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मचक (मोच) झारन शाबर मंत्र
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मचक (मोच) झारन शाबर मंत्र एवं संपूर्ण विधि-विधान

भारतीय लोक-परंपरा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में शाबर मंत्रों का एक विशिष्ट स्थान है। 'मचक' का अर्थ लोकभाषा में पैर या हाथ में आने वाली 'मोच' से है। यह शाबर मंत्र शरीर के किसी भी हिस्से में अचानक आई मोच, नसों के खिंचाव, मांसपेशियों की ऐंठन और उससे उत्पन्न होने वाले तीव्र दर्द (पीर) को दूर करने (झारने) के लिए उपयोग किया जाता है। शिक्षार्थियों और साधकों की सुगमता के लिए इस पूरी प्रयोग विधि को यहाँ क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है:

📋 प्रयोग की संक्षिप्त रूपरेखा (Quick Overview)

विषयनियम व निर्देश
मुख्य उद्देश्यशरीर में आई मोच, नसों के खिंचाव और तीव्र दर्द का निवारण।
प्रधान सामग्रीएक छोटी कटोरी में शुद्ध राई (काली/गर्म सरसों) का तेल।
मंत्र आवृत्तितेल को अभिमंत्रित करने के लिए कुल २१ (21) बार पाठ।
साधना काल/अवधिविशेष लाभ के लिए यह क्रिया लगातार सात (7) दिनों तक, दोनों समय (सुबह-शाम) करनी चाहिए।

🔮 १. मूल मंत्र (शुद्ध उच्चारण हेतु सामान्य लेख)

"।।"

⚠️ महत्वपूर्ण नोट: मंत्र के भीतर जहाँ भी 'अमुक' शब्द का उल्लेख आया है, वहाँ पर आपको उस पीड़ित व्यक्ति के नाम का स्पष्ट उच्चारण करना है जिसे मोच आई है।

🛠️ २. विस्तृत विधि-विधान एवं प्रयोग प्रक्रिया (Step-by-Step Guide)

इस पारंपरिक शाबर प्रयोग को पूरी एकाग्रता के साथ निम्नलिखित ५ चरणों में संपन्न किया जाता है:

  • चरण १ (सामग्री की तैयारी): सबसे पहले एक छोटी और साफ कटोरी में थोड़ा सा शुद्ध राई (सरसों) का तेल लें। पीड़ित व्यक्ति को सहज अवस्था में बैठाएं या लिटाएं।

  • चरण २ (मंत्र अभिमंत्रण प्रक्रिया): तेल की कटोरी को सामने रखकर या हाथ में लेकर ऊपर दिए गए मंत्र का स्पष्ट और शुद्ध स्वर में कुल २१ (21) बार पाठ करें। ध्यान रहे, प्रत्येक बार मंत्र पूरा होने पर तेल पर मुख से हल्की सी फूंक (फूत्कार) मारें। इस प्रक्रिया से वह तेल औषधीय और दैवीय रूप से अभिमंत्रित हो जाता है।

  • चरण ३ (मालिश की प्रक्रिया): अब इस अभिमंत्रित सरसों के तेल की कुछ बूंदें पीड़ित व्यक्ति के मोच वाले प्रभावित स्थान पर लगाएं।

  • चरण ४ (हल्की मालिश): तेल लगाकर प्रभावित हिस्से पर बहुत ही हल्के और सहलाते हुए हाथों से नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें। मोच पर कभी भी दबाव या जोर नहीं देना चाहिए।

  • चरण ५ (फूंक मारना व पूर्णता): मालिश करते समय मन ही मन या धीमे स्वर में मंत्र का पाठ जारी रखें और बीच-बीच में मोच वाले स्थान पर फूंक मारते रहें, जिससे मंत्र में वर्णित 'फूंक से हुई सब पानी' (अर्थात दर्द पानी की तरह बह जाए) का प्रभाव पूर्णतः जाग्रत हो सके।

⚠️ ३. छात्रों एवं साधकों के लिए विशेष निर्देश (महत्वपूर्ण बातें)

  • शब्दों की अपरिवर्तनीयता: शाबर मंत्रों में आंचलिक और ग्रामीण शब्दों की प्रधानता होती है। इनका उच्चारण बिल्कुल वैसा ही होना चाहिए जैसा लिखा है (जैसे 'औं' को 'ॐ' की तरह न बदलें और यह समझें कि 'पीर' का अर्थ दर्द से है)। व्याकरण सुधारने के प्रयास में मंत्र की मूल ध्वनि को न बदलें।

  • अटूट श्रद्धा और एकाग्रता: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, शाबर मंत्रों का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब साधक और पीड़ित दोनों के मन में इस प्राचीन पद्धति के प्रति पूर्ण श्रद्धा, सकारात्मकता और एकाग्रता बनी रहे।

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