सेवा शुल्क - 21000 ( ब्राह्मण दक्षिणा व सामग्री सहित )
(Seva Amount- 21000)(With Brahmin Dakshina and Pooja materials)
घर पर करवाने पर मार्ग के आने जाने का व्यय और रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी
If the house is being arranged, the travel expenses and accommodation will be borne by the host.
माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप, माँ सिद्धिदात्री की साधना अनंत सिद्धियों को प्रदान करने वाली मानी गई है। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट है—'सिद्धि' का अर्थ है पूर्णता और 'दात्री' का अर्थ है देने वाली।
माँ सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान हैं और उनके चार हाथ हैं, जिनमें शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित हैं।
पौराणिक उद्गम: भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था। देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप इन्हीं की अनुकंपा से प्रकट हुआ था, जब माँ सिद्धिदात्री शिव के आधे शरीर में समाहित हो गई थीं।
प्रथम भक्त: शास्त्रों के अनुसार, सबसे पहले स्वयं भगवान शिव ने इनकी आराधना की थी। बाद में ऋषि-मुनियों और देवताओं ने ब्रह्मांड की शक्तियों को संतुलित करने के लिए इनकी साधना की।
माँ सिद्धिदात्री का वर्णन मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्रंथों में मिलता है:
देवी भागवत पुराण: यहाँ विस्तार से बताया गया है कि कैसे माँ समस्त ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्रोत हैं।
मार्कण्डेय पुराण (श्री दुर्गा सप्तशती): इसमें 'सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि' श्लोक के माध्यम से उनकी महिमा बताई गई है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण: इसमें माँ को प्रकृति और पुरुष के मिलन की शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है।
यह साधना सामान्यतः नवरात्रि की नवमी तिथि को की जाती है, लेकिन विशेष संकल्प के लिए इसकी अवधि भिन्न हो सकती है:
सामान्य अनुष्ठान: 1 दिन (महानवमी)।
विशेष साधना: 5 दिन दिन का संकल्प।
मंत्र संख्या: शास्त्रीय विधान के अनुसार, (21,000) मंत्रों का जाप सर्वोत्तम माना जाता है। यदि समय का अभाव हो, तो 11,000 मंत्रों का जाप भी फलदायी होता है।
ब्राह्मणों की संख्या: यह आपके संकल्प पर निर्भर करता है। सामान्यतः 2 ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक जप करवाकर अनुष्ठान अल्प समय में पूर्ण किया जा सकता है।
इस साधना से न केवल आध्यात्मिक बल्कि भौतिक उन्नति भी प्राप्त होती है:
अष्ट सिद्धि की प्राप्ति: अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व।
मानसिक शांति: भ्रम और भय का नाश होता है।
कार्य सिद्धि: रुके हुए सरकारी या व्यक्तिगत कार्य पूर्ण होते हैं।
मोक्ष: साधक को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।
साधना के दौरान इस सिद्ध मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:
बीज मंत्र: ॐ ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नमः।
स्तुति मंत्र:
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
यदि आप भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, तो कैवल्य एस्ट्रो ऐप के माध्यम से इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया को घर बैठे संपन्न कर सकते हैं:
ऐप डाउनलोड करें: सबसे पहले प्ले स्टोर से 'Kaivalya Astro' ऐप इंस्टॉल करें।
पूजा अनुभाग (Puja Section): ऐप के 'dharmik aayojan' या 'Online Rituals' सेक्शन में जाएं।
चयन करें: 'Siddhidatri Navdurga Sadhana' का चयन करें।
लाइव जुड़ाव: पूजा के समय आपको एक 'Live Link' प्रदान किया जाएगा। इसके माध्यम से आप वीडियो कॉल द्वारा सीधे मंत्रोच्चार सुन सकते हैं और घर बैठे अर्पण (Visual Participation) कर सकते हैं।
प्रसाद: पूजा संपन्न होने के बाद सिद्ध किया हुआ रक्षा सूत्र और प्रसाद आपके पते पर भेज दिया जाता है।
माँ सिद्धिदात्री को नीले या बैंगनी रंग के वस्त्र और हलवा-पूरी का भोग अत्यंत प्रिय है। साधना के दौरान पूर्ण सात्विकता बनाए रखना अनिवार्य है।
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