Siddh Kamal Gatta Mala Big Size | Lotus Seed Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation & Daily Puja कमलगट्टा की माला (Kamal Gatta Mala) को साक्षात् लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कमल का फूल माता लक्ष्मी का आसन है और इसके बीज (कमलगट्टा) उनकी सबसे प्रिय वस्तु हैं। 'बड़ी' कमलगट्टा माला विशेष रूप से तीव्र आर्थिक उन्नति और साधना के लिए प्रयोग की जाती है। 1. कमलगट्टा माला क्या है? | What is Kamal Gatta Mala? कमलगट्टा वास्तव में कमल के फूल के सूखे हुए बीज होते हैं। 'बड़ी' माला का अर्थ है जिसमें बीजों का आकार बड़ा, पुष्ट और काला हो। काले रंग के ये बीज देखने में थोड़े सख्त और पत्थर जैसे महसूस होते हैं। इसे 'लक्ष्मी माला' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उपयोग धन की देवी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। 2. यह कैसे बनी होती है? | How is it Made? प्राकृतिक बीज: यह किसी लकड़ी या कृत्रिम धातु से नहीं बनी होती, बल्कि तालाबों में उगने वाले कमल के पौधों से प्राप्त प्राकृतिक बीजों से बनती है। निर्माण प्रक्रिया: कमल के फूलों के सूखने के बाद उनके अंदर से काले बीज निकाले जाते हैं। इन बीजों को धूप में सुखाकर कठोर किया जाता है। बनावट: बड़ी माला में बड़े आकार के 108+1 बीज होते हैं। चूँकि ये बीज प्राकृतिक होते हैं, इसलिए इनका आकार थोड़ा ऊबड़-खाबड़ हो सकता है। इन्हें अक्सर काले या लाल सूती धागे में पिरोया जाता है। 3. धारण करने की विधि | Method of Wearing कमलगट्टा माला को धारण करने या इससे जाप करने की एक निश्चित विधि है: शुभ दिन: इसे शुक्रवार (Friday) या दीपावली, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों में धारण करना सबसे उत्तम है। शुद्धिकरण: माला को गंगाजल से धोएं। फिर इसे पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) का स्पर्श कराएं और पुनः गंगाजल से साफ करें। पूजन: माला पर इत्र (Perfume) लगाएं और इसे माता लक्ष्मी के चरणों में रखें। गुलाबी या लाल फूल अर्पित करें। मंत्र जाप: 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जाप करें। धारण: जाप के बाद इसे गले में धारण करें या अपनी तिजोरी/पूजा स्थान पर रखें। 4. इसके क्या-क्या लाभ हैं? | Benefits of Kamal Gatta Mala धन आगमन: इसे धारण करने या इससे मंत्र जाप करने से दरिद्रता दूर होती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं। कर्ज से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से कर्ज में डूबे हैं, तो यह माला उसे उतारने में सहायक मानी जाती है। व्यापार में उन्नति: व्यापारियों के लिए यह माला बहुत शुभ है; इसे कार्यस्थल पर रखने से व्यापार में वृद्धि होती है। शत्रु बाधा: यह शत्रुओं के प्रभाव को कम करती है और जीवन में स्थिरता लाती है। साधना: श्री विद्या और लक्ष्मी साधना में इस माला का प्रयोग शीघ्र फलदायी होता है। 5. ब्राह्मणों द्वारा यह कितने दिनों में सिद्ध होती है? | Days Required for Activation by Brahmins सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है। अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी विशेष मुहूर्त पर संकल्प लिया जाता है। इसके बाद 'कनकधारा स्तोत्र' या 'श्री सूक्त' के पाठ और विशेष आहुतियों (हवन) के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत सक्रिय (Energized) होकर अपना शुभ फल देना शुरू कर देती है। विशेष निर्देश:- हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गयी मंत्रविद्या,यंत्रविद्या,सिद्धसामग्री,एवं आयुर्वेदिक औषधि,और अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते। आप चैनल के विश्वास और चमत्कार को देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते है
Siddh Kamal Gatta Mala Big Size | Lotus Seed Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation & Daily Puja
कमलगट्टा की माला (Kamal Gatta Mala) को साक्षात् लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कमल का फूल माता लक्ष्मी का आसन है और इसके बीज (कमलगट्टा) उनकी सबसे प्रिय वस्तु हैं। 'बड़ी' कमलगट्टा माला विशेष रूप से तीव्र आर्थिक उन्नति और साधना के लिए प्रयोग की जाती है।
कमलगट्टा वास्तव में कमल के फूल के सूखे हुए बीज होते हैं। 'बड़ी' माला का अर्थ है जिसमें बीजों का आकार बड़ा, पुष्ट और काला हो। काले रंग के ये बीज देखने में थोड़े सख्त और पत्थर जैसे महसूस होते हैं। इसे 'लक्ष्मी माला' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उपयोग धन की देवी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
प्राकृतिक बीज: यह किसी लकड़ी या कृत्रिम धातु से नहीं बनी होती, बल्कि तालाबों में उगने वाले कमल के पौधों से प्राप्त प्राकृतिक बीजों से बनती है।
निर्माण प्रक्रिया: कमल के फूलों के सूखने के बाद उनके अंदर से काले बीज निकाले जाते हैं। इन बीजों को धूप में सुखाकर कठोर किया जाता है।
बनावट: बड़ी माला में बड़े आकार के 108+1 बीज होते हैं। चूँकि ये बीज प्राकृतिक होते हैं, इसलिए इनका आकार थोड़ा ऊबड़-खाबड़ हो सकता है। इन्हें अक्सर काले या लाल सूती धागे में पिरोया जाता है।
