क्या आप अपने जीवन की उलझनों को खत्म करके एक सफल और सिद्ध व्यक्तित्व प्राप्त करना चाहते हैं? तंत्र-मंत्र जगत में 'त्रिकालदर्शी लौंग साधना' एक ऐसी ही महान विद्या और उच्च कोटि की शक्ति है। इस साधना के सिद्ध होने के बाद, माता काली की कृपा से लौंग स्वयं अपने स्थान से उठकर भूत, भविष्य और वर्तमान की सटीक जानकारी देती है। चाहे किसी मरीज के रोग का पता लगाना हो, चोरी गई वस्तु की खोज हो या किसी कार्य की सफलता-असफलता को जानना हो, आप 'हां' या 'ना' में सटीक उत्तर प्राप्त कर सकते हैं।
नीचे इस रहस्यमयी और पवित्र साधना की संपूर्ण सामग्री, नियम और दैनिक पूजन विधि विस्तार से दी गई है।
साधना मार्ग अत्यंत पवित्र और अनुशासन की मांग करता है। इस साधना को शुरू करने से पहले इन नियमों को कंठस्थ कर लें:
पूर्ण सात्विकता: साधना काल के दौरान मांस, मदिरा या किसी भी तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
गोपनीयता: यह साधना पूर्णतः एकांत कमरे या किसी सुनसान मंदिर में की जानी चाहिए। आप यह साधना किस उद्देश्य से कर रहे हैं, इसकी भनक आपके अलावा किसी और को नहीं होनी चाहिए। (यदि परिवार पूछे, तो केवल सुख-शांति के लिए पूजा कह सकते हैं)।
सूतक-पातक का विचार: साधना शुरू करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपके परिवार/कुल में कोई बालक जन्म लेने वाला न हो और न ही कोई मरणासन्न (मृत्यु के करीब) अवस्था में हो। जन्म या मरण के समय सूतक-पातक लगने से साधना खंडित हो जाती है।
कमरे का वातावरण: जिस कमरे में साधना करें, वहां फालतू का सामान या कबाड़ न रखें। साधना के दौरान शक्तियां और माता काली के गण आते हैं, जिससे कमरे में कंपन या आवाजें हो सकती हैं। डरें नहीं, एकाग्र रहें।
उर्जा का संरक्षण: साधना स्थल (कमरे) पर ही आपको रात को सोना होगा। यदि आप वहां नहीं सोएंगे, तो नकारात्मक शक्तियां आपकी एकत्रित की हुई ऊर्जा को चुरा सकती हैं।
इस साधना में प्रयुक्त होने वाली सभी सामग्रियां दो भागों में विभाजित हैं:
काला कंबल – 1
काला वस्त्र – 1
स्टील की कटोरी – 1
काला फेटा वस्त्र (सिर ढकने के लिए) – 1
साबुत लौंग – 100 ग्राम
पांच प्रकार की मिठाई – 1 सेट रोज
अगरबत्ती – 2 बड़े पैकेट
मीठा पान (रोज के लिए)
लौंग और इलायची (दैनिक अर्पण के लिए)
साबुत सुपारी
बताशा – 500 ग्राम
गाय का शुद्ध घी – 1 किलोग्राम
तिल का तेल – 2 लीटर
मिट्टी का बड़ा दीपक – 1
लंबी रुई बत्ती – 30 पीस
यह साधना कुल 21 दिनों की है। इसे शुरू करने की एक विशेष समय सारणी और प्रक्रिया है:
साधना शुरू करने से एक दिन पहले (कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को) अपने गांव या मोहल्ले से बाहर स्थित ग्राम देवता और स्थान देवता के स्थान पर जाएं। वहां धूप-दीप जलाएं, मिष्ठान का भोग लगाएं और उनसे साधना की सफलता के लिए अनुमति व आशीर्वाद मांगें।
प्रातः काल: सूर्योदय से पहले उठकर अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ 5-5 अगरबत्ती प्रज्वलित करें और अपने पितरों से साधना की निर्विघ्न पूर्णता के लिए प्रार्थना करें।
रात्रि काल (साधना का समय): रात 10:00 बजे से ही तैयारी में लग जाएं। ठीक 11:00 बजे रात्रि को साधना आरंभ करनी है।
