किसी भी साधना, पूजा या मंत्र-अनुष्ठान में 'आसन' और 'दीपक' का विशेष महत्व है। शाबर विद्या में इन्हें मात्र एक क्रिया नहीं, बल्कि साधक और देव-शक्ति के बीच का सेतु माना जाता है। ॐ आसन एवं दीपक प्रज्वलन महामंत्र के माध्यम से साधक अपने स्थान को पवित्र और ऊर्जावान बनाता है, जिससे साधना की सफलता सुनिश्चित होती है।
ऊर्जा का संरक्षण: आसन मंत्र का उपयोग करने से साधना के दौरान उत्पन्न होने वाली आध्यात्मिक ऊर्जा भूमि में विसर्जित नहीं होती, बल्कि साधक के शरीर में संचित होती है।
प्रकाश का आह्वान: दीपक प्रज्वलन मंत्र केवल ज्योति जलाना नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के 'अज्ञान के अंधकार' को मिटाकर 'दिव्य चेतना' को जागृत करने का आह्वान है।
पवित्र वातावरण: यह मंत्र स्थान की नकारात्मकता को दूर कर उसे एक सात्विक एवं सिद्ध स्थल में परिवर्तित कर देता है।
तत्काल शुद्धिकरण: मंत्र के उच्चारण मात्र से पूजा स्थल में सकारात्मक स्पंदन (Vibrations) महसूस होने लगते हैं।
एकाग्रता में वृद्धि: दीपक की लौ पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस मंत्र का जाप करने से मन की चंचलता समाप्त होती है और साधक का मन एकाग्र होता है।
दैवीय सुरक्षा: यह अनुष्ठान साधक के चारों ओर एक सूक्ष्म सुरक्षा कवच बनाता है, जिससे पूजा में विघ्न नहीं पड़ता।
"शाबर पद्धति के अनुसार, दीपक की लौ को 'साक्षी' मानकर जब आप मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो आपकी प्रार्थना सीधे ईश्वरीय चेतना तक पहुँचती है। आसन और दीपक की यह संक्षिप्त विधि आपकी साधना को सुदृढ़, निर्विघ्न और शीघ्र फलदायी बनाने का अचूक साधन है।"
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