तंत्र शास्त्र के गोपनीय ग्रंथों में 'काम पिशाची साधना' को महा आकर्षण और सम्मोहन की सर्वोच्च क्रियाओं में से एक माना गया है। यह साधना केवल किसी व्यक्ति विशेष को वश में करने के लिए नहीं, बल्कि साधक की आंतरिक काम-ऊर्जा (Libido) को जागृत कर उसे एक अलौकिक चुम्बकीय व्यक्तित्व (Aura) में बदलने की एक अत्यंत प्रभावशाली प्रक्रिया है।
महा आकर्षण शक्ति: साधक के व्यक्तित्व में एक ऐसा तीव्र आकर्षण उत्पन्न होता है कि समाज और कार्यक्षेत्र में लोग उसकी बात को मानने के लिए स्वतः प्रेरित होते हैं।
कुंडली शक्ति का जागरण: यह तांत्रिक मार्ग सुप्त ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बनाकर सात चक्रों को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है।
व्यक्तित्व में निखार: समाज में मान-प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि।
यह एक उग्र तामसिक साधना है, जिसके लिए अत्यंत अनुशासन और गोपनीयता अनिवार्य है।
आसन व वस्त्र: पूर्णतः काले रंग के वस्त्र और आसन का प्रयोग।
दिशा: पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें।
समय: यह साधना केवल रात्रि के गहन अंधकार में ही संपन्न की जानी चाहिए।
स्थल चयन: घर का एकांत और अंधेरा कमरा, श्मशान भूमि, नदी का किनारा या किसी एकांत वृक्ष के नीचे (लोक-पूजा रहित)।
दीपक: सरसों या तिल के तेल का अखंड दीपक।
शरीर सुरक्षा: साधना में बैठने से पूर्व शरीर से सभी प्रकार के धागे, ताबीज या अंगूठियां उतार दें। 'कैवल्य एस्ट्रो वर्ल्ड' द्वारा निर्देशित 'शरीर सुरक्षा मंत्र' का पाठ करना अनिवार्य है ताकि तामसिक ऊर्जाओं से साधक सुरक्षित रहे।
मानसिक संकल्प: साधना के दौरान साधक को अपने इष्ट, कुल देवता और स्थान देवता का आह्वान कर साधना की निर्विघ्न सिद्धि का आशीर्वाद लेना चाहिए।
ऊर्जा का रूपांतरण: इस साधना का मुख्य आधार 'कामुक चिंतन' है। मंत्र जप के दौरान साधक को अपनी तीव्र काम-ऊर्जा को एकाग्र कर मंत्र में 'अमुकीं' के स्थान पर लक्षित नाम का उच्चारण करना होता है। यह प्रक्रिया ऊर्जा को स्थूल से सूक्ष्म और आकर्षण शक्ति में बदल देती है।
नियम: प्रतिदिन २१ माला रुद्राक्ष की माला से जप अनिवार्य है।
यह एक अत्यंत उग्र तामसिक तंत्र साधना है। इसका मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर महा-आकर्षण और कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करना है।
सावधानी:
इस विद्या का दुरुपयोग किसी का अहित करने या अनैतिक वशीकरण के लिए कदापि न करें।
यह साधना पूर्णतः गुरु के मार्गदर्शन और उच्च स्तर के मानसिक अनुशासन की मांग करती है।
बिना सुरक्षा घेरे या गलत विधि से प्रयोग करने पर होने वाले किसी भी मानसिक, शारीरिक या आध्यात्मिक दुष्प्रभाव के लिए साधक स्वयं उत्तरदायी होगा।
अतः इस गोपनीय ज्ञान का प्रयोग अत्यंत सावधानी और पवित्र उद्देश्य के साथ ही करें
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products