Sphatik Mala Choti | Natural Crystal Beads Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation & Puja सिद्ध स्फटिक माला (Siddh Sphatik Mala) हिंदू धर्म और ज्योतिष में अपनी शुद्धता और शीतलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है बल्कि भौतिक उन्नति में भी सहायक होती है। 1. स्फटिक माला क्या है? | What is Sphatik Mala? स्फटिक एक पारदर्शी पत्थर है जिसे 'क्वार्ट्ज' (Quartz) कहा जाता है। यह बर्फ के समान सफेद और पारदर्शी होता है। इसे 'कांच' समझने की भूल अक्सर की जाती है, लेकिन असली स्फटिक प्राकृतिक पत्थर है जो पहाड़ों और खदानों से प्राप्त होता है। इसे 'सफ़ेद बिल्लौर' के नाम से भी जाना जाता है। 2. यह कैसे बनी होती है? | How is it Made? प्राकृतिक स्त्रोत: यह जमीन के भीतर से स्फटिक के पत्थरों के रूप में निकाला जाता है। निर्माण प्रक्रिया: इन पत्थरों को काटकर गोल या डायमंड कट (पहलदार) मनकों का आकार दिया जाता है। धागा: एक अच्छी स्फटिक माला में आमतौर पर 108+1 मनके होते हैं। इसे अक्सर सफेद सूती धागे या रेशमी धागे में पिरोया जाता है। 3. धारण करने की विधि | Method of Wearing स्फटिक माला को धारण करने से पहले उसे शुद्ध और चैतन्य (सिद्ध) करना अनिवार्य है: दिन: इसे सोमवार या शुक्रवार के दिन धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है। शुद्धिकरण: माला को पहले गंगाजल और फिर कच्चे दूध से धोएं। इसके बाद पुन: गंगाजल से साफ करें। धूप-दीप: माला को अगरबत्ती या धूप दिखाएं और माता लक्ष्मी या भगवान शिव की मूर्ति के सामने रखें। मंत्र जाप: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (महालक्ष्मी मंत्र) का 108 बार जाप करें। धारण: मंत्र जाप के बाद इसे गले में धारण करें। 4. स्फटिक माला के लाभ | Benefits of Sphatik Mala मानसिक शांति: स्फटिक की प्रकृति शीतल होती है। यह क्रोध को शांत करता है और मन को एकाग्र बनाता है। मां लक्ष्मी की कृपा: इसे धारण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है। ग्रह शांति: यह मुख्य रूप से शुक्र ग्रह (Venus) को मजबूत करता है और चंद्र दोष को शांत करता है। स्वास्थ्य लाभ: बुखार, सिरदर्द और रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित करने में इसे सहायक माना जाता है। एकाग्रता (Concentration): छात्रों के लिए यह माला याददाश्त और ध्यान लगाने की शक्ति बढ़ाती है। विद्वान ब्राह्मण द्वारा सिद्ध करने की समय सीमा | Time Required for Activation by a Brahmin जब आप किसी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से स्फटिक माला की प्राण-प्रतिष्ठा या शुद्धिकरण करवाते हैं, तो इसकी समय सीमा और प्रक्रिया इस प्रकार रहती है: सिद्ध करने की अवधि (Time Duration): ब्राह्मण द्वारा स्फटिक माला को सिद्ध करने की प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है। इसके लिए किसी विशेष शुभ मुहूर्त जैसे पूर्णिमा, दीपावली, अक्षय तृतीया, या किसी भी मास का शुक्ल पक्ष का शुक्रवार चुना जाता है। अनुष्ठान विधि (Ritual Method): पंडित जी माला को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराते हैं, तत्पश्चात वैदिक मंत्रों के साथ माला का अभिषेक किया जाता है। प्राण-प्रतिष्ठा (Consecration): अंत में माला में देवी लक्ष्मी या इष्ट देव की ऊर्जा को संकल्प के माध्यम से स्थापित किया जाता है, जिससे वह माला उसी समय 'सिद्ध' होकर धारण करने योग्य बन जाती है।
Sphatik Mala Choti | Natural Crystal Beads Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation & Puja
सिद्ध स्फटिक माला (Siddh Sphatik Mala) हिंदू धर्म और ज्योतिष में अपनी शुद्धता और शीतलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है बल्कि भौतिक उन्नति में भी सहायक होती है।
स्फटिक एक पारदर्शी पत्थर है जिसे 'क्वार्ट्ज' (Quartz) कहा जाता है। यह बर्फ के समान सफेद और पारदर्शी होता है। इसे 'कांच' समझने की भूल अक्सर की जाती है, लेकिन असली स्फटिक प्राकृतिक पत्थर है जो पहाड़ों और खदानों से प्राप्त होता है। इसे 'सफ़ेद बिल्लौर' के नाम से भी जाना जाता है।
प्राकृतिक स्त्रोत: यह जमीन के भीतर से स्फटिक के पत्थरों के रूप में निकाला जाता है।
निर्माण प्रक्रिया: इन पत्थरों को काटकर गोल या डायमंड कट (पहलदार) मनकों का आकार दिया जाता है।
धागा: एक अच्छी स्फटिक माला में आमतौर पर 108+1 मनके होते हैं। इसे अक्सर सफेद सूती धागे या रेशमी धागे में पिरोया जाता है।
स्फटिक माला को धारण करने से पहले उसे शुद्ध और चैतन्य (सिद्ध) करना अनिवार्य है:
दिन: इसे सोमवार या शुक्रवार के दिन धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।
शुद्धिकरण: माला को पहले गंगाजल और फिर कच्चे दूध से धोएं। इसके बाद पुन: गंगाजल से साफ करें।
धूप-दीप: माला को अगरबत्ती या धूप दिखाएं और माता लक्ष्मी या भगवान शिव की मूर्ति के सामने रखें।
