अनुष्ठान सेवा राशि - 1500
Anushthan Seva Amount - 1500
घर पर पूजन कथा करवाने के लिए मार्ग व्यय अलग से देना होगा और पूजन सामग्री स्वयं से लानी होगी
To get the puja katha done at home, you will have to pay the travel expenses separately and bring the puja material yourself.
एकादशी व्रत हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र व्रतों में से एक है। पद्म पुराण के अनुसार, एकादशी स्वयं भगवान विष्णु का ही स्वरूप है।
यहाँ आपके द्वारा पूछे गए सभी प्रश्नों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
शास्त्रों के अनुसार, सतयुग में मुर नामक दैत्य ने देवलोक पर विजय प्राप्त कर ली थी। भगवान विष्णु और मुर के बीच लंबा युद्ध चला। युद्ध के दौरान जब भगवान विश्राम कर रहे थे, तब उनके शरीर से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई जिसने मुर दैत्य का वध किया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस कन्या को 'एकादशी' नाम दिया और उसे अपनी शक्ति का दर्जा दिया।
एकादशी का व्रत हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को किया जाता है। एक वर्ष में कुल 24 एकादशियाँ होती हैं (अधिमास होने पर 26)।
एकादशी का विस्तृत वर्णन मुख्य रूप से पद्म पुराण, स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में मिलता है। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को प्रत्येक एकादशी का महत्व और कथा सुनाई है।
प्रारंभ: यह व्रत सृष्टि के आरंभ से ही अस्तित्व में है, लेकिन विधिवत रूप से इसकी महिमा भगवान विष्णु द्वारा स्थापित की गई।
सर्वप्रथम किसने सुनाई: पुराणों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन और युधिष्ठिर को विस्तार से इन कथाओं का ज्ञान दिया। उससे पूर्व, ऋषि वशिष्ठ ने राजा दिलीप को और नारद मुनि ने कई राजाओं को यह कथा सुनाई थी।
प्रचलन: राजा अंबरीष ने इस व्रत को अत्यंत कठोरता से किया था, जिसके बाद इसका प्रचलन जनमानस में बढ़ा।
पाप मुक्ति: इसे 'पापमोचिनी' माना जाता है, जो जाने-अनजाने में किए गए पापों को नष्ट करती है।
मानसिक शांति: चंद्रमा की स्थिति का मन पर प्रभाव कम होता है, जिससे एकाग्रता बढ़ती है।
मोक्ष की प्राप्ति: शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत करने वाला व्यक्ति वैकुंठ धाम को प्राप्त करता है।
स्वास्थ्य: यह शरीर को डिटॉक्स (शुद्ध) करने का सर्वश्रेष्ठ धार्मिक तरीका है।
नियम:
दशमी: एक समय सात्विक भोजन करें।
एकादशी: पूर्ण उपवास रखें या फलाहार लें। चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
द्वादशी: शुभ मुहूर्त (पारण समय) में व्रत खोलें।
ब्राह्मणों की संख्या:
सामान्यतः एकादशी व्रत कथा के लिए 1 ब्राह्मण को भोजन कराना और दान देना शुभ माना जाता है। हालाँकि, यह आपकी सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से आप घर बैठे इस पूजा का लाभ उठा सकते हैं:
| सेवा | विवरण |
| ऑनलाइन संकल्प | आप ऐप के जरिए अपना नाम और गोत्र देकर ई-पूजा का संकल्प ले सकते हैं। |
| विद्वान पंडित | कैवल्य एस्ट्रो के अनुभवी ब्राह्मण आपकी ओर से विधिवत कथा और पूजन संपन्न करते हैं। |
| लाइव दर्शन | आप अपने मोबाइल पर पूजा का सीधा प्रसारण (Live Streaming) देख सकते हैं। |
| प्रसाद वितरण | पूजा के बाद सिद्ध किया हुआ प्रसाद आपके पते पर भेज दिया जाता है। |
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