आसन और वेशभूषा: काले रंग के वस्त्र धारण करें और अघोरियों की तरह काले कपड़े से सिर पर फेटा मार कर पूरा सिर ढक लें। काले कंबल को चार बार मोड़ें, उसके बीच में कुशा का मोटा आसन दबाएं और सबसे ऊपर नीम की पत्तियां बिछाकर बैठें।
काली माता स्वरूप स्थापना: एक लकड़ी की चौकी पर गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें। उस पर काले रंग के चावल (चावल को काला रंग लें) की ढेरी बनाएं और उस पर एक बड़ी सुपारी स्थापित करें। इसे माता काली का स्वरूप मानें।
गणेश जी की स्थापना: इसी चौकी पर थोड़ी दूरी पर पीले चावल रखें और उस पर एक सुपारी रखकर गणेश जी का स्वरूप मानें।
दीपक और पंच-देवता स्मरण: सबसे पहले तिल के तेल का एक बड़ा अखंड दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद स्थान देवता, वास्तु देवता, ग्राम देवता, क्षेत्रपाल देवता और पितृ देवता के नाम से 5 अगरबत्ती जलाकर मानसिक रूप से उनका नमन करें।
गणेश पूजन: सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। उन्हें धूप-दीप दिखाएं, पांच प्रकार की मिठाई और जल अर्पित करें। उनसे प्रार्थना करें कि वे साधना को निर्विघ्न सफल बनाएं।
माता काली का पूजन: इसके बाद सबसे अंत में माता काली का पूजन करें। उन्हें वस्त्र, धूप-दीप और 5 प्रकार की मिठाई अर्पित करें। एक पान के पत्ते पर 2 लौंग, 2 इलायची, 1 सुपारी रखकर चढ़ाएं। साथ ही एक बताशे पर 2 लौंग और 2 इलायची रखकर अर्पित करें। इसके बाद एक नींबू की बलि (चाकू से काटकर) माता के सामने दें।
मंत्र जाप और हवन: माता काली के सामने एक कटोरी में 5 लौंग रख दें (ध्यान रहे, पूरी साधना के दौरान माता, गणेश जी और लौंग का स्थान बदलना नहीं चाहिए)। अब अपने गुरु का स्मरण करें। इसके बाद:
रुद्राक्ष की माला से पहले गुरु द्वारा बताए गए गणेश मंत्र का जाप करें।
इसके बाद मूल साधना मंत्र (जो आपको प्रदान किया गया है) की 5 माला का जाप करें।
जाप पूर्ण होने के बाद गाय के घी से 1 माला का हवन करें।
⚠️ नोट: यह क्रिया लगातार 21 दिनों तक बिना रुके करनी है। साधना के दौरान कुछ अलौकिक या डरावने अनुभव हो सकते हैं, लेकिन डरना नहीं है। इन अनुभवों को अपने गुरु या मार्गदर्शक के अलावा किसी को न बताएं।
जब 21 दिनों की साधना पूर्ण हो जाएगी, तो लौंग सिद्ध हो जाएगी। इसके बाद किसी भी प्रश्न का उत्तर जानने के लिए यह संक्षिप्त विधि अपनाएं:
जमीन पर या लकड़ी की चौकी पर गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें और नया लाल कपड़ा बिछाएं।
एक मुट्ठी साफ चावल लें।
5 सिद्ध लौंग में से 4 लौंग को चारों दिशाओं में रखें और 1 लौंग को बीच में रखे हुए चावलों के ऊपर रख दें।
इसके बाद हर एक लौंग पर और चावल पर 21-21 बार फूंक मारकर उन्हें पुनः जागृत करें।
अब गणेश जी, माता काली और काल भैरव जी का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें।
इसके बाद लौंग से प्रश्न पूछें (जैसे: क्या इस मरीज पर कोई ऊपरी बाधा या रोग है? अगर है, तो कृपया अपने स्थान से उठकर जवाब दें)।
शुरुआती साधक अपनी आंखें लौंग पर केंद्रित करके थोड़ा इंतजार करें। यदि उत्तर 'हां' है, तो लौंग स्वाभाविक रूप से अपने स्थान से हिलकर या उठकर माता काली की आज्ञा से उत्तर देगी।
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