्रत बताया गया है।
यह हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक है:
नियम: यह व्रत निर्जला और निराहार (बिना भोजन और पानी के) रखा जाता है। इसमें रात्रि जागरण का विशेष महत्व है, जहाँ रात भर भजन-कीर्तन किया जाता है। एक बार व्रत शुरू करने पर इसे आजीवन करना पड़ता है।
लाभ: मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से सुहाग की रक्षा होती है, घर में सुख-शांति आती है और जीवन के सभी क्लेश दूर होते हैं।
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मुहूर्त और विधि: ऐप आपको पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त और पूजन सामग्री की पूरी सूची (चेकलिस्ट) प्रदान करता है।
ज्योतिषीय परामर्श: यदि व्रत के संकल्प या नियमों को लेकर कोई दुविधा है, तो आप विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर सकते हैं।
विशेष टिप: हरतालिका तीज के दिन मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाना और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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