श्रीमद्देवी भागवत महापुराण (जिसे देवी महापुराण भी कहा जाता है) शक्ति उपासना का सर्वोच्च ग्रंथ है। यह न केवल भक्ति प्रदान करता है, बल्कि मनुष्य को शक्ति, साहस और विजय का मार्ग भी दिखाता है।
उद्गम: इस पुराण का प्राकट्य पराशक्ति की आदि प्रेरणा से हुआ है। वेदों के 'देवी सूक्त' और 'रात्रि सूक्त' को इसका आधार माना जाता है।
प्रथम वक्ता: पौराणिक मान्यता के अनुसार, सर्वप्रथम भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को इसका उपदेश दिया।
महर्षि वेदव्यास: इसके बाद महर्षि वेदव्यास ने इसे 18,000 श्लोकों और 12 स्कंधों में लिपिबद्ध किया।
सर्वप्रथम श्रवण: व्यास जी ने यह कथा अपने शिष्य सूत जी को सुनाई, और सूत जी ने नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादि ऋषियों को इसका पूर्ण परिचय दिया।
देवी भागवत कथा मुख्य रूप से 9 दिनों (नवाह्न परायण) में संपन्न होती है, जो विशेषकर नवरात्रि (चैत्र या शारदीय) के समय अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
संगीतमय देवी भागवत में माँ की स्तुति और भजनों का विशेष महत्व है:
मुख्य आचार्य (व्यास): 1 (कथा वाचक)।
पूजन पुरोहित: 1 (कलश स्थापना, अखंड दीप और नवग्रह पूजन हेतु)।
पारायण ब्राह्मण: 1 (संस्कृत श्लोकों के निरंतर पाठ के लिए)।
संगीत मंडली (4 कलाकार): मुख्य गायक, तबला/ढोलक वादक, हारमोनियम वादक, और मंजीरा/पैड वादक।
कुल योग: एक भव्य आयोजन के लिए 7 सदस्यों की टीम आदर्श होती है।
श्रीमद्देवी भागवत का मूल आधार "नवाण मंत्र" है:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" इसके साथ ही 'श्रीं' (लक्ष्मी बीज) और 'ह्रीं' (माया बीज) का इस पुराण में विशेष महत्व बताया गया है।
देवी पुराण में 'नवदुर्गा' के नौ स्वरूपों को प्रकृति और चेतना के नौ सोपान माना गया है:
शैलपुत्री: संकल्प शक्ति का प्रतीक।
ब्रह्मचारिणी: तप और ज्ञान।
चंद्रघंटा: एकाग्रता और शांति।
कुष्मांड: सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा।
स्कंदमाता: ममता और वात्सल्य।
कात्यायनी: बुराई का विनाश।
कालरात्रि: निडरता और अंधकार का नाश।
महागौरी: शुद्धि और पवित्रता।
सिद्धिदात्री: पूर्णता और सफलता।
श्रीमद्देवी भागवत विश्व का वह महान ग्रंथ है जो स्त्री शक्ति (Female Principle) को ब्रह्मांड का सर्वोच्च तत्व मानता है।
नारी शक्ति का संदेश: यह पुराण सिखाता है कि सृष्टि के सृजन, पालन और संहार में नारी (शक्ति) के बिना शिव भी 'शव' समान हैं।
सामाजिक दृष्टि: वर्तमान समय में नारी सुरक्षा और सम्मान के लिए यह कथा युवाओं को शिक्षित करती है कि स्त्री केवल भोग की वस्तु नहीं, बल्कि साक्षात 'शक्ति' का रूप है। जहाँ नारी की पूजा होती है, वहीं देवता निवास करते हैं।
पंचम वेद: इसे शाक्त संप्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
वेदों का सार: गायत्री मंत्र की विस्तृत व्याख्या इस पुराण में मिलती है, इसलिए इसे 'गायत्री महाविज्ञान' भी कहा जाता है।
अचूक फल: श्रीमद्भागवत (कृष्ण कथा) भक्ति देती है, जबकि देवी भागवत भक्ति के साथ-साथ 'शक्ति' और 'मुक्ति' दोनों प्रदान करती है।
देवी महापुराण का आयोजन एक जटिल और पवित्र प्रक्रिया है। 'कैवल्य एस्ट्रो' ऐप इसे सरल बनाता है:
डाउनलोड: अपने फोन में Kaivalya Astro ऐप खोलें।
अनुष्ठान चयन 'dharmik aayojan' विकल्प में जाकर 'Shrimad Devi Bhagwat' का चयन करें।
अनुकूलन (Customization): आप वहां चुन सकते हैं कि आपको 9 दिवसीय नवाह्न पाठ चाहिए या संगीतमय कथा।
विद्वान ब्राह्मण: ऐप के माध्यम से आप उन आचार्यों का चयन कर सकते हैं जो 'श्री विद्या' या 'शक्ति उपासना' में दीक्षित हों।
सामग्री व व्यवस्था: बुकिंग के बाद ऐप की टीम आपको पूजन सामग्री, कलश स्थापना और संगीत मंडली की पूरी सूची और व्यवस्था प्रदान करती है।
सहायता: किसी भी भ्रम की स्थिति में आप 'Talk to Astrologer' के माध्यम से सही मुहूर्त पूछ सकते हैं।
ध्यातव्य विषय - कथा की सेवा राशि 1,35,001 है जिसमे संगीत मंडली सहित कथा वाचक और आचार्य सम्मिलित रहेंगे।
Important point - The service amount for the Katha is Rs 1,35,001, which will include the Katha narrator and Acharya along with the music group.
कथा के सामग्री और आने जाने का व्यय अलग से देय होगा
The expenses for the material and travel for the Katha will be payable separately.
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