पूजन सेवा शुल्क-15000(संपूर्ण सामग्री और आचार्य खर्च सहित )
घर पर अनुष्ठान कराने पर मार्ग के आने जाने का व्यय देय होगा और पूजन सामग्री स्वयं से लानी होगी।
If the ritual is performed at home, the travel expenses will be payable and the puja materials will have to be brought by oneself.
कालसर्प दोष शांति साधना: एक संपूर्ण वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विवेचन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब जन्म कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी सातों ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) आ जाते हैं, तो 'कालसर्प योग' का निर्माण होता है। इसे 'दोष' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति के पुरुषार्थ के फल को अवरुद्ध कर देता है।
कालसर्प दोष का सूक्ष्म उल्लेख 'भृगु संहिता', 'रावण संहिता' और 'नारद पुराण' में मिलता है। वेदों में नागों को पृथ्वी का रक्षक और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
पौराणिक संदर्भ: महाभारत और श्रीमद्भागवत पुराण में परीक्षित को तक्षक नाग द्वारा डसने की कथा कालसर्प और नाग दोष के प्रभाव को दर्शाती है।
उद्गम कथा: प्राचीन काल में जब एक भक्त (महारथी जनमेजय) ने अपने पिता की सर्प दंश से मृत्यु का बदला लेने के लिए 'सर्प सत्र यज्ञ' किया था, तब आस्तिक मुनि ने नागों की रक्षा हेतु शांति पाठ किया। वहीं से नागों की प्रसन्नता और सर्प दोष निवारण की परंपरा का उद्गम हुआ।
इस शांति साधना से जातक को बहुआयामी लाभ प्राप्त होते हैं:
मानसिक शांति: अज्ञात भय, बुरे सपने और मानसिक तनाव से मुक्ति।
करियर में प्रगति: नौकरी और व्यवसाय में आ रही अचानक बाधाएं दूर होती हैं।
संतान सुख: पितृ दोष और नाग दोष के कारण संतान प्राप्ति में आ रही अड़चनें समाप्त होती हैं।
स्वास्थ्य: असाध्य रोगों और शारीरिक कमजोरी में सुधार।
आर्थिक स्थिरता: धन का अपव्यय रुकता है और संचय बढ़ता है।
कालसर्प दोष की शांति मुख्य रूप से राहु, केतु और नवनागों की पूजा पर आधारित है।
| विवरण | विस्तृत जानकारी |
| मुख्य मंत्र | "ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्॥" (सर्प गायत्री मंत्र) |
| जप संख्या | राहु के 18000 मंत्र नाग गायत्री का अनुष्ठान। |
| अवधि | यह साधना सामान्यतः 1 दिन (3 से 6 घंटे) में संपन्न होती है। |
| ब्राह्मण संख्या | पूर्ण विधि-विधान के लिए 2 ब्राह्मणों का समूह सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। |
| सामग्री | चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा, सात अनाज (सप्तधान्य), काले तिल और कुश। |
कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से आप 'त्रयंबकेश्वर' (नासिक) या 'काशी' जैसे सिद्ध स्थानों के विद्वानों से जुड़ सकते हैं:
परामर्श और बुकिंग: ऐप पर अपनी कुंडली दिखाकर यह जानें कि आपके 12 प्रकारों में से कौन सा कालसर्प दोष (जैसे अनंत, कुलिक, वासुकी आदि) है। इसके बाद 'Kalsarp Shanti' पूजा बुक करें।
लाइव वीडियो कॉल: पूजा के समय आचार्य आपसे लाइव जुड़ेंगे। वे आपके नाम और गोत्र का उच्चारण करते हुए 'संकल्प' दिलाएंगे।
संपूर्ण विधि का दर्शन: आप अपने फोन पर राहु-केतु शांति, नाग पूजन और रुद्राभिषेक की पूरी प्रक्रिया लाइव देख सकते हैं।
उपाय दर्शन: पूजा के अंत में चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का विसर्जन या दान की प्रक्रिया भी लाइव दिखाई जाएगी।
डिजिटल रिपोर्ट: पूजा संपन्न होने के बाद आपको मंत्र जप का प्रमाण और प्रसाद भेजने की व्यवस्था की जाती है।
साधना के दौरान और उसके बाद जातक को इस राहु मंत्र का जाप करना चाहिए:
"ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:।"
एवं नागों की प्रसन्नता के लिए:
"अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्। शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥"
कालसर्प दोष शांति के लिए 'नागपंचमी', 'शिवरात्रि' या किसी भी मास की 'अमावस्या' का दिन सर्वश्रेष्ठ होता है। यदि आप इसे स्वयं कर रहे हैं, तो शिव मंदिर में जाकर महादेव पर जल चढ़ाते हुए नाग गायत्री का पाठ करें।
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