हाजरात विद्या क्या है? भारतीय तंत्र शास्त्र में 'हाजरात' एक ऐसी अत्यंत प्रभावी विद्या है, जिसके माध्यम से अदृश्य शक्तियों, भूत-भविष्य की स्थितियों और गुप्त समस्याओं को एक माध्यम (जैसे कांसी की थाली) पर प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। यह विद्या किसी भी व्यक्ति की शारीरिक व्याधियों, ऊपरी बाधाओं या जीवन में आने वाली घटनाओं का सटीक पूर्वावलोकन करने में सक्षम है।
त्रि-कालदर्शी: यह विद्या आपको वर्तमान, भूत और भविष्य के स्पष्ट दर्शन कराने में सहायक है।
सटीक निदान: तंत्र प्रयोग, ऊपरी हवा या शारीरिक रोगों की जड़ तक पहुँचने का एक अचूक माध्यम।
स्वयंसिद्ध प्रयोग: यह एक स्वयंसिद्ध तांत्रिक प्रक्रिया है, जिसे पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करने पर तुरंत परिणाम प्राप्त होते हैं। इसमें किसी कठिन पुरश्चरण की आवश्यकता नहीं होती।
समान अधिकार: कोई भी आयु वर्ग का व्यक्ति, स्त्री या पुरुष, इसे पूरे विधि-विधान से कर सकता है।
राशि बंधन मुक्त: इस विद्या में राशि का कोई बंधन नहीं है; यहाँ केवल आपकी 'एकाग्रता' (Focus) ही सफलता की कुंजी है।
विशेष सावधानी: महिलाएं अपने मासिक धर्म (Periods) के दौरान इस प्रयोग को न करें और न ही उस स्थान पर मौजूद रहें।
समय का चयन: यह प्रयोग केवल शनिवार या मंगलवार को ही संपन्न किया जाना चाहिए।
सामग्री: शुद्ध सरसों का तेल और एक साफ कांसी (Bell Metal) की थाली।
अभिमंत्रण: सरसों के तेल को सामने रखकर सिद्ध बंगाली मंत्र का 37 बार पाठ करें और हर बार मंत्र के अंत में तेल पर हल्की फूँक मारें।
लेपन: अभिमंत्रित तेल को थाली पर समान रूप से लगाएं। रोगी की आंखों के चारों ओर चश्मे के आकार में इस तेल का लेपन करें।
त्राटक: थाली को सामने रखकर बिना पलक झपकाए एकटक (त्राटक) देखें। निरंतर एकाग्रता से थाली की सतह पर धुंधली आकृतियां या स्पष्ट दृश्य उभरने लगेंगे, जो आपकी समस्याओं का समाधान प्रदान करेंगे।
सावधानी: इस विद्या का उपयोग सदैव सकारात्मक कार्यों और जन-कल्याण के लिए करें। किसी भी तंत्र प्रयोग को करते समय गुरु निर्देश या पूर्ण सावधानी अनिवार्य है।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products