Siddh Shwet Gunja Mala 108 Beads | White Gunja Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation, Puja & Spiritual Prayer
श्वेत गुंजा की माला (White Gunja Mala) को तंत्र और ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत दुर्लभ और चमत्कारी माना जाता है। इसे 'चिरमी के बीज' भी कहा जाता है और इसका सीधा संबंध माता लक्ष्मी और सरस्वती से माना जाता है।
श्वेत गुंजा एक जंगली लता (बेल) के बीज होते हैं। यह बीज आकार में छोटे होते हैं और इनके एक सिरे पर प्राकृतिक रूप से एक काला बिंदु (आंख) होता है। इसे 'सफ़ेद चिरमी' भी कहा जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसे बहुत पवित्र माना जाता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि यह बीज केवल भाग्यशाली व्यक्तियों को ही फल देते हैं।
प्राकृतिक बीज: यह बेल पर लगने वाली फलियों के अंदर से निकलते हैं। ये पूरी तरह से प्राकृतिक होते हैं, इन्हें कारखानों में नहीं बनाया जाता।
चयन प्रक्रिया: माला बनाने के लिए केवल उन बीजों का चयन किया जाता है जो पूरी तरह से सफेद और साफ हों।
निर्माण: बीजों में प्राकृतिक रूप से छेद नहीं होते, इसलिए सावधानीपूर्वक इनमें छेद करके इन्हें सफेद या रेशमी धागे में पिरोया जाता है। इसमें भी सामान्यतः 108 मनके होते हैं।
श्वेत गुंजा माला को धारण करने की एक विशेष तांत्रिक और सात्विक विधि है:
शुभ दिन: इसे शुक्रवार या किसी भी शुभ मुहूर्त जैसे रवि-पुष्य नक्षत्र या पूर्णिमा के दिन धारण करना सबसे उत्तम है।
शुद्धिकरण: माला को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें।
पूजन: इसे माता लक्ष्मी या सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख रखें और सफेद चंदन व सफेद फूल अर्पित करें।
मंत्र जाप: 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जाप करें।
धारण: पूजन के बाद इसे श्रद्धापूर्वक गले में धारण करें या अपनी तिजोरी में रखें।
धन और समृद्धि: इसे धारण करने या पास रखने से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है।
शत्रु बाधा से मुक्ति: यह माला पहनने वाले की नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं के षड्यंत्रों से रक्षा करती है।
बुद्धि और एकाग्रता: श्वेत गुंजा का संबंध मां सरस्वती से भी है, इसलिए यह एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाती है।
नजर दोष: बच्चों या बड़ों को बुरी नजर से बचाने के लिए भी इसे बहुत प्रभावी माना जाता है।
मानसिक शांति: यह मन के विकारों को दूर कर मानसिक स्थिरता प्रदान करती है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी अनुभवी ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इस माला को अभिमंत्रित (सिद्ध) करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान प्रक्रिया: ब्राह्मण द्वारा विशिष्ट तांत्रिक या वैदिक सूक्तों के पाठ और हवन के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस विशेष पूजा के बाद माला तुरंत चैतन्य और प्रभावशाली हो जाती है।
विशेष निर्देश:- हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गयी मंत्रविद्या,यंत्रविद्या,सिद्धसामग्री,एवं आयुर्वेदिक औषधि,और अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते। आप चैनल के विश्वास और चमत्कार को देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते है।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products