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रविवार व्रत उद्यापन
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अनुष्ठान सेवा शुल्क 7100 है इसमें 1 मुख्य आचार्य और 2 सहयोगी ब्राह्मण रहेंगे जो जप आदि करेंगे

 The ritual service fee is Rs 7100. This includes one chief acharya and two assistant Brahmins who will perform the chanting etc.

यदि आप इसे घर पर करवाते है तो मार्ग में आने जाने का व्यय अलग से देय होगा और पूजन सामग्री स्वयं से लानी होगी

If you get it done at home, then the travel expenses will be payable separately and you will have to bring the puja materials yourself. 


व्रत का उद्यापन करना उस संकल्प को पूर्णता देने की एक विधि है जो आपने व्रत शुरू करते समय लिया था। 

व्रत उद्यापन: अर्थ, लाभ और विधि | Vrat Udyapan: Meaning, Benefits, and Procedure

1. व्रत उद्यापन क्या है और क्यों किया जाता है?

उद्यापन का शाब्दिक अर्थ है "समापन" या "पूर्णता"। जब हम किसी विशेष कामना के लिए निश्चित संख्या में व्रत  रखने का संकल्प लेते हैं, तो उन व्रतों की पूर्णाहुति के लिए उद्यापन किया जाता है। बिना उद्यापन के व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

2. रविवार व्रत उद्यापन के लाभ

  • आरोग्य: चर्म रोगों और नेत्र विकारों से मुक्ति मिलती है।

  • सफलता: समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है।

  • ऊर्जा: आत्मविश्वास और मानसिक शांति में वृद्धि होती है।


3. कब करना चाहिए रविवार व्रत का उद्यापन?

रविवार व्रत का उद्यापन किसी भी शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) के रविवार को करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। विशेषकर जब सूर्य अपनी उच्च राशि में हों या 'हस्त नक्षत्र' हो, तो यह और भी फलदायी होता है। आमतौर पर लोग 12 रविवार व्रत करने के बाद उद्यापन करते हैं।

4. कितने ब्राह्मणों की आवश्यकता होती है?

शास्त्रों के अनुसार, सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। यदि संभव न हो, तो कम से कम एक विद्वान ब्राह्मण ससम्मान भोजन और दान देना अनिवार्य है।


5. पूजा विधि और हवन (Step-by-Step Procedure)

आवश्यक सामग्री: सूर्य यंत्र, तांबे का कलश, लाल फूल, लाल चंदन, गुड़, गेहूं, लाल वस्त्र, घी, हवन सामग्री और आम की लकड़ियाँ।

विस्तृत पूजा विधि:

  1. संकल्प: सुबह स्नान के बाद हाथ में जल लेकर सूर्य देव का ध्यान करें और व्रत पूर्ण करने का संकल्प लें।

  2. मंडप पूजन: आंगन या पूजा घर में सुंदर मंडप बनाएँ। तांबे के कलश पर सूर्य देव की स्वर्ण या तांबे की प्रतिमा स्थापित करें।

  3. यंत्र स्थापना: प्रतिमा के पास 'सूर्य यंत्र' रखें।

  4. हवन: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' या 'गायत्री मंत्र' के साथ हवन कुंड में घी, गुड़ और तिल की आहुतियां दें।

  5. आरती: हवन के बाद सूर्य देव की कपूर से आरती करें।


6. दान सामग्री और देवता

इसमें मुख्य रूप से भगवान सूर्य (Surya Dev) के नाम से हवन और दान किया जाता है।

  • दान सामग्री: तांबे का पात्र, लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, लाल चंदन, स्वर्ण (यदि संभव हो), और दक्षिणा।

  • ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद उन्हें ये वस्तुएं ससम्मान भेंट करें।


7. कैवल्य एस्ट्रो (Kaivalya Astro) के साथ ऑनलाइन पूजा

यदि आप व्यस्त हैं या सही विधि-विधान से पूजा कराना चाहते हैं, तो Kaivalya Astro App आपकी पूरी मदद कर सकता है:

  • विद्वान पंडित: ऐप के माध्यम से आप अनुभवी और कर्मकांडी ब्राह्मणों से जुड़ सकते हैं।

  • लाइव दर्शन: आप अपने घर बैठे वीडियो कॉल के जरिए लाइव उद्यापन पूजा और हवन देख सकते हैं।

  • संकल्प सेवा: पंडित जी आपके नाम और गोत्र से ऑनलाइन संकल्प लेंगे।

  • सामग्री प्रबंधन: ऐप के जरिए पूजा की पूरी सामग्री की व्यवस्था भी की जाती है।

  • सुविधा: आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है, पूरी शुद्धता के साथ विधि संपन्न कराई जाती है।


विशेष टिप: उद्यापन के दिन स्वयं भी बिना नमक का भोजन करें और लाल वस्त्र धारण करें।

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