छिपे हुए सत्य, गुप्त रहस्यों और अज्ञात प्रश्नों के सटीक उत्तर जानने हेतु प्राचीन शाबर प्रयोग
भारतीय लोक-साहित्य और प्राचीन शाबर तंत्र परंपरा में 'सुपा (सूप) चालन विद्या' एक अत्यंत दुर्लभ, परीक्षित और प्रामाणिक विधा मानी जाती है। इसमें पवनपुत्र श्री हनुमान जी महाराज की दुहाई और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रभाव से सूप स्वतंत्र रूप से गति करके पूछे गए प्रश्नों के सटीक संकेत, छिपे हुए सत्य और दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
"सूप उड़ावे बात बतावे हनुमान जी बैठे,
सुपा रंग सुनहरी साय अगम निगम।
सत खण्ड के खबर बताय महबीर,
सदा सहाय सुपा चले चलाय जेन।
पुछव तेन बताय ना बताय तो राजा,
रामचंद्र कि आग्या फिरे दुहाई,
सिता पति रामचंद्र की॥"
(विशेष: यह मंत्र परंपरा से स्वयं सिद्ध माना गया है, अतः इसे अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती; केवल सही उच्चारण और पूर्ण श्रद्धा अनिवार्य है।)
सूप (सुपा): एक स्वच्छ, पूर्णतः साफ़ और उपयुक्त आकार का सुपा।
लाल धागा (मौली/रक्षा सूत्र): सुपा को स्वतंत्र रूप से हवा में लटकाने हेतु।
छिद्र करने का उपकरण: सुपा के शीर्ष भाग में छोटा सा छिद्र करने के लिए।
सुपा तैयार करना:-
सर्वप्रथम सुपा के ऊपरी (शीर्ष) सिरे पर सावधानीपूर्वक एक छोटा छिद्र करें। इसके पश्चात लाल रक्षा सूत्र (मौली) को उस छिद्र में पिरोकर मजबूती से गांठ बांध दें।
धागा धारण एवं संतुलन:-
लाल धागे के दूसरे सिरे को अपने हाथ की उंगली में इस प्रकार लपेटें या फंसाएं कि सुपा पूरी तरह हवा में जमीन से ऊपर स्वतंत्र रूप से लटक जाए और वह बिना किसी भौतिक रुकावट के चारों ओर आसानी से घूम सके।
मंत्र अभिमंत्रण (3 बार):-
सुपा को हवा में स्थिर लटकाए रखकर, ऊपर दिए गए सिद्ध मंत्र का स्पष्ट व शुद्ध भाव से 3 बार पाठ करें। प्रत्येक बार पाठ पूर्ण होते ही सुपा पर अपनी फूँक (दम) मारें।
प्रश्न पूछना व दिशा निर्देश:-
अब आप जो भी अज्ञात बात, गुप्त रहस्य या अपना संशय दूर करना चाहते हैं, उस प्रश्न को मन में अथवा स्पष्ट वाणी में बोलें। इसके साथ ही सुपा को संकेत दें—जैसे: "यदि यह बात सच है या उत्तर 'हाँ' है, तो दाहिनी ओर (या घड़ी की दिशा में) घूमो।"
परिणाम व संकेत प्रकटीकरण:-
पारंपरिक मान्यतानुसार, यदि पूछी गई बात सत्य होगी, तो सूक्ष्म ऊर्जा प्रभाव से सुपा स्वतः ही आपके द्वारा निर्देशित दिशा में तेजी से घूमने लगेगा और आपको आपके प्रश्न का प्रत्यक्ष उत्तर प्राप्त हो जाएगा।
पवित्रता व सात्विकता:- यह प्रयोग मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी और संकटमोचन हनुमान जी की दुहाई से बंधा हुआ है। अतः इसका प्रयोग केवल सात्विक भाव, शुद्ध हृदय और एकाग्रता के साथ ही करें।
अनावश्यक प्रयोग निषेध:- इसे कभी भी खेल, मनोरंजन, अहंकार या अनुचित लाभ के लिए प्रयोग में न लाएं; इसका उपयोग केवल गंभीर संशय, सत्य के अन्वेषण अथवा लोक-कल्याण के निमित्त ही किया जाना चाहिए।
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