यह साधना मुस्लिम तंत्र पद्धति के अंतर्गत एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य परी की रूह (आत्मा) को आकर्षित करना है। इस साधना की पूर्ण सिद्धि से साधक को जीवन में वैभव, धन, ऐश्वर्य, मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
अवधि: यह साधना शुक्रवार से शुरू होकर अगले शुक्रवार तक चलती है।
स्थान: शांत और निर्जन कब्रस्तान (दो कब्रों के मध्य का स्थान उत्तम माना गया है)।
समय: रात्रि 9:00 बजे स्थान पर पहुँचना और ठीक 10:00 बजे मंत्र जप प्रारंभ करना।
सावधानी: साधना के दौरान पूर्ण गोपनीयता बरतना अनिवार्य है। कार्य सिद्ध होने तक किसी को भी इसके बारे में न बताएं।
तैयारी: गुरुवार को सामग्री (हरा कपड़ा, हकीक माला, गुलाब जल, इत्र, अगरबत्ती आदि) एकत्रित करें और स्थान सुनिश्चित करें।
सुरक्षा: साधना प्रारंभ करने से पूर्व 'शरीर सुरक्षा मंत्र' और 'सुरक्षा घेरे' का प्रयोग करना अनिवार्य है ताकि साधक पूरी तरह सुरक्षित रहे।
मंत्र जप: पश्चिम दिशा की ओर मुख करके हरे आसन पर बैठें। मुस्लिम पद्धति के अनुसार, बाएं हाथ से हकीक माला का उपयोग करते हुए प्रतिदिन 11 माला का जाप करें।
अनुभव व धैर्य: साधना के दौरान कई प्रकार के अद्भुत अनुभव हो सकते हैं। परी के प्रत्यक्ष होने पर विचलित न हों, शांत रहें और दृढ़ता के साथ अपना जाप पूर्ण करें।
शुद्धता: साधना स्थल को सुगंधित और स्वच्छ रखें। स्वयं भी इत्र का प्रयोग करें।
संवाद: जब परी साक्षात्कार दे, तो अपनी माला पूरी करने के बाद ही उनसे संवाद करें। उनके साथ वचनबद्ध होते समय डायरी और पेन का उपयोग करें।
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