"साधना वही, जो जीवन में परिवर्तन लाए।"
क्या आप जीवन के असाध्य दुखों, शत्रुओं के भय, असाध्य रोगों या निरंतर आने वाले संकटों से घिरे हैं? तंत्र सम्राट "कश्यप छत्तीसगढ़ी गुरुदेव महाराज" की कृपा से प्राप्त श्री पीताम्बरा माता बगलामुखी साधना कलयुग की सबसे अचूक, तीव्र और फलदायी साधनाओं में से एक है। यह साधना केवल बाहरी बाधाओं का ही नहीं, बल्कि आंतरिक भय और नकारात्मकता का नाश कर जीवन में ओज, तेज और सुरक्षा का एक अभेद्य कवच प्रदान करती है।
आंतरिक रूपांतरण: साधना के दौरान आपके व्यक्तित्व में अद्भुत ओज और उत्साह का संचार होता है।
निर्भयता: मन के गहरे भय समाप्त होते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी साहस बना रहता है।
संकट मुक्ति: बड़े से बड़े शत्रु, कानूनी अड़चनें और असाध्य रोग निष्प्रभावी होने लगते हैं।
सुरक्षा कवच: निरंतर जाप से भविष्य में आने वाले दुखों के मार्ग स्वतः बंद हो जाते हैं।
यह एक अत्यंत पवित्र और गोपनीय साधना है, जिसे पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ संपन्न करना अनिवार्य है।
पीत वर्ण (पीला रंग): इस साधना में पीला रंग सर्वोपरि है—पीले वस्त्र, पीला आसन और सात्विक पीला आहार (जैसे हल्दी युक्त भोजन)।
दिव्य युति: माता बगलामुखी के साथ माता धूमावती की स्थापना अनिवार्य है, क्योंकि इनके बिना यह साधना पूर्ण नहीं मानी जाती।
अनुशासन: वीर आसन में बैठकर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए इसे संपन्न करना है। जमीन पर पीला वस्त्र बिछाकर ही शयन करना वर्जित है।
गोपनीयता: साधना की पूर्ण अवधि में साधक को पूर्ण गोपनीयता बनाए रखनी है।
प्रारंभ तिथि: 3 अक्टूबर से।
समय: रात्रि 10:00 या 11:00 बजे के बाद (रात्रिकाल में ऊर्जा सर्वाधिक प्रभावशाली होती है)।
नियम: प्रतिदिन 3 माला मूल मंत्र का जाप और 1 माला का दशांश हवन।
दिशा: उत्तर (North) या पूर्व (East) की ओर मुख करके साधना करें।
साधना शुरू करने से पूर्व अपनी सामग्री तैयार रखें:
मुख्य: पीला आसन, हल्दी या पीले हकीक की माला, तिल के तेल का दीपक।
पूजन: लकड़ी की चौकी, पीला और सफेद वस्त्र (माता बगलामुखी व धूमावती हेतु), पीली सरसों।
भोग: माता बगलामुखी के लिए पीली मिठाई, धूमावती माता के लिए सफेद मिठाई।
साधना के प्रथम चरण में अपने इष्ट, गणेश जी और कुलदेवताओं का पूजन कर, हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने कष्टों को दूर करने या लोक-कल्याण का संकल्प लें।
सावधानियाँ: साधना के दौरान किसी भी प्रकार की मानसिक चंचलता से बचें। यदि घर पर साधना कर रहे हैं, तो शरीर सुरक्षा मंत्र का प्रयोग अवश्य करें।
चेतावनी: यह साधना पूर्णतः सात्विक और अनुशासित है। मांस-मदिरा का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसे पूर्ण श्रद्धा और गुरु के प्रति समर्पण के साथ ही प्रारंभ करें।
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