हमारे ग्रामीण और कृषि परिवेश में गाय, भैंस, बैल आदि पशु केवल धन नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। कई बार अज्ञात बीमारियों, नजरदोष या नकारात्मक तांत्रिक शक्तियों के कारण पशु सुस्त हो जाते हैं, दूध देना कम कर देते हैं या बीमार रहने लगते हैं। ऐसी स्थिति में पशुओं को सुरक्षित रखने और पशुशाला (गौशाला) की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए यह शाबर मंत्र प्रयोग अत्यंत अचूक माना गया है।
| विषय | नियम व निर्देश |
| मुख्य उद्देश्य | पशुओं को नजरदोष, अज्ञात बीमारी, टोने-टोटके और बाहरी बाधाओं से बचाना। |
| शुभ दिन | यह विशेष तांत्रिक प्रयोग केवल रविवार या मंगलवार के दिन ही संपन्न किया जाता है। |
| प्रधान सामग्री | भोजपत्र, अनार की कलम, लाल कुमकुम या सिंदूर, और गंगाजल। |
| स्थापना स्थान | मंत्र द्वारा अभिमंत्रित यंत्र/भोजपत्र को पशुशाला (कीचड़/गोबर से दूर साफ स्थान) की भूमि में दबाना। |
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किसी भी जीव को कष्ट दिए बिना, पूरी पवित्रता के साथ इस सफल प्रयोग को निम्नलिखित चरणों में पूरा करें:
चरण १ (सामग्री की तैयारी): रविवार या मंगलवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें। बाजार से एक साफ (बिना कटा-फटा) भोजपत्र लाएं। थोड़ा सा लाल कुमकुम या सिंदूर लें और उसमें गंगाजल मिलाकर स्याही तैयार कर लें। लिखने के लिए अनार की लकड़ी की कलम (अनार की टहनी को आगे से छीलकर) बना लें।
चरण २ (लेखन क्रिया): पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मन में अपने कुलदेवता या हनुमान जी का स्मरण करते हुए अनार की कलम से कुमकुम द्वारा भोजपत्र पर ऊपर दिए गए मूल पशु रक्षा मंत्र को साफ-साफ लिखें।
चरण ३ (मंत्र अभिमंत्रण): जब भोजपत्र पर मंत्र सूख जाए, तो उसे अपने सामने धूप-दीप दिखाकर रखें। अब हाथ में रुद्राक्ष या चंदन की माला लेकर, उसी मंत्र का एकाग्रचित्त होकर सात (७) बार पुनः स्पष्ट पाठ करें और हर बार भोजपत्र पर हल्के से फूंक मारें। इस प्रक्रिया से वह भोजपत्र एक रक्षक कवच (यंत्र) के रूप में जागृत हो जाता है।
चरण ४ (अंतिम क्रिया/भूमिसत्): अब इस अभिमंत्रित भोजपत्र को मोड़कर (चाहे तो तांबे के ताबीज में भरकर या कपड़े में लपेटकर) अपनी पशुशाला (जहाँ मुख्य रूप से गाय, भैंस या अन्य पशु बांधे जाते हैं) के द्वार के पास या अंदर की साफ भूमि में गहरा गड्ढा खोदकर दबा (गाड़) दें।
नकारात्मक शक्तियों का परित्याग: भूमि में इस अभिमंत्रित मंत्र के दबते ही पशुशाला के भीतर व्याप्त सभी प्रकार की भूत-बाधा, नजरदोष, और तंत्र-मंत्र के कुप्रभाव हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।
पशुओं का स्वास्थ्य लाभ: पशु अकारण बीमार होना बंद हो जाते हैं, उनके भीतर छटपटाहट या डर खत्म होता है और वे शांत व स्वस्थ रहते हैं।
दूध और वंश में वृद्धि: इस सात्विक उपाय के प्रभाव से गौवंश में वृद्धि होती है और दुधारू पशुओं के दूध देने की क्षमता में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
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