तंत्र शास्त्र और प्राचीन मान्यताओं में 'चांडाल दाना' को एक अत्यंत प्रभावशाली और तीव्र औषधि के रूप में जाना जाता है। इसका मुख्य उपयोग उन स्थितियों में किया जाता है जब किसी व्यक्ति पर प्रेत आत्मा या नकारात्मक शक्ति का वास होता है, और वह पीड़ित व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति या सत्य को छिपाने का प्रयास करता है।
जब कोई प्रेत से प्रभावित व्यक्ति अपनी सच्चाई नहीं बताता या प्रेत आत्मा के प्रभाव में आकर बातें घुमाता है, तब चांडाल दाने का प्रयोग निम्नलिखित विधि से किया जाता है:
गोहरी (उपला) का प्रज्वलन: सबसे पहले शुद्ध गाय के गोबर से बनी एक गोहरी को अच्छी तरह जलाकर उसे धधकते हुए अंगारों में परिवर्तित किया जाता है।
दाने का प्रयोग: जब गोहरी पूर्णतः लाल हो जाए और उससे अग्नि की आंच उठने लगे, तब उस पर निश्चित मात्रा में 'चांडाल दाना' डाला जाता है।
धुंआ और प्रभाव: चांडाल दाना जलते ही एक विशिष्ट प्रकार का तीक्ष्ण और तीव्र धुंआ उत्पन्न करता है। इस धुएं को सावधानीपूर्वक उस पीड़ित व्यक्ति की नासिका (नाक) के समीप लाया जाता है।
सत्य का उद्घाट्न: जैसे ही यह धुंआ व्यक्ति के भीतर जाता है, वह प्रेत आत्मा अत्यधिक उग्र (क्रोधित) हो उठती है। इस उग्रता के प्रभाव में प्रेत का नियंत्रण कमजोर पड़ जाता है और वह व्यक्ति के माध्यम से ही चिल्लाते हुए अपनी सच्चाई, अपना नाम और आने का कारण सबके सामने स्वीकार करने लगता है।
यह प्रक्रिया अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है, इसलिए इसे केवल किसी अनुभवी विशेषज्ञ या जानकार व्यक्ति की उपस्थिति में ही करना चाहिए।
धुंआ देते समय व्यक्ति की शारीरिक स्थिति का ध्यान रखें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products