अनुष्ठान साधना शुल्क-21000(आचार्य व अनुष्ठान खर्च सहित)
घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय और रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी
If the house is being arranged, the travel expenses and accommodation will be borne by the host.
माता अन्नपूर्णा साधना: स्थिर लक्ष्मी, अक्षय धन और पारिवारिक समृद्धि का महा-अनुष्ठान
माता अन्नपूर्णा को साक्षात जगतजननी पार्वती का वह रूप माना गया है जो संसार के पोषण का उत्तरदायित्व संभालती हैं। जहाँ 'महालक्ष्मी' धन देती हैं, वहीं 'माता अन्नपूर्णा' उस धन में स्थिरता और बरकत प्रदान करती हैं। जिस घर पर अन्नपूर्णा की कृपा होती है, वहाँ कभी अभाव, दरिद्रता या भुखमरी प्रवेश नहीं कर पाती।
माता अन्नपूर्णा को 'अक्षय फल दात्री' कहा जाता है।
शास्त्रीय उल्लेख: इनका विस्तृत वर्णन 'अन्नपूर्णा उपनिषद', 'स्कंद पुराण' (काशी खंड) और 'देवी भागवत पुराण' में मिलता है। वेदों के 'श्री सूक्त' में भी पोषण शक्ति के रूप में इनका आह्वान है।
उद्गम कथा: पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब पृथ्वी पर अन्न-जल का अकाल पड़ा, तब भगवान शिव ने स्वयं 'भिक्षु' का रूप धरकर माता पार्वती (अन्नपूर्णा रूप) से भिक्षा मांगी थी। माता ने काशी में प्रकट होकर समस्त संसार के पोषण का संकल्प लिया। तभी से काशी (वाराणसी) को माता अन्नपूर्णा का प्रधान पीठ माना जाता है।
स्थिर धन: धन आता तो है पर रुकता नहीं, ऐसी समस्या का अंत होता है।
अक्षय बरकत: घर के अन्न भंडार और तिजोरी कभी खाली नहीं होते।
ऋण मुक्ति: व्यापार में घाटा और कर्ज की स्थिति से बाहर निकलने में सहायक।
पारिवारिक सुख: घर में कलह समाप्त होती है और सभी सदस्यों को आरोग्य (स्वास्थ्य) मिलता है।
मानसिक संतुष्टि: जातक में संतोष और सकारात्मकता का संचार होता है।
कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपको सीधे काशी (वाराणसी) के विद्वान ब्राह्मणों से जोड़ता है, जो माता अन्नपूर्णा की प्रधान नगरी है:
चयन एवं बुकिंग: ऐप के 'Sarva Manokamna purn anusthan sadhna' सेक्शन में जाकर 'Annapurna Sthir Dhan Sadhana' का चुनाव करें।
लाइव संकल्प: पूजा के प्रथम दिन आचार्य आपसे वीडियो कॉल पर जुड़ेंगे। वे आपके हाथ में जल और अक्षत लेकर आपके परिवार की सुख-समृद्धि और स्थिर लक्ष्मी प्राप्ति का लाइव संकल्प करवाएंगे।
अभिषेक दर्शन: माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा का दूध, शहद और केसर से होने वाला दिव्य अभिषेक आप अपने फोन पर लाइव देख सकते हैं।
भंडारा सेवा: माँ अन्नपूर्णा की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक किसी भूखे को भोजन न कराया जाए। कैवल्य एस्ट्रो ऐप पर आप अपनी पूजा के साथ 'लाइव कन्या पूजन/भोज' का विकल्प भी चुन सकते हैं, जिसे ब्राह्मण लाइव संपन्न करेंगे।
सिद्ध सामग्री: अनुष्ठान के बाद सिद्ध की गई 'अन्नपूर्णा सिद्ध पोटली' (जिसमें गोमती चक्र, कौड़ी और अभिमंत्रित अन्न होता है) आपके घर भेजी जाती है, जिसे रसोई या तिजोरी में रखना होता है।
एक बार आदि शंकराचार्य काशी में साधना कर रहे थे। उन्हें आभास हुआ कि ब्रह्म ज्ञान के लिए शरीर का पुष्ट होना और अन्न का होना अनिवार्य है। उन्होंने माता अन्नपूर्णा की अत्यंत भावपूर्ण स्तुति की (जिसे आज 'अन्नपूर्णा स्तोत्र' कहा जाता है)। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने साक्षात प्रकट होकर उन्हें भिक्षा दी और वरदान दिया कि जो भी इस स्तुति या साधना को करेगा, वह कभी दरिद्र नहीं रहेगा। तभी से गृहस्थों के लिए यह साधना अनिवार्य मानी गई।
रसोई की शुद्धि: साधना के दौरान घर की रसोई अत्यंत स्वच्छ रहनी चाहिए।
दान: प्रतिदिन पहली रोटी गाय के लिए निकालना अनिवार्य है।
वस्त्र: साधक को पीले या नारंगी वस्त्र धारण करने चाहिए।
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