Siddh Tulsi Japa Mala 108 Beads | Original Tulsi Wood Prayer Mala for Mantra Jaap, Meditation, Puja & Spiritual Use
तुलसी की माला (Tulsi Mala) हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और सात्विक मानी जाती है। इसका सीधा संबंध भगवान विष्णु और उनके अवतारों (श्री कृष्ण और श्री राम) से है। इसे 'वैष्णव कंठी' भी कहा जाता है।
तुलसी एक पवित्र पौधा है जिसे 'वृंदा' भी कहा जाता है। इसकी लकड़ी से बनी माला को तुलसी माला कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है—एक 'श्यामा तुलसी' (गहरे रंग की) और दूसरी 'रामा तुलसी' (हल्के रंग की)। यह माला न केवल जप के लिए, बल्कि धारण करने के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है।
प्राकृतिक लकड़ी: जब तुलसी का पौधा सूख जाता है, तो उसकी मुख्य जड़ और टहनियों की लकड़ी का उपयोग मनके बनाने के लिए किया जाता है। जीवित पौधे की लकड़ी का उपयोग वर्जित है।
निर्माण प्रक्रिया: सूखी लकड़ी को छीलकर छोटे-छोटे गोल या बेलनाकार दाने बनाए जाते हैं। असली तुलसी की माला बहुत हल्की होती है और पानी में डालने पर डूबती नहीं है।
धागा: इसे आमतौर पर सफेद या पीले सूती धागे में 108+1 (सुमेरु) की संख्या में पिरोया जाता है।
तुलसी माला धारण करने के कड़े नियम और एक विशेष विधि होती है:
दिन: इसे सोमवार, बुधवार या गुरुवार के दिन धारण करना सबसे उत्तम है।
शुद्धिकरण: माला को पहले गंगाजल से धोएं, फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं। अंत में पुनः गंगाजल से साफ करें।
अर्पण: धारण करने से पहले माला को भगवान विष्णु या श्री कृष्ण के चरणों में स्पर्श कराएं।
मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'श्री कृष्णाय नमः' का जाप करते हुए इसे धारण करें।
नियम: तुलसी धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन (प्याज-लहसुन मुक्त) करना चाहिए और मांस-मदिरा से पूर्णतः दूर रहना चाहिए।
मन की शुद्धि: यह मन को शांत करती है और नकारात्मक विचारों व तनाव को दूर रखती है।
एकाग्रता: पढ़ाई और कार्यक्षेत्र में ध्यान केंद्रित करने के लिए यह माला अत्यंत प्रभावी है।
सुरक्षा कवच: माना जाता है कि तुलसी माला धारण करने वाले व्यक्ति के पास अकाल मृत्यु और बुरी शक्तियां नहीं भटकतीं।
स्वास्थ्य: आयुर्वेद के अनुसार, गले में तुलसी धारण करने से गले के रोग और विद्युत तरंगों का संतुलन बना रहता है।
भक्ति मार्ग: इसे धारण करने से भक्त का भगवान विष्णु के साथ गहरा संबंध स्थापित होता है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी योग्य ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से तुलसी माला को सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी विशेष तिथि पर वैदिक मंत्रों, तुलसी स्तोत्र और विधिवत पूजन के माध्यम से माला में प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस प्रक्रिया के बाद माला तुरंत सक्रिय (Energized) हो जाती है।
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