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कंटक बाण मारण स्वयं सिद्ध बंगाली मंत्र
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कंटक बाण मारण: स्वयंसिद्ध बंगाली तंत्र विज्ञान

चेतावनी और निर्देश: यह एक अत्यंत तीव्र और प्राचीन तांत्रिक संपुट क्रिया है। इसमें बंगाली भाषा के ध्वनि-विज्ञान (Acoustics) का विशेष महत्व है। मंत्र का प्रभाव तभी जाग्रत होता है जब इसका उच्चारण ठीक उसी मूल रूप और लय में किया जाए जैसा नीचे वर्णित है।

1. सिद्ध बंगाली मूल मंत्र

मंत्र पढ़ते समय शब्दों की ध्वनि और उनके स्पंदन (Vibrations) पर विशेष ध्यान दें:

"जटाई काली तथाई दड़िएतई छाड़ि,

मुन्द काटि आमार मन्त्रेर गुणे।

शताहार सबेसबकि छुनड़ेचड़ेएइ,

कथाई हूरेचरेदोलाई फि के।

बिश माहमी चाहिया मन आज दिलाम,

दर्शन शत्रु शुने सर्ब हय रामेर।

गुनु माथा आसिया पड़िया वय,

गाङ्खनेर गुणे छुटेताने देवगुणे।

बसे खशुिशत्रु हल मृत्यु पायेर,

गुणे कहियाई काटा मारिले पाओ।

सब किछु हरबा गुणे जाय।"

2. सम्पूर्ण अनुष्ठान विधि-विधान

इस गोपनीय क्रिया को साधकों के अध्ययन और सटीक अभ्यास के लिए 4 मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:

चरण 1: अनिवार्य प्रामाणिक सामग्री

सटीक परिणाम और ऊर्जा संचरण के लिए केवल इन्हीं प्रामाणिक सामग्रियों का चयन करें:

  • पवित्र भूमि: एक एकांत और शांत स्थान, जहाँ प्राकृतिक स्वच्छ मिट्टी उपलब्ध हो।

  • अंकन उपकरण: मिट्टी पर आकृति उकेरने के लिए कोई भी नुकीली वस्तु, जैसे लोहे की कील या सूखी मजबूत लकड़ी।

  • प्राकृतिक कंटक (कांटे): कुल सात (7) साबुत एवं मजबूत प्राकृतिक कांटे (बबूल या नींबू के पेड़ से तोड़े गए कांटे सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं)।

चरण 2: पूर्व तैयारी एवं भूमि संस्कार

क्रिया प्रारंभ करने से पूर्व वातावरण और मानसिक स्थिति को एकाग्र करना आवश्यक है:

  1. सबसे पहले चयनित मिट्टी वाले स्थान को पूरी तरह साफ और समतल कर लें।

  2. एकाग्रचित्त होकर, अंकन उपकरण की सहायता से उस साफ मिट्टी पर एक चाबी (Key) की सुंदर और स्पष्ट आकृति बनाएँ।

  3. उस निर्मित चाबी की आकृति के ठीक मध्य (भीतर) में अपने शत्रु का नाम अंकित करें।

  4. शत्रु की पहचान सुनिश्चित करने के लिए, नाम के ठीक नीचे उसके पिता का नाम भी अत्यंत स्पष्ट अक्षरों में लिखें।

चरण 3: मुख्य क्रिया एवं ऊर्जा संचरण

यह इस साधना का सबसे मुख्य भाग है, जहाँ मंत्र की ध्वनि और भौतिक क्रिया का मिलन होता है:

  1. अपने हाथ (परंपरा के अनुसार बाएं या दाएं) में उन सात कांटों को लें।

  2. ऊपर दिए गए सिद्ध बंगाली मंत्र का अत्यंत शुद्ध और लयबद्ध पाठ प्रारंभ करें।

  3. मंत्र पढ़ते समय अपना पूरा ध्यान चाबी के भीतर लिखे गए नाम पर केंद्रित रखें।

  4. जैसे ही मंत्र का एक निश्चित आवर्तन (पाठ) पूर्ण हो, आपको एक कांटा शत्रु के नाम और पिता के नाम वाले स्थान पर गहराई से धंसाना (चुभोना) है।

चरण 4: अनिवार्य नियम एवं सूक्ष्म निर्देश

इन नियमों का पालन न करने पर साधना अधूरी रह जाती है:

  • मंत्र-प्रहार समन्वय: नियम के अनुसार, मंत्र के पाठ और कांटे को मिट्टी में बिंधने (धंसाने) की गति में पूर्ण तालमेल होना चाहिए।

  • पूर्ण प्रहार: कुल 7 कांटों का उपयोग इस प्रकार करें कि वे सभी नाम वाले स्थान पर पूरी तरह से गढ़ जाएं और हिलें नहीं।

  • संकल्प शक्ति: पूरी प्रक्रिया के दौरान मन में शत्रु की स्पष्ट छवि होनी चाहिए। आपके भीतर उसे परास्त करने का दृढ़ संकल्प और एकाग्रता अटूट होनी चाहिए।

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