सहयोग राशि - 15000 (संपूर्ण खर्च पूजन सामग्री सहित)
घर पर अनुष्ठान कराने पर मार्ग के आने जाने का व्यय देय होगा और पूजन सामग्री स्वयं से लानी होगी।
If the ritual is performed at home, the travel expenses will be payable and the puja materials will have to be brought by oneself.
कुम्भ विवाह और मांगलिक दोष निवारण साधना: विस्तृत परिचय एवं विधान
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में मंगल दोष (Mangal Dosha) वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाओं का मुख्य कारण माना जाता है। जब किसी जातक की कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल स्थित होता है, तो उसे 'मांगलिक' कहा जाता है। कुम्भ विवाह इस दोष के निवारण की सबसे प्राचीन और प्रभावी शास्त्रीय विधि है।
कुम्भ विवाह एक प्रतीकात्मक विवाह है जो वास्तविक विवाह से पूर्व संपन्न किया जाता है। इसमें मांगलिक जातक (वर या कन्या) का विवाह एक मिट्टी के घड़े (कुम्भ) के साथ कराया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मंगल दोष का सारा प्रभाव उस कुम्भ (घड़े) पर चला जाता है, जिसे बाद में विसर्जित कर दिया जाता है। इसके बाद जातक दोषमुक्त होकर सुखी वैवाहिक जीवन जी सकता है।
वैवाहिक सुख: विवाह में आ रही देरी और अड़चनें दूर होती हैं।
दाम्पत्य जीवन: पति-पत्नी के बीच होने वाले अनावश्यक झगड़े और क्लेश समाप्त होते हैं।
दुर्घटना से रक्षा: मांगलिक दोष के कारण होने वाली अनहोनी या जीवनसाथी के स्वास्थ्य कष्ट से मुक्ति मिलती है।
तलाक का भय: यह साधना अलगाव या तलाक जैसी स्थितियों को टालने में सहायक है।
समय सीमा: यह पूजा सामान्यतः 1 दिन (लगभग 3 से 5 घंटे) में संपन्न होती है।
ब्राह्मणों की संख्या: शास्त्रानुसार इसे 2 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा संपन्न कराया जाना चाहिए।
मंत्र जाप: इस साधना में मंगल ग्रह के मूल मंत्र और शांति पाठ का जाप होता है। मुख्य रूप से मंगल मंत्रों का जाप अनुष्ठान के दौरान किया जाता है।
साधना के दौरान इस सिद्ध मंत्र का जाप किया जाता है:
"ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:।" या पौराणिक मंत्र: "धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्। कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम्॥"
मंगल दोष और उसके निवारण का विस्तृत वर्णन 'नारद पुराण', 'बृहत् पाराशर होराशास्त्र' और 'मुहूर्त चिंतामणि' में मिलता है। वेदों में मंगल को 'भूमिपुत्र' कहा गया है। स्कंद पुराण के 'अवंती खंड' में मंगल के जन्म और उसकी उग्रता को शांत करने के उपायों का विस्तार से वर्णन है।
इस साधना का उद्गम ऋषि वशिष्ठ और गर्ग मुनि के काल से माना जाता है। एक प्राचीन व्याख्यान के अनुसार, एक अत्यंत रूपवती कन्या का विवाह जब भी तय होता, उसके होने वाले पति की मृत्यु हो जाती थी। तब ऋषियों ने आकाशवाणी और गणना के आधार पर ज्ञात किया कि कन्या की कुंडली में 'वैधव्य योग' (प्रबल मंगल दोष) है। इसके काट के लिए उन्होंने कन्या का विवाह पहले भगवान विष्णु के प्रतीक 'कुम्भ' से कराया, जिससे दोष कुम्भ पर चला गया और कन्या का बाद का जीवन सुखमय रहा।
कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपको घर बैठे इस जटिल दोष से मुक्ति दिलाने का आधुनिक समाधान प्रदान करता है:
बुकिंग प्रक्रिया: Kaivalya Astro ऐप डाउनलोड करें और 'Remedies' या 'Astro service' सेक्शन में जाएँ।
ज्योतिष परामर्श: सबसे पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपको 'कुम्भ विवाह' की आवश्यकता है या सामान्य 'मंगल शांति' की।
लाइव संकल्प: ऐप के माध्यम से आप उज्जैन (मंगल की जन्मभूमि) या काशी के विद्वान पंडितों से जुड़ते हैं। पंडित जी वीडियो कॉल पर आपका नाम, गोत्र और दोष निवारण हेतु लाइव संकल्प करवाते हैं।
प्रतीकात्मक विवाह: पंडित जी मंत्रोच्चार के साथ मिट्टी के कलश (कुम्भ) का पूजन और विवाह संस्कार संपन्न करते हैं। आप इसे लाइव अपने फोन पर देख सकते हैं।
विसर्जन और शुद्धि: पूजा के अंत में कुम्भ विसर्जन की प्रक्रिया लाइव दिखाई जाती है, जो आपके दोष के अंत का प्रतीक है।
सावधानी: कुम्भ विवाह सदैव शुभ मुहूर्त (जैसे वैशाख शुक्ल पक्ष, गुप्त नवरात्रि या मंगल के नक्षत्रों) में ही किया जाना चाहिए, जिसका निर्धारण कैवल्य एस्ट्रो के विशेषज्ञ पंचांग देखकर करते हैं।
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