यह प्राचीन शाबर मंत्र 'नज़र दोष' (बुरी नज़र) के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने का एक अत्यंत प्रभावी और प्रमाणित उपाय है। इसका उपयोग मनुष्य और पशुओं, दोनों के लिए किया जा सकता है।
"ॐ नमो नज़र जहा पद पीर ना जानी/ बोले छल सो अमृत बानी कहों नज़र कहां ते आई/ यहां की ठौर तोहे कौन बताई/ कौन जात तेरी कहां तेरो ठाम/ किसकी बेटी क्या तेरो नाम/ कहां से उड़ी कहां की जाया/ अब ही बस कर ले तेरी माया/ मेरी बात सुनो चितलाय जैसे होय सुनाऊं आय/ तेलन,तमोलन,चुहड़ी,चमारिन,कायथनी,खतरानी,कुम्हारिन,महतरिनी,राजा की रानी जाको दोष ताहि सिर पड़े/जाहर पीर नज़र से रक्षा करें/मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फूरो मंत्र ईश्वरो वाचा"
मंत्र की पूर्ण सिद्धि और लाभ हेतु निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
एक पात्र में स्वच्छ जल लें।
उपरोक्त मंत्र का सात (7) बार पाठ करें।
प्रत्येक बार मंत्र पूर्ण होने पर जल पर 'फूँक' (अभिषिक्त) मारें।
अंत में, यह अभिमंत्रित जल संबंधित व्यक्ति को पिला दें।
थोड़ी सी भस्म (विभूति या राख) लें।
मंत्र का सात (7) बार पाठ करते हुए भस्म पर हर बार 'फूँक' मारें।
सिद्ध की हुई भस्म को जानवर के शरीर पर तिलक की तरह या हल्का लेप कर दें।
श्रद्धा व विश्वास: इस विद्या में मन की एकाग्रता और गुरु-शक्ति पर अटूट विश्वास अनिवार्य है।
पवित्रता: मंत्र जप के समय मन में शांति और सकारात्मक भाव रखें।
यदि आपके मन में इस विद्या से संबंधित कोई भी शंका है या आप इसके प्रयोग की विधि को और गहराई से समझना चाहते हैं, तो आप हमारे केंद्र के साधन विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
परामर्श का समय: प्रातः 10:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक।
संपर्क सूत्र: 7668607892
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