यह पारंपरिक बंगाली तंत्र का एक विशिष्ट प्रयोग है। यदि किसी व्यक्ति पर तांत्रिक अभिचार, नकारात्मक ऊर्जा, टोना-टोटका या किसी अन्य शारीरिक व मानसिक व्याधि के कारण शारीरिक क्षमता (मर्दाना शक्ति) का ह्रास हुआ हो, तो यह प्रयोग अत्यंत अचूक और प्रभावशाली माना जाता है।
(निर्देश: इस मंत्र का जप/पाठ पूर्ण शुद्धता के साथ ठीक 7 बार किया जाना अनिवार्य है।)
साधक को इस प्रयोग के लिए पूर्णतः स्वच्छ, दाग-रहित और ताजे 10 से 12 देसी नींबू (Desi Lemons) की व्यवस्था करनी चाहिए।
एक पवित्र धातु या कांच के स्वच्छ पात्र में उन सभी नींबूओं का शुद्ध रस निकाल लें। रस निकालते समय पूर्ण पवित्रता और स्वच्छता का ध्यान रखें।
पात्र को सम्मुख रखकर, एकाग्रचित्त होकर मूल मंत्र का पूरी शुद्धता के साथ 7 बार स्पष्ट और सस्वर उच्चारण करें। प्रत्येक बार मंत्र पूरा होने पर उस रस पर फूंक मारें (इस प्रकार रस पूर्णतः अभिमंत्रित हो जाएगा)।
इस अभिमंत्रित नींबू के रस का सेवन पीड़ित व्यक्ति को रात्रि के समय, भोजन के उपरांत और सोने से ठीक पहले करना चाहिए।
इस अनुष्ठानिक प्रयोग को नियमित रूप से लगातार 7 से 21 दिनों तक बिना किसी अवरोध के दोहराया जाना चाहिए। इस अवधि के भीतर शारीरिक बाधाएं दूर होकर ओज और क्षमता में वृद्धि होती है।
Accuracy in Pronunciation (उच्चारण की शुद्धता): मंत्र के अक्षरों और ध्वनि में किसी भी प्रकार का फेरबदल या त्रुटि नहीं होनी चाहिए। तंत्र मार्ग में शुद्ध उच्चारण ही सफलता की कुंजी है।
Sattvic Lifestyle (सात्विक जीवन): इस पूरी अवधि (7 से 21 दिन) के दौरान साधक और पीड़ित दोनों को पूर्ण रूप से सात्विक दिनचर्या, सदाचार और संयम का पालन करना अनिवार्य है।
पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ किया गया यह प्रयोग शरीर की समस्त अदृश्य रुकावटों, तांत्रिक दोषों और शारीरिक कमजोरियों को दूर कर प्राकृतिक ऊर्जा को पुनः स्थापित करने में सहायक होता है।
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