वाराणसी (काशी) स्थित माँ अन्नपूर्णा मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह आस्था और पोषण का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहाँ माँ अन्नपूर्णा का वर्णन और उनकी महिमा दी गई है:
वाराणसी में विश्वनाथ मंदिर के निकट स्थित माँ अन्नपूर्णा का मंदिर अत्यंत प्राचीन और पवित्र है। माँ अन्नपूर्णा को साक्षात 'अन्न की देवी' माना जाता है। मान्यता है कि काशी में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता, क्योंकि माँ अन्नपूर्णा स्वयं यहाँ के निवासियों और भक्तों का भरण-पोषण करती हैं।
पौराणिक कथा: एक बार जब पृथ्वी पर अन्न का अभाव हो गया, तो भगवान शिव ने माँ पार्वती से भिक्षा मांगी। माँ पार्वती ने अन्नपूर्णा का रूप धारण किया और भगवान शिव को भोजन कराया, जिससे संसार की भूख शांत हुई।
काशी की अधिष्ठात्री: वाराणसी में भगवान शिव को 'विश्वनाथ' (विश्व का स्वामी) कहा जाता है, लेकिन काशी का अन्न-प्रबंध माँ अन्नपूर्णा ही संभालती हैं। इसलिए कहा जाता है कि शिवजी भी माँ अन्नपूर्णा के द्वार पर भिक्षुक बनकर जाते हैं।
स्वर्ण प्रतिमा: मंदिर में देवी की दो मूर्तियां हैं—एक स्वर्ण की और दूसरी धातु की। स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन वर्ष में केवल एक बार 'अन्नकूट' उत्सव के दौरान (दीपावली के अगले दिन) होते हैं।
अन्नदान का महत्व: इस मंदिर में दर्शन करने के बाद भक्त अक्सर अन्नदान का संकल्प लेते हैं, क्योंकि यहाँ माँ को साक्षात अन्न देने वाली शक्ति माना गया है।
माँ अन्नपूर्णा की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्हें 'जगत माता' कहा जाता है जो न केवल पेट भरती हैं, बल्कि भक्तों के मन को 'ज्ञान' और 'वैराग्य' का भोजन भी प्रदान करती हैं।
"ॐ ह्रीं ह्रीं अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥"
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