कर्म की सेवा राशि- 21000 (आचार्य दक्षिणा व सामग्री सहित )
Service amount of Karma – 21000 (including Acharya Dakshina and materials)
नारायण बलि: अकाल मृत्यु जनित दोषों और पितृ ऋण से मुक्ति का महा-अनुष्ठान
Narayan Bali: A grand ritual to free oneself from the sins of untimely death and the debt of ancestors.
नारायण बलि एक अत्यंत विशिष्ट और प्रभावशाली आध्यात्मिक प्रक्रिया है। यह सामान्य श्राद्ध से भिन्न है क्योंकि यह पितरों के लिए नहीं, बल्कि भगवान विष्णु (नारायण) के निमित्त की जाती है ताकि परिवार में पितृ दोष के कारण आ रही बाधाओं का समूल नाश हो सके।
नारायण बलि मुख्य रूप से 'प्रेत बाधा' या 'अकाल मृत्यु' (आत्महत्या, दुर्घटना, रोग, सर्प दंश आदि) से उत्पन्न दोषों को शांत करने के लिए की जाती है। जब कोई पूर्वज अतृप्त रहकर परलोक सिधार जाता है, तो वह परिवार के सदस्यों को कष्ट देता है।
शास्त्रीय उल्लेख: इसका विस्तृत वर्णन 'गरुड़ पुराण' (प्रेत कल्प), 'धर्म सिंधु' और 'निर्णय सिंधु' में मिलता है। वेदों के अनुसार, भगवान नारायण ही समस्त जीवधारियों की 'गति' के स्वामी हैं, इसलिए उन्हीं की शरण में जाने से जीवात्मा को मुक्ति मिलती है।
उद्गम: पौराणिक कथा के अनुसार, जब महाराज परीक्षित को तक्षक नाग के डसने का श्राप मिला, तब उनके उद्धार के लिए और पूर्वजों की शांति के लिए श्रीमद्भागवत और नारायण पूजा का विधान बताया गया। यह साधना ऋषि शौनक द्वारा प्रतिपादित विधियों पर आधारित है।
इस पूजा से जातक को ऐसे लाभ मिलते हैं जो अन्य किसी पूजा से संभव नहीं:
अकाल मृत्यु दोष निवारण: परिवार में बार-बार हो रही दुर्घटनाओं या अप्राकृतिक मृत्यु के चक्र को तोड़ता है।
पितृ ऋण से मुक्ति: पूर्वजों की सूक्ष्म शरीर से मुक्ति होती है, जिससे उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
वंश वृद्धि: यह साधना उन लोगों के लिए रामबाण है जिनकी संतान नहीं हो रही या संतान अल्पायु हो रही है।
व्यापार और सुख: घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है और कार्यक्षेत्र की बाधाएं समाप्त होती हैं।
दुःस्वप्न मुक्ति: यदि पितर स्वप्न में आकर डराते हैं या कष्ट देते हैं, तो वह तुरंत बंद हो जाता है।
| विवरण | विस्तृत जानकारी |
| समय अवधि | यह अनुष्ठान पूर्ण होने में 1 दिन का समय लगता है। |
| शुद्ध मूल मंत्र | "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" एवं "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री विष्णवे नमः" |
| मंत्र जाप संख्या | विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ के साथ राहु-केतु और यम के मंत्रों का 11,000 जाप। |
| ब्राह्मण संख्या | मुख्य रूप से 1 आचार्य और 1 सहयोगी ब्राह्मण अनिवार्य हैं। |
| विशेषता | इसमें सोने की प्रतिमा बनाकर भगवान नारायण का पूजन और फिर उसका दान किया जाता है। |
कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपको नासिक (त्रयंबकेश्वर) या हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थों के विद्वानों से घर बैठे जोड़ता है:
ऐप डाउनलोड और चयन: Kaivalya Astro ऐप पर 'Astro service' सेक्शन में 'Narayan Bali' विकल्प चुनें।
ज्योतिषीय विश्लेषण: पूजा से पहले ऐप के आचार्य आपकी कुंडली देखकर यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको नारायण बलि के साथ 'नाग बलि' की आवश्यकता है या नहीं।
नाम-गोत्र संकल्प: आचार्य आपसे आपकी फोटो और गोत्र के साथ लाइव संकल्प करवाते हैं।
अनुष्ठान दर्शन: आप दूर रहते हुए भी देख सकते हैं कि किस प्रकार वैदिक ऋचाओं के साथ आहुतियां दी जा रही हैं।
प्रसाद वितरण: पूजा की भस्म, रक्षा सूत्र और सिद्ध किया हुआ प्रसाद कूरियर के जरिए आपके घर भेजा जाता है।
इतिहास में राजा हरिश्चंद्र और युधिष्ठिर ने अपने कुल की शुद्धि के लिए भगवान विष्णु के शरणगत होकर ऐसे अनुष्ठान किए थे। एक प्राचीन व्याख्यान के अनुसार, 'कौशिक' ऋषि के कहने पर एक राजा ने, जिसके पूर्वज प्रेत योनि में कष्ट पा रहे थे, तीन दिन का नारायण बलि विधान किया था। पूजा के तीसरे दिन आकाश से पुष्प वर्षा हुई और उसके पूर्वज विमान में बैठकर विष्णु लोक को प्रस्थान कर गए। तभी से यह 'मोक्ष प्रदायिनी' पूजा प्रचलित हुई।
यह पूजा घर पर नहीं, बल्कि हमेशा तीर्थ स्थान, नदी तट या मंदिर में ही करनी चाहिए।
सूतक या पातक (मृत्यु या जन्म) की स्थिति में यह पूजा वर्जित है।
साधना के दौरान सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करना होता है।
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