Shiv Parivar Argha | Brass Pooja Argha for Home Mandir & Festivals | Traditional Spiritual Offering Plate for Shiva Puja | Decorative Brass Pooja Samagri
'शिव परिवार अर्घा' (Shiv Parivar Argha) भगवान शिव की उपासना में प्रयुक्त होने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक प्रतीक है। यह केवल एक पात्र नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड और शक्ति का स्वरूप माना जाता है।
शिव परिवार अर्घा वह आधार या पात्र होता है जिस पर शिवलिंग को स्थापित किया जाता है। इसे 'जलाधारी' भी कहते हैं। 'अर्घा' माता पार्वती (शक्ति) का प्रतीक है, और जब इस पर शिवलिंग (शिव) विराजमान होता है, तो यह शिव-शक्ति के मिलन और सृष्टि के सृजन का प्रतिनिधित्व करता है। 'शिव परिवार' अर्घा में अक्सर अर्घा के चारों ओर या उसके स्टैंड पर गणेश, कार्तिकेय और नंदी की छोटी आकृतियाँ बनी होती हैं, जो पूरे शिव परिवार की उपस्थिति को दर्शाती हैं।
यह मुख्य रूप से पीतल (Brass) या तांबे (Copper) जैसी पवित्र धातुओं से बना होता है।
निर्माण प्रक्रिया:
ढलाई (Casting): धातु को पिघलाकर एक विशेष सांचे में ढाला जाता है जिसमें जल निकासी के लिए एक 'नाली' (Yoni base) बनी होती है।
शिल्पकारी: शिव परिवार अर्घा में कारीगर बहुत सूक्ष्मता से नंदी, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाओं को अर्घा के आधार पर उकेरते या जोड़ते हैं।
जल मार्ग (Outflow): इसमें एक तरफ से निकला हुआ मार्ग होता है जिसे 'अभिषेक मार्ग' कहते हैं, जहाँ से शिवलिंग पर अर्पित किया गया जल या दूध बाहर गिरता है।
पॉलिशिंग: अंत में इसे घिसाई करके चिकना और चमकदार बनाया जाता है ताकि अभिषेक के समय तरल पदार्थ आसानी से प्रवाहित हो सकें।
इसका निर्माण शुद्ध पीतल (Pure Brass) या तांबे (Copper) की सिल्लियों से होता है। पीतल को इसकी मजबूती और तांबे को इसकी आध्यात्मिक शुद्धि के गुणों के कारण चुना जाता है। कुछ विशेष अर्घा पंचधातु (पांच धातुओं के मिश्रण) से भी बनाए जाते हैं।
संपूर्ण शिव कृपा: शिव परिवार अर्घा का उपयोग करने से न केवल भगवान शिव, बल्कि माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय का आशीर्वाद भी एक साथ प्राप्त होता है।
अभिषेक में सुगमता: यह शिवलिंग को स्थिरता प्रदान करता है और अभिषेक के जल को एक निश्चित दिशा में प्रवाहित करने में मदद करता है, जिससे पूजा स्थान साफ-सुथरा रहता है।
वास्तु दोष निवारण: घर के मंदिर में पीतल का शिव परिवार अर्घा रखने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और पारिवारिक कलह दूर होती है।
स्वास्थ्य लाभ: यदि यह तांबे का बना हो, तो इसके स्पर्श से प्रवाहित जल में औषधीय गुण आ जाते हैं, जिसका चरणामृत के रूप में सेवन स्वास्थ्यप्रद माना जाता है।
स्थायित्व: पत्थर के अर्घा के विपरीत, धातु का अर्घा अटूट होता है और पीढ़ियों तक पूजा में उपयोग किया जा सकता है।
अभिषेक के बाद अर्घा को हमेशा साफ पानी से धोकर सूखे कपड़े से पोंछना चाहिए। पीतल के अर्घा को चमकाने के लिए पीतांबरी या नींबू-नमक का प्रयोग करें। ध्यान रखें कि अर्घा की 'नाली' (निकास द्वार) हमेशा उत्तर दिशा की ओर रखी जानी चाहिए।
विशेष निर्देश:- हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गयी मंत्रविद्या,यंत्रविद्या,सिद्धसामग्री,एवं आयुर्वेदिक औषधि,और अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते। आप चैनल के विश्वास और चमत्कार को देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते है।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products