भारतीय शाबर तंत्र परंपरा में दैनिक जीवन की शारीरिक व्याधियों और कष्टों के निवारण हेतु अत्यंत सरल और अचूक उपाय बताए गए हैं। महिलाओं एवं छात्राओं को मासिक धर्म (ऋतु चक्र) के दौरान होने वाली तीव्र शारीरिक पीड़ा, पेट दर्द और मरोड़ से तत्काल राहत दिलाने के लिए यह शाबर मंत्र प्रयोग एक अद्भुत और सुलभ पारंपरिक उपाय है। छात्रों और शोधार्थियों के अध्ययन व सही समझ के लिए इस पूरी विधि को यहाँ चरणबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है:
| विषय | नियम व निर्देश |
| मुख्य उद्देश्य | मासिक धर्म (Periods) के समय होने वाले असहनीय दर्द और शारीरिक कष्ट का निवारण। |
| प्रधान सामग्री | साफ-सुथरी और ताजी अदरक (Ginger) का एक छोटा टुकड़ा। |
| मंत्र आवृत्ति | एकाग्रचित्त होकर मंत्र का कुल तीन (3) बार पाठ करना है। |
| मुख्य क्रिया | मंत्र द्वारा अभिमंत्रित अदरक के टुकड़े का पीड़ित महिला द्वारा सेवन। |
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💡 शब्दार्थ व संकेत: मंत्र में आने वाले पारंपरिक शब्दों (जैसे "पतली २ रेश" आदि) का सीधा संबंध अदरक के भीतर मौजूद पतले और बारीक रेशों से है, जो पारंपरिक चिकित्सा और मंत्र विद्या के सुंदर समन्वय को दर्शाता है।
इस पारंपरिक शाबर प्रयोग को पूरी पवित्रता और प्रामाणिकता के साथ निम्नलिखित ४ चरणों में संपन्न किया जाता है:
चरण १ (सामग्री का चयन एवं शुद्धता): सबसे पहले रसोई से एक साफ-सुथरी, बिना दाग वाली और ताजी अदरक का एक छोटा टुकड़ा लें। इसे स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोकर इसकी बाहरी त्वचा (छिलके) को साफ कर लें।
चरण २ (मंत्र अभिमंत्रण प्रक्रिया): तैयार किए गए अदरक के टुकड़े को अपने दाहिने हाथ की हथेली में रखें। अपने मन को पूरी तरह शांत और एकाग्र करें। अब ऊपर दिए गए शाबर मंत्र का स्पष्ट और शुद्ध स्वर में कुल तीन (३) बार पाठ करें। ध्यान रहे, प्रत्येक बार मंत्र पूरा होने पर हाथ में रखी अदरक पर मुख से हल्की सी फूंक (फूत्कार) मारें।
चरण ३ (औषधि का सेवन): इस प्रकार तीन बार के मंत्र पाठ और फूंक से अभिमंत्रित हुए अदरक के टुकड़े को पीड़ित महिला या छात्रा को तुरंत चबाकर खाने (सेवन करने) के लिए दे दें।
चरण ४ (परिणाम व फलश्रुति): पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, इस विधि से अभिमंत्रित अदरक का सेवन करते ही मासिक धर्म के समय होने वाली तीक्ष्ण यंत्रणा, पेट का दर्द, मरोड़ और बेचैनी का तत्काल निवारण हो जाता है और महिला को शीघ्र आराम मिलता है।
पूर्ण श्रद्धा और विश्वास: शाबर मंत्रों की संपूर्ण शक्ति साधक के आत्मबल और अटूट विश्वास पर निर्भर करती है। अतः इस प्रयोग को करते समय मन में किसी भी प्रकार का संशय या संदेह न रखें।
उच्चारण का अभ्यास: प्रयोग करने से पूर्व एकांत में बैठकर मूल मंत्र के शब्दों का बार-बार मौखिक अभ्यास कर लें, ताकि वास्तविक समय पर प्रयोग करते समय मंत्र का प्रवाह न टूटे और शुद्ध उच्चारण हो सके।
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