क्या आप उच्च स्तरीय साधनाओं में निर्भय होकर आगे बढ़ना चाहते हैं?
अध्यात्म के मार्ग पर साधना की सघनता जैसे-जैसे बढ़ती है, साधक को एक ऐसे सुरक्षा-कवच की आवश्यकता होती है जो केवल बाहरी नहीं, बल्कि उसके सूक्ष्म शरीर (Astral Body) को भी अभेद्य बना सके। ‘द्वितीय श्रेणी साधना सुरक्षा’ उन समर्पित साधकों के लिए है जो अपनी साधना को अगली ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं।
यह विद्या केवल उनके लिए है जिन्होंने साधना का प्रथम चरण सफलतापूर्वक पार कर लिया है—जहाँ साधक के भीतर से भय, शंका और नकारात्मक ऊर्जा के प्रति अस्थिरता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
अभेद्य सुरक्षा घेरा: यह मंत्र शरीर को एक ऐसे अभेद्य दुर्ग में बदल देता है, जिसे भूत, प्रेत, राक्षस, असुर या किसी भी प्रकार का अभिचार कर्म (तांत्रिक बाण) भेद नहीं सकता।
शक्ति प्रकटीकरण में सहायक: अक्सर साधक सुरक्षा घेरा (कारकशन) इतना कड़ा बना लेते हैं कि दिव्य शक्तियाँ उनके सम्मुख प्रकट नहीं हो पातीं। यह मंत्र बिना किसी घेरे के आपके शरीर को 'लॉक' करता है, जिससे आप निर्भय होकर तीव्र साधनाएं कर सकते हैं।
दसों दिशाओं पर नियंत्रण: इस मंत्र का प्रभाव दसों दिशाओं को बांधने और नकारात्मक ऊर्जाओं को साधक से दूर रखने में सक्षम है।
इस स्वयंसिद्ध बंगाली तांत्रिक मंत्र का प्रयोग अत्यंत सटीक और प्रभावी है:
पूर्ण एकाग्रता: साधना आसन पर स्थिर होने के बाद, मन को शांत करें।
मंत्र का अनुष्ठान: इस महामंत्र का 7 बार स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण करें।
मार्जन क्रिया: प्रत्येक बार मंत्र पूरा करने के पश्चात, एक गहरी सांस लेकर अपने शरीर पर फूंक (मार्जन) मारें। ध्यान रहे कि वायु आपकी छाती, भुजाओं और समस्त अंगों को स्पर्श करे।
परिणाम: इस 7 बार की 'संपुट-फूँक' प्रक्रिया से आपका संपूर्ण शरीर आध्यात्मिक रूप से पूर्णतः 'लॉक' (सुरक्षित) हो जाता है, जिससे आप बिना किसी व्यवधान के अपनी मुख्य साधना में लीन हो सकते हैं।
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