यह एक विशिष्ट तांत्रिक प्रयोग है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से पति-पत्नी के मध्य उत्पन्न मनमुटाव को दूर करने, खोए हुए प्रेम को पुनः प्राप्त करने और दूर गए साथी को वापस बुलाने के लिए किया जाता है। यह भस्म (राख) पर आधारित एक प्राचीन प्रयोग है, जो रिश्तों में सकारात्मकता और आपसी सामंजस्य स्थापित करने के लिए प्रभावशाली माना जाता है।
इस साधना में उच्चारण की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है। मंत्र का जाप करते समय निम्नलिखित नाम परिवर्तन करें:
अमुकी / फलोनी: यहाँ उस स्त्री का नाम लें जिसे आप आकर्षित करना चाहते हैं या जिसके साथ संबंधों में सुधार लाना चाहते हैं।
अमुका / फलोनार: यहाँ अपना (पुरुष का) नाम लें।
साधना की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए नीचे दिए गए नियमों का पालन करें:
आवश्यक सामग्री: इस प्रयोग के लिए धान के छिलके की राख (तुषेर छाई) का उपयोग करना आवश्यक है।
अभिमंत्रण प्रक्रिया: धान की राख को अपने हाथ में लें और पूरी श्रद्धा व एकाग्रता के साथ मंत्र का 21 बार शुद्ध उच्चारण करें।
फूंक (कवच) मारना: मंत्र की प्रत्येक आवृत्ति पूर्ण होने पर, राख पर एक बार फूंक (कवच) मारें। इस प्रकार 21 बार मंत्र जाप के साथ 21 बार ही फूंक मारनी है।
प्रयोग विधि: अभिमंत्रित की गई भस्म को रात्रि के समय संबंधित स्त्री के घर के सामने ईशान कोण (North-East) से लेकर वायव्य कोण (North-West) की दिशा में बखेर दें (छड़क दें)।
सद्भावना का महत्व: यह प्रयोग केवल टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने, परिवार को संगठित करने और दांपत्य जीवन को सुखमय बनाने के पवित्र उद्देश्य से ही किया जाना चाहिए।
दुरुपयोग वर्जित: किसी भी प्रकार के अनैतिक, अवैध, दुर्भावनापूर्ण या किसी को अकारण कष्ट पहुँचाने के उद्देश्य से इस मंत्र का उपयोग करना पूर्णतः निषेध है। गलत इरादे से किया गया प्रयोग निष्फल हो सकता है या इसके विपरीत परिणाम (नकारात्मक प्रभाव) प्राप्त हो सकते हैं।
सावधानी: तांत्रिक प्रयोग हमेशा उचित मार्गदर्शन में और सकारात्मक मानसिक स्थिति में ही करने चाहिए।
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