अनुष्ठान शुल्क- 21000(सामग्री व ब्राह्मण दक्षिणा सहित)
Ritual Fee – 21000 (Including materials and Brahmin Dakshina)
घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय और रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी
If the house is being arranged, the travel expenses and accommodation will be borne by the host.
पितृ दोष शांति साधना: पूर्वजों के आशीर्वाद और कुल की उन्नति का मार्ग
ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को सबसे बड़ा अवरोध माना गया है। जब हमारे पूर्वज अतृप्त होते हैं या उनकी विधिवत अंत्येष्टि/श्राद्ध नहीं होता, तो कुंडली के नौ ग्रह अनुकूल होने के बावजूद व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती। पितृ दोष शांति साधना इसी गतिरोध को समाप्त करने का आध्यात्मिक उपचार है।
पितृ दोष तब बनता है जब कुंडली के नौ ग्रहों में से सूर्य या चंद्रमा का राहु या केतु से संबंध हो, या अष्टम और द्वादश भाव में पाप ग्रहों की स्थिति हो।
शास्त्रों में उल्लेख: इसका वर्णन 'मार्कण्डेय पुराण', 'गरुड़ पुराण' और 'मनुस्मृति' में विस्तार से मिलता है। ऋग्वेद (10.15) में 'पितृ सूक्त' के माध्यम से पितरों का आह्वान किया गया है, जहाँ उन्हें 'अर्यमा' (पितरों के देव) के साथ पूजनीय बताया गया है।
उद्गम कथा: महाभारत के 'अनुशासन पर्व' के अनुसार, जब भीष्म पितामह शरशय्या पर थे, उन्होंने युधिष्ठिर को पितरों की प्रसन्नता का महत्व बताया था। उन्होंने कहा था कि जो पुत्र अपने पितरों का तर्पण नहीं करता, उसका सारा पुण्य क्षीण हो जाता है। पितृ पूजा का उद्गम स्वयं भगवान राम द्वारा वनवास के दौरान 'फल्गु नदी' (गया) के तट पर महाराज दशरथ का पिंड दान करने से भी जुड़ा है।
वंश वृद्धि: संतान प्राप्ति की बाधाएं दूर होती हैं और कुल का नाम बढ़ता है।
ग्रह क्लेश से मुक्ति: घर में होने वाले अकारण झगड़े शांत होते हैं।
आर्थिक स्थिरता: व्यापार में रुका हुआ धन प्राप्त होता है और दरिद्रता दूर होती है।
विवाह में सफलता: मांगलिक या अन्य दोषों के कारण विवाह में आ रही देरी समाप्त होती है।
मानसिक शांति: जातक को बुरे सपनों और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है।
| विवरण | विस्तृत जानकारी |
| समय अवधि | यह साधना सामान्यतः 1 दिन में पूर्ण होती है। |
| शुद्ध मूल मंत्र | "ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधा नम:। पितामहेभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधा नम:। प्रपितामहेभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधा नम:॥" |
| जप संख्या | पितृ गायत्री और पितृ दोष निवारण मंत्र का 11,000 जप। |
| ब्राह्मण संख्या | पूर्ण फल के लिए 3 विद्वान ब्राह्मणों का समूह अनिवार्य है। |
| विशेष सामग्री | तिल, जौ, कुश, सफेद फूल, कच्चा दूध और गया की मिट्टी के पिंड। |
पितृ दोष से लाभ तभी मिलता है जब साधना 'निस्वार्थ भाव' और 'श्रद्धा' से की जाए। साधना के बाद गौ सेवा (गाय को चारा खिलाना), कौवों को भोजन और पीपल के वृक्ष की पूजा करना इस साधना के प्रभाव को स्थायी बना देता है।
कैवल्य एस्ट्रो ऐप पितृ दोष शांति को अत्यंत सुलभ और प्रामाणिक बनाता है:
कुंडली विश्लेषण: सबसे पहले ऐप के माध्यम से अपनी कुंडली दिखाएं कि दोष का प्रकार क्या है (जैसे चांडाल दोष जनित पितृ दोष या ग्रहण दोष)।
पंडित चयन: ऐप पर उपलब्ध काशी, गया या त्रयंबकेश्वर के अनुभवी आचार्यों का चयन करें।
लाइव संकल्प: आप अपने घर के मंदिर में शुद्ध वस्त्र पहन कर बैठें। पंडित जी वीडियो कॉल पर आपका हाथ जुड़वाकर आपके पितरों का नाम लेकर लाइव संकल्प करवाएंगे।
पूजा का सजीव प्रसारण (Live Streaming): मंत्र जाप, हवन और तर्पण की पूरी प्रक्रिया आपके मोबाइल स्क्रीन पर लाइव चलेगी। आप घर बैठे अक्षत और जल छिड़क कर मानसिक रूप से सम्मिलित हो सकते हैं।
दान-दक्षिणा व्यवस्था: पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन और वस्त्र दान की रसीद एवं वीडियो प्रमाण ऐप के माध्यम से साझा किया जाएगा।
प्रसाद: सिद्ध किया हुआ 'पितृ रक्षा कवच' या 'यंत्र' आपके पते पर भेज दिया जाता है।
एक बार ऋषि कौशिक के कुल में अकाल पड़ गया और सुख-शांति समाप्त हो गई। उन्होंने ध्यान लगाया तो पाया कि उनके पूर्वज प्यासे और भूखे हैं। उन्होंने भगवान विष्णु की आज्ञा से 'पितृ तर्पण' और 'महालक्ष्मी' की संयुक्त साधना की। जैसे ही उन्होंने कुश के जल से पितरों को तृप्त किया, उनके कुल के कष्ट समाप्त हो गए। तभी से यह माना जाता है कि "पितर प्रसन्न तो देवता प्रसन्न।"
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products