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नवग्रह शांति भगवान केतु मंत्र अनुष्ठान साधना
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नवग्रह शांति भगवान केतु मंत्र अनुष्ठान साधना 

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मोक्ष और अंतर्ज्ञान के कारक: केतु ग्रह शांति अनुष्ठान एवं लाभ

​ज्योतिष शास्त्र में केतु को 'ध्‍वज' और 'मोक्ष' का कारक माना गया है। केतु एक आध्यात्मिक ग्रह है, लेकिन यदि यह कुंडली में अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति के जीवन में अचानक अलगाव, मानसिक व्याधि, चर्म रोग और कार्यों में बेवजह की रुकावटें पैदा करता है। केतु का प्रभाव राहु से भी अधिक गहरा और सूक्ष्म होता है।

​कैवल्य एस्ट्रो संस्थान, वाराणसी में हम काशी के प्रकांड विद्वानों द्वारा केतु के नकारात्मक प्रभावों को समाप्त कर उसे सौभाग्य में बदलने हेतु विशेष अनुष्ठान आयोजित करते हैं।

​1. केतु अनुष्ठान की शास्त्रीय विधि​

1. Classical method of Ketu ritual

​केतु की ऊर्जा को नियंत्रित करने के लिए विशेष अनुशासन की आवश्यकता होती है:

​शुभ दिन: अनुष्ठान का प्रारंभ मंगलवार या शनिवार को करना उत्तम माना जाता है। विशेषकर कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी इसके लिए अत्यंत शुभ है।

​आसन: अनुष्ठान के लिए कुशा के आसन या चितकबरें (दो रंगों वाले) ऊनी आसन का प्रयोग किया जाता है।

​माला: केतु मंत्रों के लिए अश्वगंधा की जड़ की माला या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना अनिवार्य है।

​दिशा व समय: पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) की ओर मुख करके बैठना चाहिए। यह अनुष्ठान ब्रह्म मुहूर्त या गोधूलि वेला में विशेष प्रभावी होता है।

​2. केतु देव के सिद्ध मंत्र

2. Proven Mantras of Ketu Dev

​केतु की शांति के लिए निम्नलिखित तीन श्रेणियों के मंत्रों का विधान है:

​क) वैदिक मंत्र (परम कल्याण हेतु)

​ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। समुषद्भिरजायथाः॥


ख) तांत्रिक मंत्र (विपदा निवारण हेतु)

​जीवन में आ रही आकस्मिक बाधाओं को रोकने के लिए:

​ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः॥


​ग) बीज मंत्र (मानसिक शांति हेतु)

​ॐ कें केतवे नमः॥


​3. कुंडली के दोष और निवारण

​3. Kundali defects and remedies

​केतु अनुष्ठान के माध्यम से इन गंभीर ज्योतिषीय दोषों का उपचार होता है:

​जड़त्व दोष: जब केतु और गुरु की युति हो, तो यह अनुष्ठान निर्णय लेने की क्षमता को प्रखर बनाता है।

​संतान संबंधी बाधा: यदि केतु के कारण संतान सुख में विलंब हो रहा हो, तो यह अनुष्ठान फलदायी है।

​कुल पुरोहित/पितृ दोष: केतु को कुल का कारक माना जाता है, इसकी शांति से परिवार में वंश वृद्धि और सुख आता है।

अज्ञात शत्रु और तंत्र बाधा: केतु के शांत होने से ऊपरी बाधाओं और शत्रु षड्यंत्रों का नाश होता है।

​4. अनुष्ठान के चमत्कारिक लाभ

4. Miraculous benefits of the ritual

​अध्यात्म और अंतर्ज्ञान: व्यक्ति की छठी इंद्री (Sixth Sense) जाग्रत होती है और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।

चर्म रोग और रक्त विकार से मुक्ति: केतु जनित शारीरिक कष्टों और रहस्यमयी बीमारियों में राहत मिलती है।

​कानूनी और गुप्त विजय: केतु के शुभ होने पर व्यक्ति गुप्त विद्याओं और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफल होता है।

एकाग्रता: विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए केतु का यह अनुष्ठान वरदान साबित होता है।

​कैवल्य एस्ट्रो संस्थान, वाराणसी की विशेष सेवा

Special Service of Kaivalya Astro Institute, Varanasi

​धर्म और ज्ञान की नगरी काशी में, जहाँ भगवान शिव ने स्वयं केतु को स्थान दिया है, वहाँ अनुष्ठान कराना अद्वितीय फल प्रदान करता है।

विशिष्ट विद्वान: हमारा संस्थान वाराणसी के उन वेदमूर्ति ब्राह्मणों के माध्यम से पूजन संपन्न कराता है, जिन्हें वर्षों का अनुभव है।

​यजमान सेवा: आपकी श्रद्धा का सम्मान करते हुए, अनुष्ठान हेतु आने वाले यजमान को एक दिन ठहरने और सात्विक भोजन की सुविधा निशुल्क दी जाती है।

​पूर्ण शुद्धता: हम शास्त्रोक्त सामग्री और पूर्ण पवित्रता के साथ संकल्पित जप और हवन संपन्न करते हैं।

​केतु के अशुभ प्रभाव को त्यागें और जीवन में विजय का ध्वज फहराएं।


अनुष्ठान हेतु आज ही संपर्क करें:

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? कैवल्य एस्ट्रो संस्थान

Kaivalya Astro Institute 

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