मंत्र जाप: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (महालक्ष्मी मंत्र) का 108 बार जाप करें।
धारण: मंत्र जाप के बाद इसे गले में धारण करें।
मानसिक शांति: स्फटिक की प्रकृति शीतल होती है। यह क्रोध को शांत करता है और मन को एकाग्र बनाता है।
मां लक्ष्मी की कृपा: इसे धारण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है।
ग्रह शांति: यह मुख्य रूप से शुक्र ग्रह (Venus) को मजबूत करता है और चंद्र दोष को शांत करता है।
स्वास्थ्य लाभ: बुखार, सिरदर्द और रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित करने में इसे सहायक माना जाता है।
एकाग्रता (Concentration): छात्रों के लिए यह माला याददाश्त और ध्यान लगाने की शक्ति बढ़ाती है।
जब आप किसी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से स्फटिक माला की प्राण-प्रतिष्ठा या शुद्धिकरण करवाते हैं, तो इसकी समय सीमा और प्रक्रिया इस प्रकार रहती है:
सिद्ध करने की अवधि (Time Duration): ब्राह्मण द्वारा स्फटिक माला को सिद्ध करने की प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है। इसके लिए किसी विशेष शुभ मुहूर्त जैसे पूर्णिमा, दीपावली, अक्षय तृतीया, या किसी भी मास का शुक्ल पक्ष का शुक्रवार चुना जाता है।
अनुष्ठान विधि (Ritual Method): पंडित जी माला को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराते हैं, तत्पश्चात वैदिक मंत्रों के साथ माला का अभिषेक किया जाता है।
प्राण-प्रतिष्ठा (Consecration): अंत में माला में देवी लक्ष्मी या इष्ट देव की ऊर्जा को संकल्प के माध्यम से स्थापित किया जाता है, जिससे वह माला उसी समय 'सिद्ध' होकर धारण करने योग्य बन जाती है।
सिद्ध स्फटिक माला (Siddh Sphatik Mala) हिंदू धर्म और ज्योतिष में अपनी शुद्धता और शीतलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है बल्कि भौतिक उन्नति में भी सहायक होती है।
स्फटिक एक पारदर्शी पत्थर है जिसे 'क्वार्ट्ज' (Quartz) कहा जाता है। यह बर्फ के समान सफेद और पारदर्शी होता है। इसे 'कांच' समझने की भूल अक्सर की जाती है, लेकिन असली स्फटिक प्राकृतिक पत्थर है जो पहाड़ों और खदानों से प्राप्त होता है। इसे 'सफ़ेद बिल्लौर' के नाम से भी जाना जाता है।
प्राकृतिक स्त्रोत: यह जमीन के भीतर से स्फटिक के पत्थरों के रूप में निकाला जाता है।
निर्माण प्रक्रिया: इन पत्थरों को काटकर गोल या डायमंड कट (पहलदार) मनकों का आकार दिया जाता है।
धागा: एक अच्छी स्फटिक माला में आमतौर पर 108+1 मनके होते हैं। इसे अक्सर सफेद सूती धागे या रेशमी धागे में पिरोया जाता है।
स्फटिक माला को धारण करने से पहले उसे शुद्ध और चैतन्य (सिद्ध) करना अनिवार्य है:
दिन: इसे सोमवार या शुक्रवार के दिन धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।
शुद्धिकरण: माला को पहले गंगाजल और फिर कच्चे दूध से धोएं। इसके बाद पुन: गंगाजल से साफ करें।
धूप-दीप: माला को अगरबत्ती या धूप दिखाएं और माता लक्ष्मी या भगवान शिव की मूर्ति के सामने रखें।
मंत्र जाप: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः (महालक्ष्मी मंत्र) का 108 बार जाप करें।
धारण: मंत्र जाप के बाद इसे गले में धारण करें।
मानसिक शांति: स्फटिक की प्रकृति शीतल होती है। यह क्रोध को शांत करता है और मन को एकाग्र बनाता है।
मां लक्ष्मी की कृपा: इसे धारण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता दूर होती है।
ग्रह शांति: यह मुख्य रूप से शुक्र ग्रह (Venus) को मजबूत करता है और चंद्र दोष को शांत करता है।
स्वास्थ्य लाभ: बुखार, सिरदर्द और रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित करने में इसे सहायक माना जाता है।
एकाग्रता (Concentration): छात्रों के लिए यह माला याददाश्त और ध्यान लगाने की शक्ति बढ़ाती है।
जब आप किसी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से स्फटिक माला की प्राण-प्रतिष्ठा या शुद्धिकरण करवाते हैं, तो इसकी समय सीमा और प्रक्रिया इस प्रकार रहती है:
सिद्ध करने की अवधि (Time Duration): ब्राह्मण द्वारा स्फटिक माला को सिद्ध करने की प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है। इसके लिए किसी विशेष शुभ मुहूर्त जैसे पूर्णिमा, दीपावली, अक्षय तृतीया, या किसी भी मास का शुक्ल पक्ष का शुक्रवार चुना जाता है।
अनुष्ठान विधि (Ritual Method): पंडित जी माला को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराते हैं, तत्पश्चात वैदिक मंत्रों के साथ माला का अभिषेक किया जाता है।
प्राण-प्रतिष्ठा (Consecration): अंत में माला में देवी लक्ष्मी या इष्ट देव की ऊर्जा को संकल्प के माध्यम से स्थापित किया जाता है, जिससे वह माला उसी समय 'सिद्ध' होकर धारण करने योग्य बन जाती है।
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