शाबर मंत्र अपनी अनूठी भाषा, सरलता और अचूक मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इन्हें किसी जटिल कर्मकांड की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये अपने आप में सिद्ध होते हैं। नकारात्मक ऊर्जा, नजरदोष या किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र (टोने-टोटके) के कुप्रभाव को तत्काल समाप्त करने के लिए यह एक अत्यंत सुलभ और अचूक साधना प्रयोग है। छात्रों और साधकों की सुविधा के लिए इस पूरी विधि को क्रमबद्ध रूप से नीचे प्रस्तुत किया गया है:
| विषय | नियम व निर्देश |
| मुख्य उद्देश्य | किसी भी प्रकार के टोने-टोटके, नजरदोष या नकारात्मक ऊर्जा का निवारण। |
| प्रधान सामग्री | केवल एक ताजा सात्विक फूल (गेंदा या गुलाब)। |
| शुभ दिशा | प्रयोग के समय साधक का मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। |
| आवृत्ति (संख्या) | मंत्र पढ़ते हुए कुल सात (7) बार झाड़ा देना अनिवार्य है। |
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⚠️ महत्वपूर्ण नोट: मंत्र का उच्चारण पूर्णतः शुद्ध होना चाहिए। मंत्र के भीतर जहाँ भी 'अमुक' शब्द का उल्लेख आया है, वहाँ पर आपको उस प्रभावित व्यक्ति का नाम लेना है जिसका आप उपचार कर रहे हैं, या उस विशिष्ट स्थान का नाम लेना है जहाँ से नकारात्मकता दूर करनी है।
इस सरल लेकिन अत्यंत तीव्र प्रयोग को पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ निम्नलिखित चरणों में संपन्न करें:
चरण १ (तैयारी): सबसे पहले एक ताजा और खिला हुआ पुष्प (गेंदा या गुलाब का फूल इसके लिए सर्वश्रेष्ठ है) अपने हाथ में लें। प्रभावित व्यक्ति को अपने ठीक सामने सहज होकर बैठने को कहें।
चरण २ (दिशा और आसन): स्वयं पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या साफ आसन पर बैठ जाएं।
चरण ३ (मंत्र और झाड़ा प्रक्रिया): अपने हाथ में फूल को पकड़कर ऊपर दिए गए शाबर मंत्र का पूरी श्रद्धा के साथ पाठ करें। मंत्र समाप्त होते ही, उस फूल से प्रभावित व्यक्ति के सिर से लेकर पैर तक हल्के से स्पर्श कराते हुए हवा में लहराएं (इसे 'झाड़ा देना' कहा जाता है)।
चरण ४ (पूर्णता): इस प्रक्रिया को कुल ७ बार दोहराना है। अर्थात, हर बार मंत्र पढ़ें, 'अमुक' की जगह नाम लें, और फूल से १ बार झाड़ा दें। इस तरह कुल ७ बार मंत्र पाठ और ७ बार झाड़ा दिया जाएगा।
यह लघु शाबर प्रयोग अपने भीतर तीव्र सकारात्मक ऊर्जा समेटे हुए है, जिसके पूर्ण होते ही निम्नलिखित लाभ दिखाई देते हैं:
नकारात्मकता का तत्काल शमन: सात बार पूरी विधि संपन्न होते ही व्यक्ति पर लगा हुआ कैसा भी कड़ा नजरदोष, ऊपरी हवा का प्रभाव या टोना-टोटका तुरंत छिन्न-भिन्न हो जाता है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार: प्रभावित व्यक्ति के आभा मंडल (Aura) की शुद्धि होती है, जिससे उसके भीतर नई चेतना और दिव्य ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है।
मानसिक शांति और हल्कापन: पीड़ित व्यक्ति को सिर या शरीर में लग रहे भारीपन, घबराहट और बेचैनी से तत्काल मुक्ति मिलती है और वह मानसिक रूप से पूर्ण सहजता व शांति महसूस करता है।
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