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तांत्रिक एवं आयुर्वेदिक वृक्ष आमंत्रण विधि
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दुर्लभ तांत्रिक एवं आयुर्वेदिक 'वृक्ष आमंत्रण' विधि: वनस्पति की शक्ति को जगाने का रहस्य

क्या आप जानते हैं कि जड़ी-बूटियाँ केवल पेड़ का हिस्सा नहीं, बल्कि स्वयं में एक चैतन्य ऊर्जा हैं?

प्राचीन भारतीय ज्ञान और आयुर्वेद में किसी भी वनस्पति या औषधि को जड़ सहित लेने से पहले 'वृक्ष आमंत्रण' की एक विशेष विधि का उल्लेख है। यह प्रक्रिया केवल वनस्पति को उखाड़ना नहीं, बल्कि प्रकृति से अनुमति लेकर उसकी 'सुप्त औषधीय ऊर्जा' को जाग्रत करना है।

यदि आप भी अपनी साधना या उपचार के लिए जड़ी-बूटियों का प्रयोग करते हैं, तो यह प्राचीन एवं अचूक विधि आपके द्वारा उपयोग की गई औषधि के प्रभाव को कई गुना बढ़ा सकती है।

वृक्ष आमंत्रण का संकल्प

"हे भगवान जगन्नाथ! हे सौरि वृक्ष (सूर्य देव के समान दिव्य और तेजस्वी वृक्ष)! मैं आपकी शरण में हूँ। आप मुझ पर कृपालु होकर मुझे इच्छित वरदान प्रदान करें। भगवान श्री जगन्नाथ जी के चरणों में मेरा बारंबार नमस्कार है।"

साधना की चरणबद्ध विधि (Step-by-Step)

चरण १: शुद्धि और मानसिक तैयारी

ब्रह्ममुहूर्त या शुभ नक्षत्र में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शुद्ध भाव रखें कि आप यह कार्य जन-कल्याण या सात्विक उद्देश्य के लिए कर रहे हैं।

चरण २: प्रार्थना और आह्वान

वृक्ष के सम्मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। अपने दोनों हाथ जोड़कर भगवान जगन्नाथ और वृक्ष देवता का ध्यान करें और ऊपर दिए गए मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।

चरण ३: वनस्पति को जाग्रत करना ('टोका देना')

मंत्र का जाप करते हुए अपने दाहिने हाथ की उंगलियों से वृक्ष की जड़ या तने पर हल्के से 3 बार थपथपाएं। यह 'टोका' देना वृक्ष की सोई हुई ऊर्जा को जागृत करने की प्रक्रिया है।

चरण ४: 'एक श्वास' में जड़ी प्राप्ति (कुंभक क्रिया)

यह इस साधना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है:

  • मंत्र और टोका देने के तुरंत बाद, अपनी सांस को अंदर खींचकर रोक लें (कुंभक)।

  • जब तक आप जड़ न निकाल लें, अपनी सांस को नहीं छोड़ना है।

  • इसी अवस्था में एक ही बार में जड़ को सावधानीपूर्वक प्राप्त कर लें।

(ध्यान रखें: पेड़ को अनावश्यक नुकसान न पहुँचाएं और कार्य पूर्ण होने पर वृक्ष देवता को मन ही मन धन्यवाद अवश्य दें।)

इस विधि का महत्व

  • ऊर्जा का संरक्षण: इस विधि से प्राप्त जड़ी-बूटी अपनी पूर्ण क्षमता (Potency) के साथ कार्य करती है।

  • अध्यात्मिक सामर्थ्य: यह प्रक्रिया वनस्पति के औषधीय गुणों के साथ-साथ उसके सूक्ष्म आध्यात्मिक प्रभावों को भी सुरक्षित रखती है।

  • गुप्त प्रभाव: यदि यह पूरी क्रिया गोपनीयता (एकांत) में की जाए, तो इसके परिणाम अत्यंत तीव्र और अचूक होते हैं।

विशेष नोट: जड़ी-बूटियाँ प्रकृति का अमूल्य उपहार हैं। इनका उपयोग सदैव मर्यादित और सात्विक उद्देश्यों के लिए ही करें।

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