प्रिय छात्रों एवं साधकों, अध्यात्म और प्राचीन तंत्र विज्ञान की श्रृंखला में शाबर मंत्रों का विशेष स्थान है। ये मंत्र सरल, प्रामाणिक और अत्यंत प्रभावशाली होते हैं क्योंकि इन्हें सिद्ध करने के लिए किसी जटिल या लंबे अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती। इस निर्देशिका में लक्ष्मी बंधन, व्यापार बंधन, कुल शक्ति कीलन एवं समस्त अदृश्य तंत्र बाधाओं को तत्काल दूर करने का एक दुर्लभ और अचूक शाबर प्रयोग दिया जा रहा है। शिक्षार्थियों की सुगमता के लिए पूरी विधि को नीचे अत्यंत सुगम और विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया गया है:
| विषय | विधि (A): व्यापार व लक्ष्मी बंधन मुक्ति | विधि (B): कुल शक्ति व विद्या बंधन मुक्ति |
| मुख्य उद्देश्य | व्यापारिक मंदी दूर करना, तिजोरी व दुकान का बंधन खोलना। | कुलदेवी-देवता का कीलन हटाना, तंत्र दोष का शमन। |
| प्रधान सामग्री | साफ-सुथरे अक्षत (साबुत चावल के दाने)। | काली सरसों (राई) और शुद्ध गाय का दूध। |
| मंत्र आवृत्ति | एकाग्रचित्त होकर कुल २१ (21) बार पाठ। | एकाग्रचित्त होकर मंत्र द्वारा अभिमंत्रण। |
| मुख्य क्रिया | अभिमंत्रित चावलों को प्रतिष्ठान में छिड़कना। | सरसों का छिड़काव और अभिमंत्रित दूध का सेवन। |
मंत्र के मूल उच्चारण में कोई भी अंतर या त्रुटि न आए, इसके लिए इसे अत्यंत स्पष्ट शब्दों में नीचे लिखा गया है। साधना काल में इसका पाठ पूर्ण श्रद्धा के साथ लयबद्ध होकर करें:
"।।"
इस स्वयं सिद्ध शाबर मंत्र की ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए परिस्थिति के अनुसार दो अलग-अलग सुंदर और सुस्पष्ट पद्धतियों से प्रयोग किया जाता है:
यदि दुर्भावना वश किसी ने आपका व्यापार बांध दिया हो, चलती हुई दुकान अचानक ठप हो गई हो या घर में धन-लक्ष्मी का आगमन रुक गया हो, तो इस विधि का आश्रय लें:
चरण १: सबसे पहले साफ-सुथरे और अटूट अक्षत (साबुत चावल, जो टूटे हुए न हों) लें।
चरण २: पवित्र आसन पर बैठकर ऊपर दिए गए सिद्ध मंत्र का स्पष्ट रूप से २१ (21) बार उच्चारण करें।
चरण ३: प्रत्येक बार मंत्र पूरा होने पर हाथ में रखे चावलों पर मुख से हल्की सी फूंक (फूत्कार) मारें।
चरण ४: इस प्रकार अभिमंत्रित किए गए चावलों को अपनी दुकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, फैक्ट्री या घर में तिजोरी वाले स्थान पर छिड़क दें। इसके प्रभाव से समस्त प्रकार का व्यापारिक बंधन तत्काल समाप्त हो जाता है।
यदि किसी ने ईर्ष्यावश तांत्रिक अभिचार करके आपके कुल देवी-देवताओं की शक्तियों अथवा कृपा को कीलित (बांध) कर दिया हो, जिसके कारण वंश वृद्धि या मांगलिक कार्यों में बाधा आ रही हो, तो इस विधि का प्रयोग करें:
चरण १: थोड़ी सी शुद्ध काली सरसों (राई) लें और ऊपर दिए गए मंत्र को पढ़ते हुए उसे अभिमंत्रित कर लें। इस अभिमंत्रित सरसों को प्रभावित स्थान (घर/आँगन) या पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से उसार कर छिड़क दें।
चरण २: इसके साथ ही, शुद्ध दूध को एक पात्र में लेकर इस मंत्र द्वारा अभिमंत्रित करें और पीड़ित व्यक्ति को पिलाएं। यह दोहरी क्रिया अत्यंत तीक्ष्णता से कार्य करती है और हर प्रकार के कीलन, विद्या बंधन या कड़े तंत्र दोष को जड़ से काट देती है।
मानसिक शुचिता: साधना और प्रयोग के समय मन में पूर्ण विश्वास, शारीरिक पवित्रता और आंतरिक शुचिता का विशेष ध्यान रखें। संदेहयुक्त मन से किए गए प्रयोग निष्फल हो जाते हैं।
जनकल्याण की भावना: शाबर मंत्रों की शक्ति अकाट्य और अचूक होती है। इसलिए इनका प्रयोग कभी भी किसी का अहित करने के लिए नहीं, बल्कि सदैव सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार, आत्मरक्षा और जनकल्याण की सात्विक भावना से ही किया जाना चाहिए।
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