आरती अनुष्ठान सेवा शुल्क 15000 है जिसमे 2 आरती सेट उपलब्ध रहेंगे
आरती में आने जाने के मार्ग व्यय व रहने की व्यवस्था यजमान की रहेगी
The Aarti ritual service fee is 15,000 rupees, which will include two Aarti sets.
The host will cover travel expenses and accommodation for the Aarti.
भगवान शिव और माँ गंगा का संबंध अटूट है। शिव की जटाओं में गंगा का वास उनके सौम्य और कल्याणकारी रूप को दर्शाता है। जहाँ भगवती की आरती शक्ति की उपासना है, वहीं भगवान शिव की गंगा आरती वैराग्य, शांति और मोक्ष की साधना है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब माँ गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ, तो उनके वेग को संभालने की शक्ति केवल महादेव में थी। शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया।
धार्मिक महत्व: शिव की गंगा आरती का अर्थ है उस 'परम तत्व' की वंदना करना जिसने जगत की रक्षा के लिए गंगा को धारण किया। यह आरती शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है।
सांस्कृतिक महत्व: यह भारत की 'शैव परंपरा' का अटूट हिस्सा है। वाराणसी (काशी) जैसे शहरों में, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा माना जाता है, यह आरती एक सांस्कृतिक उत्सव बन चुकी है जो मानवता को प्रकृति (जल) और ईश्वर (शिव) से जोड़ती है।
महाशिवरात्रि शिव पूजन का सबसे बड़ा दिन है, लेकिन शिव की गंगा आरती निम्नलिखित समय पर भी अत्यंत फलदायी होती है:
सावन का महीना (श्रावण): पूरे सावन मास में शिव-गंगा आरती का विशेष विधान है।
प्रत्येक सोमवार: सोमवार महादेव का दिन है, इस दिन आरती करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
प्रदोष व्रत: हर महीने की त्रयोदशी (प्रदोष काल) में शिव की गंगा आरती का फल अश्वमेध यज्ञ के समान माना गया है।
कार्तिक पूर्णिमा: इस दिन महादेव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, जिसे 'देव दीपावली' के रूप में मनाया जाता है।
वर्तमान में तकनीक और पर्यटन के कारण इसका प्रचलन वैश्विक (Global) हो गया है। अब केवल साधु-संत ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और विदेशी पर्यटक भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
पंचोपचार आरती: पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के प्रतीक दीपों से की जाने वाली आरती।
षोडशोपचार आरती: 16 विशेष सामग्रियों और मंत्रों के साथ विस्तृत अनुष्ठान।
लघु आरती: जो भक्त अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा से गंगा तट पर कपूर या छोटे दीपक से करते हैं।
शिव की गंगा आरती में सम्मिलित होने या इसे करने के आध्यात्मिक लाभ असीमित हैं:
मानसिक शांति और वैराग्य: शिव 'शून्य' और 'अंतिम सत्य' के प्रतीक हैं। आरती के दौरान डमरू और शंख की ध्वनि मन से भय और तनाव को दूर करती है।
अकाल मृत्यु से रक्षा: शिव मृत्युंजय हैं। गंगा तट पर उनकी आरती का दर्शन लंबी आयु और आरोग्य प्रदान करता है।
पाप शमन: माना जाता है कि शिव की उपस्थिति में गंगा स्पर्श और आरती दर्शन से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं।
मनोकामना पूर्ति: विशेषकर विवाह बाधा दूर करने और संतान प्राप्ति के लिए इस आरती का संकल्प लिया जाता है।
यदि आप वाराणसी या ऋषिकेश नहीं जा सकते, तो कैवल्य एस्ट्रो ऐप आपको महादेव की इस दिव्य सेवा से घर बैठे जोड़ता है:
| सेवा | लाभ |
| वर्चुअल उपस्थिति | ऐप के माध्यम से आप सीधे शिव-गंगा आरती के लाइव प्रसारण में भाग ले सकते हैं। |
| नाम-गोत्र संकल्प | आप ऐप पर अपना विवरण देकर पंडितों के माध्यम से अपने नाम की 'विशेष शिव संकल्प आरती' करवा सकते हैं। |
| रुद्राभिषेक के साथ आरती | ऐप के जरिए आप आरती के पूर्व ऑनलाइन रुद्राभिषेक का बुकिंग भी कर सकते हैं। |
| विशेष परामर्श | कैवल्य के ज्योतिषी आपको बता सकते हैं कि आपकी कुंडली के 'चंद्र दोष' या 'कालसर्प दोष' को दूर करने के लिए शिव की आरती कैसे सहायक होगी। |
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