अनुष्ठान शुल्क- 21000(सम्पूर्ण सामग्री और ब्राह्मण खर्च सहित )
Ritual Fee- 21000 (Including all material and Brahmin expenses)
घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय और रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी
If the house is being arranged, the travel expenses and accommodation will be borne by the host.
ईष्टदेव प्रसन्नता साधना: आत्मिक शक्ति और जीवन के पूर्ण उत्कर्ष का मार्ग
शास्त्रों में कहा गया है कि 'ईष्ट' वह शक्ति है जो आपके हृदय के सबसे समीप है। ईष्टदेव वह देवता होते हैं जिनके साथ आपके पूर्व जन्मों के कर्म और संस्कार जुड़े होते हैं। ईष्टदेव की साधना करने का अर्थ है—स्वयं की आत्मा को परमात्मा के उस विशिष्ट रूप से जोड़ना जो आपके लिए ही बना है।
ईष्टदेव वह दिव्य शक्ति हैं जो जातक को मोक्ष और भौतिक सुख दोनों प्रदान करने की सामर्थ्य रखते हैं।
शास्त्रीय उल्लेख: ईष्टदेव का विचार 'बृहत् पाराशर होराशास्त्र' के 'कारकांश' अध्याय में विस्तार से मिलता है। वेदों में 'एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति' के माध्यम से बताया गया है कि ईश्वर एक है, लेकिन अपनी रुचि और संस्कार के अनुसार हम जिस रूप को चुनते हैं, वही ईष्ट है।
उद्गम और भक्त का व्याख्यान: ईष्ट साधना का सबसे महान उदाहरण गोस्वामी तुलसीदास जी हैं। उनके ईष्ट भगवान श्री राम थे। हनुमान जी ने उन्हें बताया था कि ईष्ट की कृपा के बिना परमात्मा का साक्षात्कार संभव नहीं है। इसी प्रकार मीरा बाई के ईष्ट श्री कृष्ण थे। इन भक्तों ने सिद्ध किया कि जब ईष्ट प्रसन्न होते हैं, तो प्रकृति के नियम भी भक्त के लिए बदल जाते हैं।
शीघ्र फल: अन्य देवताओं की तुलना में ईष्टदेव अपने भक्त की पुकार सबसे जल्दी सुनते हैं।
मानसिक स्पष्टता: भ्रम और अनिर्णय की स्थिति समाप्त होती है।
सुरक्षा कवच: ईष्टदेव जातक के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बना देते हैं जिससे दुर्घटनाएं और शत्रु बाधा टल जाती है।
ग्रह दोष शांति: यदि कुंडली में नौ ग्रह खराब हों, लेकिन ईष्टदेव प्रसन्न हों, तो कोई भी ग्रह आपका अनिष्ट नहीं कर सकता।
आध्यात्मिक उन्नति: ध्यान और समाधि की प्राप्ति सुगम हो जाती है।
यह बिंदु इस साधना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ईष्टदेव की साधना को 'पुरश्चरण' विधि से किया जाता है।
साधना की अवधि: यह साधना मुख्य रूप से 3 दिन की होती है।
ब्राह्मणों की संख्या: * 1 मुख्य आचार्य: जो आपकी कुंडली के अनुसार ईष्ट का निर्धारण और पूजन पद्धति तय करे।
1 सहयोगी ब्राह्मण: जो आपके संकल्पित मंत्रों का सामूहिक जाप करें ताकि ऊर्जा का घनत्व बढ़ सके।
मंत्र जाप की संख्या: ईष्टदेव की पूर्ण प्रसन्नता के लिए 21,000 मंत्रों का जाप अनिवार्य माना गया है। इसके बाद जप का 10% (दशांश) हवन किया जाता है।
शुद्ध मंत्र: ईष्टदेव का मंत्र जातक की कुंडली के पंचम भाव (5th House) से निर्धारित होता है।
जैसे विष्णु भक्तों के लिए: "ॐ नमो नारायणाय"
शिव भक्तों के लिए: "ॐ नमः शिवाय"
शक्ति भक्तों के लिए: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"
(विशेष: गुरु प्रदत्त बीज मंत्र सबसे प्रभावशाली होता है।)
कैवल्य एस्ट्रो ऐप ईष्टदेव साधना को पूर्णतः व्यक्तिगत और प्रामाणिक बनाता है:
ईष्ट निर्धारण: ऐप के विद्वान ज्योतिषाचार्य आपकी जन्म कुंडली का गहराई से विश्लेषण करके आपके 'पंचमेश' और 'आतमकारक' ग्रह के आधार पर आपके सटीक ईष्टदेव की पहचान करते हैं।
लाइव संकल्प: आप अपने घर के शुद्ध वातावरण में बैठते हैं और आचार्य वीडियो कॉल के जरिए आपसे ईष्टदेव का आह्वान और लाइव संकल्प करवाते हैं।
दैनिक लाइव दर्शन: अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन आपके ईष्ट के स्वरूप (जैसे विग्रह या यंत्र) का पूजन और ब्राह्मणों द्वारा किया जा रहा जाप आप Live Streaming पर देख सकते हैं।
मंत्र चेतना: पूजा के दौरान आचार्य आपको आपके ईष्ट के 'कवच' और 'हृदय स्तोत्र' का पाठ लाइव सुनाते हैं, जिससे आपकी सुप्त चेतना जाग्रत होती है।
सिद्धि किट: पूजा के समापन पर ईष्टदेव द्वारा अभिमंत्रित 'ईष्ट कृपा यंत्र', माला और रक्षा सूत्र आपके घर भेजा जाता है, जो जीवनभर आपकी रक्षा करता है।
पुराणों के अनुसार, जब मार्कण्डेय ऋषि की आयु कम थी, तब उनके पिता ने उन्हें उनके ईष्ट (भगवान शिव) की शरण में जाने को कहा। मार्कण्डेय जी ने ईष्ट साधना के बल पर 'महामृत्युंजय' मंत्र की रचना की और यमराज को भी पीछे हटने पर विवश कर दिया। यह कथा सिद्ध करती है कि ईष्टदेव की साधना काल को भी टालने की शक्ति रखती है।
अनन्यता: साधना के दौरान अन्य देवी-देवताओं की तुलना में अपने ईष्ट पर ही पूर्ण ध्यान केंद्रित रखें।
सात्विकता: तामसिक भोजन और विचारों से पूर्णतः परहेज करें।
दीपक: साधना काल में ईष्ट की प्रतिमा के सम्मुख तिल के तेल या घी का दीपक अखंड जलना चाहिए।
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