मंगलवार का व्रत शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति पाने के लिए विशेष रूप से किया जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बजरंगबली (हनुमान जी) को समर्पित है।
यहाँ इस व्रत से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई है:
ज्योतिष शास्त्र और नवग्रहों में मंगलवार का दिन 'मंगल ग्रह' (Mars) का माना जाता है। मंगल को ग्रहों का सेनापति कहा जाता है। यदि किसी की कुंडली में मंगल भारी हो या 'मांगलिक दोष' हो, तो यह व्रत अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
कब शुरू करें: इस व्रत को किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है।
संकल्प: सामान्यतः लोग 21 मंगलवारों तक व्रत करने का संकल्प लेते हैं, जिसके बाद इसका उद्यापन किया जाता है।
किसे करना चाहिए:
जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो।
जिन्हें अत्यधिक क्रोध आता हो या जो कर्ज से परेशान हों।
जो संतान सुख की इच्छा रखते हों।
जिन्हें साहस और आत्मविश्वास की कमी महसूस होती हो।
मंगलवार व्रत के नियम अन्य व्रतों की तुलना में थोड़े कड़े होते हैं:
ब्रह्मचर्य: इस दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
साफ-सफाई: स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ होता है।
पूजा: हनुमान जी की मूर्ति के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं, उन्हें लाल फूल और सिंदूर अर्पित करें।
नमक का त्याग: इस व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
क्या खाएं: दिन में केवल एक बार भोजन (शाम के समय) किया जाता है। भोजन में मीठा ही होना चाहिए। आप हलवा, गुड़, गेहूं की रोटी या मीठी पूड़ी खा सकते हैं।
क्या न खाएं: नमक, मिर्च, तेल और अनाज (यदि पूर्ण निराहार रहें) से बचें। तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज) का स्पर्श भी न करें।
प्राचीन काल में एक ब्राह्मण दंपत्ति (ऋषिदत्त और उनकी पत्नी सुनंदा) रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। ब्राह्मण वन में हनुमान जी की पूजा करने गया, जबकि पत्नी घर पर व्रत रखती थी। एक बार पत्नी ने व्रत के दौरान भोजन नहीं बनाया और हनुमान जी को भोग लगाए बिना खुद भी कुछ नहीं खाया।
उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उसे एक पुत्र का वरदान दिया, जिसका नाम 'मंगल' रखा गया। जब ब्राह्मण घर लौटा, तो उसे शक हुआ। उसने बच्चे को कुएं में फेंक दिया, लेकिन हनुमान जी ने बच्चे की रक्षा की। जब ब्राह्मण को अपनी गलती और हनुमान जी की कृपा का एहसास हुआ, तो वह भी नियमित व्रत करने लगा। तब से यह व्रत सुख-संपत्ति और संतान प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध हुआ।
मंगलवार के व्रत और मंगल ग्रह की शांति का उल्लेख स्कंद पुराण के 'अवंतिका खंड' में मिलता है। साथ ही, ऋग्वेद में मंगल देव को 'भूमि पुत्र' (धरती का बेटा) कहा गया है। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी शास्त्रों में मंगल जनित दोषों के निवारण हेतु सर्वोत्तम बताया गया है।
कैवल्य एस्ट्रो जैसे आधुनिक ज्योतिष ऐप आपके व्रत को अधिक व्यवस्थित और विधिपूर्ण बनाने में आपकी मदद करते हैं। आप इसका उपयोग इन तरीकों से कर सकते हैं:
सटीक मुहूर्त: ऐप के 'पंचांग' सेक्शन में जाकर आप व्रत शुरू करने का सबसे शुभ मुहूर्त (चौघड़िया) देख सकते हैं।
डिजिटल कथा और आरती: यदि आपके पास पुस्तक उपलब्ध नहीं है, तो ऐप के 'लाइब्रेरी' या 'पूजा' सेक्शन में मंगलवार व्रत कथा और हनुमान चालीसा का ऑडियो/टेक्स्ट पढ़ सकते हैं।
ऑनलाइन पंडित/परामर्श: यदि आप मंगल दोष के लिए विशेष पूजा करना चाहते हैं, तो ऐप के जरिए अनुभवी ज्योतिषियों से बात करके व्यक्तिगत 'संकल्प' ले सकते हैं।
रिमाइंडर: आप ऐप में रिमाइंडर सेट कर सकते हैं ताकि व्रत के नियम और आरती का समय न चूकें।
नोट :व्रत कथा पूजन सेवा राशि 1500 है जिसमे पंडित जी पूजन व कथा करेंगे |
Note: The cost of Vrat Katha Poojan Seva is Rs. 1500 in which Pandit ji will perform the Poojan and Katha.
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