तंत्र शास्त्र में 'विद्वेषण' का अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच उपजे उस अनैतिक या विनाशकारी संबंध को समाप्त करना, जो समाज, परिवार या किसी व्यक्ति के जीवन के लिए घातक सिद्ध हो रहा हो। यह स्वयंसिद्ध बंगाली मंत्र अत्यंत तीव्र प्रभाव रखता है।
यह विद्या एक गंभीर साधना है। इसका प्रयोग केवल और केवल जनहित या किसी परिवार को बिखरने से बचाने के लिए ही किया जाना चाहिए।
वर्जित: इसे कभी भी मजाक, ईर्ष्या, या द्वेष वश न करें।
परिणाम: बिना उचित कारण और पवित्र उद्देश्य के किया गया प्रयोग स्वयं साधक के लिए कष्टकारी हो सकता है। इसे केवल तब ही उपयोग करें जब आपको स्पष्ट हो कि उन दो व्यक्तियों का साथ रहना किसी के लिए भारी अनर्थ का कारण बन सकता है।
यह साधना पूर्ण सावधानी और शुद्धता की मांग करती है। इसे संपन्न करने के चरण निम्नलिखित हैं:
यह प्रयोग शनिवार के दिन ही किया जाना चाहिए। किसी पान की दुकान से बिना मोल-भाव (Bargaining) किए, दुकानदार द्वारा मांगे गए दाम पर एक पान खरीद कर लाएं।
एकांत स्थान पर शांत मन से बैठें। पान को अपने सामने रखें और नीचे दिए गए मंत्र का स्पष्ट उच्चारण के साथ ७ बार जप करें।
ध्यान: मंत्र पढ़ते समय उन दोनों व्यक्तियों का मानसिक चित्रण करें जिन्हें आप अलग करना चाहते हैं।
संकल्प: प्रत्येक मंत्र के उच्चारण के बाद पान पर 'फूँक' (Blow) मारें।
"ॐ नमः [अमुकीर] [अमुकेर] विच्छेदं कुरु कुरु स्वाहा" (यहाँ 'अमुकीर' के स्थान पर पहले व्यक्ति का नाम और 'अमुकेर' के स्थान पर दूसरे व्यक्ति का नाम लें।)
साधना के अनुसार अभिमंत्रित पान का प्रभाव ही मुख्य है।
सरलता: यदि दोनों को एक साथ खिलाना कठिन हो, तो पान के दो बराबर भाग करें।
अन्य विकल्प: यदि वे सीधा पान न खाएं, तो आप पान को कूटकर, पीसकर या उसका रस निकालकर किसी अन्य खाद्य पदार्थ, मिठाई या पेय (जैसे जूस) में मिलाकर उन्हें खिला/पिला सकते हैं।
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