सिद्ध तिजोरीवर्धक धनाधीश कुबेर पोटली (Siddha Tijorivardhak Dhanadhish Kuber Potli) एक प्राचीन तांत्रिक और शास्त्रोक्त उपाय है, जिसे घर में स्थिर लक्ष्मी के वास और धन की बरकत के लिए उपयोग किया जाता है। यह पोटली धन के अधिपति भगवान कुबेर की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है।
भगवान कुबेर को हिंदू धर्म में 'धनाधीश' यानी धन का राजा माना गया है। वे रावण के भाई हैं और देवताओं के कोषाध्यक्ष (Treasurer) हैं। भगवान शिव ने उन्हें उत्तर दिशा का लोकपाल और समस्त संसार की धन-संपदा का रक्षक नियुक्त किया है। कुबेर देव की पूजा के बिना लक्ष्मी जी की कृपा स्थिर नहीं होती, क्योंकि लक्ष्मी आय (Income) लाती हैं और कुबेर उसे संचित (Savings) रखते हैं।
यह लाल या पीले रेशमी वस्त्र से बनी एक छोटी पोटली होती है, जिसमें कुबेर देव को प्रिय वस्तुएं जैसे— गोमती चक्र, कौड़ी, लघु नारियल, कमल गट्टा, कुबेर यंत्र, और विशेष जड़ी-बूटियाँ रखी जाती हैं। इसे शुभ मुहूर्त में कुबेर मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाता है ताकि यह एक 'ऊर्जा पुंज' बन सके।
यह पोटली निम्नलिखित समस्याओं में रामबाण मानी जाती है:
धन का अभाव: यदि पैसा आता है पर टिकता नहीं (Expenditure more than Income)।
व्यापार में घाटा: दुकान या फैक्ट्री में ग्राहकों की कमी और आर्थिक मंदी को दूर करने में सहायक।
कर्ज मुक्ति: यह आय के नए स्रोत खोलकर कर्ज के बोझ से राहत दिलाने में मदद करती है।
स्थिर लक्ष्मी: यह सुनिश्चित करती है कि आपके घर की बरकत (Prosperity) कभी खत्म न हो।
शुभ दिन: इसे शुक्रवार, धनतेरस, या दीपावली के दिन स्थापित करना सर्वश्रेष्ठ है।
शुद्धि: इसे स्थापित करने से पहले गंगाजल से पवित्र करें और धूप-दीप दिखाएं।
स्थान: इसे अपने घर की तिजोरी, लॉकर या व्यापारिक गल्ले में रखें।
दिशा: इसे हमेशा उत्तर (North) दिशा की ओर रखना चाहिए, क्योंकि यह कुबेर देव की दिशा है।
मंत्र: रखते समय “ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥” का जाप करें।
कुबेर पोटली की शक्ति बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य है:
गोपनीयता: पोटली को तिजोरी में ऐसे रखें कि बाहर के लोगों की नजर उस पर न पड़े। इसे जितना गुप्त रखेंगे, यह उतनी ही प्रभावी होगी।
पवित्रता: बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में तिजोरी को न छुएं और न ही पोटली को स्पर्श करें।
नियमित पूजन: हर शुक्रवार या पूर्णिमा के दिन तिजोरी खोलकर पोटली को बाहर से ही धूप (Incense) दिखाएं।
स्थान परिवर्तन: इसे बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर न बदलें।
मांस-मदिरा: जिस घर में कुबेर पोटली स्थापित हो, वहां सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए।
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