कमलगट्टा माला को धारण करने या इससे जाप करने की एक निश्चित विधि है:
शुभ दिन: इसे शुक्रवार (Friday) या दीपावली, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों में धारण करना सबसे उत्तम है।
शुद्धिकरण: माला को गंगाजल से धोएं। फिर इसे पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) का स्पर्श कराएं और पुनः गंगाजल से साफ करें।
पूजन: माला पर इत्र (Perfume) लगाएं और इसे माता लक्ष्मी के चरणों में रखें। गुलाबी या लाल फूल अर्पित करें।
मंत्र जाप: 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जाप करें।
धारण: जाप के बाद इसे गले में धारण करें या अपनी तिजोरी/पूजा स्थान पर रखें।
धन आगमन: इसे धारण करने या इससे मंत्र जाप करने से दरिद्रता दूर होती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं।
कर्ज से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से कर्ज में डूबे हैं, तो यह माला उसे उतारने में सहायक मानी जाती है।
व्यापार में उन्नति: व्यापारियों के लिए यह माला बहुत शुभ है; इसे कार्यस्थल पर रखने से व्यापार में वृद्धि होती है।
शत्रु बाधा: यह शत्रुओं के प्रभाव को कम करती है और जीवन में स्थिरता लाती है।
साधना: श्री विद्या और लक्ष्मी साधना में इस माला का प्रयोग शीघ्र फलदायी होता है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी विशेष मुहूर्त पर संकल्प लिया जाता है। इसके बाद 'कनकधारा स्तोत्र' या 'श्री सूक्त' के पाठ और विशेष आहुतियों (हवन) के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत सक्रिय (Energized) होकर अपना शुभ फल देना शुरू कर देती है।
विशेष निर्देश:- हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गयी मंत्रविद्या,यंत्रविद्या,सिद्धसामग्री,एवं आयुर्वेदिक औषधि,और अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते। आप चैनल के विश्वास और चमत्कार को देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते है
कमलगट्टा की माला (Kamal Gatta Mala) को साक्षात् लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कमल का फूल माता लक्ष्मी का आसन है और इसके बीज (कमलगट्टा) उनकी सबसे प्रिय वस्तु हैं। 'बड़ी' कमलगट्टा माला विशेष रूप से तीव्र आर्थिक उन्नति और साधना के लिए प्रयोग की जाती है।
कमलगट्टा वास्तव में कमल के फूल के सूखे हुए बीज होते हैं। 'बड़ी' माला का अर्थ है जिसमें बीजों का आकार बड़ा, पुष्ट और काला हो। काले रंग के ये बीज देखने में थोड़े सख्त और पत्थर जैसे महसूस होते हैं। इसे 'लक्ष्मी माला' के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसका मुख्य उपयोग धन की देवी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
प्राकृतिक बीज: यह किसी लकड़ी या कृत्रिम धातु से नहीं बनी होती, बल्कि तालाबों में उगने वाले कमल के पौधों से प्राप्त प्राकृतिक बीजों से बनती है।
निर्माण प्रक्रिया: कमल के फूलों के सूखने के बाद उनके अंदर से काले बीज निकाले जाते हैं। इन बीजों को धूप में सुखाकर कठोर किया जाता है।
बनावट: बड़ी माला में बड़े आकार के 108+1 बीज होते हैं। चूँकि ये बीज प्राकृतिक होते हैं, इसलिए इनका आकार थोड़ा ऊबड़-खाबड़ हो सकता है। इन्हें अक्सर काले या लाल सूती धागे में पिरोया जाता है।
कमलगट्टा माला को धारण करने या इससे जाप करने की एक निश्चित विधि है:
शुभ दिन: इसे शुक्रवार (Friday) या दीपावली, अक्षय तृतीया, पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों में धारण करना सबसे उत्तम है।
शुद्धिकरण: माला को गंगाजल से धोएं। फिर इसे पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) का स्पर्श कराएं और पुनः गंगाजल से साफ करें।
पूजन: माला पर इत्र (Perfume) लगाएं और इसे माता लक्ष्मी के चरणों में रखें। गुलाबी या लाल फूल अर्पित करें।
मंत्र जाप: 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जाप करें।
धारण: जाप के बाद इसे गले में धारण करें या अपनी तिजोरी/पूजा स्थान पर रखें।
धन आगमन: इसे धारण करने या इससे मंत्र जाप करने से दरिद्रता दूर होती है और धन के नए स्रोत खुलते हैं।
कर्ज से मुक्ति: यदि आप लंबे समय से कर्ज में डूबे हैं, तो यह माला उसे उतारने में सहायक मानी जाती है।
व्यापार में उन्नति: व्यापारियों के लिए यह माला बहुत शुभ है; इसे कार्यस्थल पर रखने से व्यापार में वृद्धि होती है।
शत्रु बाधा: यह शत्रुओं के प्रभाव को कम करती है और जीवन में स्थिरता लाती है।
साधना: श्री विद्या और लक्ष्मी साधना में इस माला का प्रयोग शीघ्र फलदायी होता है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी विशेष मुहूर्त पर संकल्प लिया जाता है। इसके बाद 'कनकधारा स्तोत्र' या 'श्री सूक्त' के पाठ और विशेष आहुतियों (हवन) के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत सक्रिय (Energized) होकर अपना शुभ फल देना शुरू कर देती है।
विशेष निर्देश:- हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गयी मंत्रविद्या,यंत्रविद्या,सिद्धसामग्री,एवं आयुर्वेदिक औषधि,और अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते। आप चैनल के विश्वास और चमत्कार को देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते है।
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