सिद्ध चंद्र नवग्रह यन्त्र ज्योतिष शास्त्र में मन की शांति, शीतलता और भावनाओं के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। चंद्रमा को 'मन का कारक' कहा जाता है, इसलिए यह यंत्र सीधे हमारे मानसिक स्वास्थ्य और अंतर्मन को प्रभावित करता है।
सिद्ध चंद्र यन्त्र एक विशेष ज्यामितीय संरचना है जिसमें चंद्रमा की दिव्य ऊर्जा को समाहित किया जाता है। "सिद्ध" होने का अर्थ है कि इसे चंद्रमा के विशिष्ट मंत्रों द्वारा प्राण-प्रतिष्ठित और जागृत किया गया है।
कार्य: इसका मुख्य कार्य जातक की कुंडली में 'चंद्र दोष' या 'विष योग' जैसे अशुभ प्रभावों को कम करना है। यह व्यक्ति के भीतर संवेगात्मक स्थिरता (Emotional Stability) लाता है और चंचल मन को शांत करता है।
चंद्र यंत्र की स्थापना या इसे धारण करने के लिए समय का शुद्ध होना अनिवार्य है:
शुभ दिन: इसे केवल सोमवार (Monday) के दिन धारण या स्थापित करना चाहिए।
पक्ष और तिथि: शुक्ल पक्ष (बढ़ते चंद्रमा के समय) का सोमवार सबसे उत्तम होता है। पूर्णिमा तिथि इसके लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।
समय: इसे सुबह सूर्योदय के समय या संध्या काल में चंद्रमा के उदय होने पर पूजा के पश्चात धारण करना चाहिए।
इस यंत्र के नियमित पूजन या इसे धारण करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
मानसिक शांति: यह तनाव, अवसाद (Depression) और अत्यधिक चिंता को दूर कर मन को एकाग्र करता है।
अनिद्रा से मुक्ति: जिन लोगों को नींद न आने की समस्या है, उनके लिए यह यंत्र अत्यंत लाभकारी है।
माता के साथ संबंध: ज्योतिष में चंद्रमा माता का कारक है, अतः इसे धारण करने से माता के स्वास्थ्य में सुधार और उनके साथ संबंधों में मधुरता आती है।
निर्णय क्षमता: यह भ्रम की स्थिति को समाप्त कर व्यक्ति की कल्पनाशीलता और सही निर्णय लेने की शक्ति को बढ़ाता है।
स्वास्थ्य लाभ: यह शरीर में जल तत्व को संतुलित करता है और फेफड़ों या रक्त से संबंधित विकारों में राहत प्रदान करता है।
कैवल्य एस्ट्रो वर्ल्ड (Kaivalya Astro World) से अभिमंत्रित चंद्र यंत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
वेबसाइट या ऐप: उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ और 'Yantra' सेक्शन को चुनें।
होम डिलीवरी: प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अभिमंत्रित यंत्र सुरक्षित रूप से आपके घर के पते पर भेज दिया जाता है।
सावधानी: चंद्र यंत्र धारण करने वाले व्यक्ति को सफेद रंग के वस्त्रों का अधिक प्रयोग करना चाहिए और सोमवार के दिन भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए, क्योंकि शिव जी ने स्वयं चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है।
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सूर्य कान्त द्विवेदी:
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