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कटि दर्द झारन मंत्र (कमर दर्द निवारण शाबर मंत्र)
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कटि दर्द झारन मंत्र (कमर दर्द निवारण) एवं संपूर्ण विधि-विधान

भारतीय लोक-परंपरा और शाबर तंत्र में दैनिक जीवन के शारीरिक कष्टों व व्याधियों के उपचार हेतु अत्यंत सरल, सुलभ और अचूक उपाय मिलते हैं। 'कटि' का अर्थ कमर होता है; यह शाबर मंत्र मुख्य रूप से कमर के तीव्र दर्द (Back Pain) से पीड़ित व्यक्ति को राहत पहुँचाने के लिए प्रयोग किया जाता है। शिक्षार्थियों और पाठकों की सुगमता व सही समझ के लिए इस संपूर्ण विधि को नीचे क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है:

📋 प्रयोग की संक्षिप्त रूपरेखा (Quick Overview)

विषयनियम व निर्देश
मुख्य उद्देश्यकटि दर्द (कमर के दर्द) को ठीक करना और पीड़ित को तत्काल राहत देना।
शुभ समय/तिथिइस प्रयोग को शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण के दिनों) में करना सर्वश्रेष्ठ होता है।
प्रधान सामग्रीकिसी कुमारी कन्या (छोटी बच्ची) के हाथों द्वारा काता गया सूत (धागा)।
सूत की मापकाते हुए सूत के कुल १०१ (एक सौ एक) तार एक साथ मिलाने हैं।
मंत्र आवृत्तितैयार सूत को हाथ में लेकर मंत्र का कुल ११ (ग्यारह) बार पाठ करना है।

🔮 १. मूल शाबर मंत्र (शुद्ध एवं स्पष्ट पाठ)

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💡 विशेष निर्देश: शाबर मंत्रों की यह विशेषता है कि इनमें स्थानीय या ग्रामीण भाषा के शब्दों का समावेश होता है। इनका प्रभाव बनाए रखने के लिए इनके शब्दों या व्याकरण में अपनी ओर से कोई बदलाव नहीं करना चाहिए, बल्कि जैसा लिखा है, वैसा ही शुद्ध उच्चारण करना चाहिए।

🛠️ २. विस्तृत विधि-विधान (Step-by-Step Guide)

इस पारंपरिक शाबर प्रयोग की सफलता इसकी शुद्धता और चरणबद्ध नियमों पर निर्भर करती है। इसकी सरल प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • चरण १ (शुभ काल का चयन): इस प्रयोग को शुरू करने के लिए शुक्ल पक्ष के दिनों का चयन करें, क्योंकि इस अवधि में की जाने वाली क्रियाएं अधिक फलदायी मानी जाती हैं।

  • चरण २ (विशेष सामग्री संग्रह): प्रयोग के लिए सबसे मुख्य सामग्री 'सूत' है। किसी कुमारी कन्या (छोटी बच्ची) के हाथों द्वारा पारंपरिक रूप से काता गया शुद्ध सूत (धागा) प्राप्त करें।

  • चरण ३ (सूत की तैयारी): उस काते हुए सूत में से १०१ (एक सौ एक) तार गिनकर अलग निकाल लें और उन सभी तारों को एक साथ मिलाकर एक मजबूत डोरा या धागा तैयार कर लें।

  • चरण ४ (मंत्र अभिमंत्रण प्रक्रिया): तैयार किए गए इस १०१ तार के सूत को अपने दाहिने हाथ में लें। अपना पूरा ध्यान केंद्रित करके ऊपर दिए गए शाबर मंत्र का ११ (ग्यारह) बार स्पष्ट व शुद्ध पाठ करें। प्रत्येक बार मंत्र पूरा होने पर हाथ में रखे सूत पर मुख से हल्की सी फूंक (फूत्कार) मारें।

  • चरण ५ (धारण विधि व परिणाम): इस प्रकार ११ बार मंत्र द्वारा अभिमंत्रित किए गए सूत को पीड़ित व्यक्ति की कमर (कटि) पर अच्छे से बांध दें। पूरी श्रद्धा और पवित्रता से इस विधि को संपन्न करने पर कमर का दर्द शीघ्र ही शांत हो जाता है।

⚠️ ३. शिक्षार्थियों के लिए विशेष ध्यान देने योग्य बातें (महत्वपूर्ण निर्देश)

  • उच्चारण की अडिगता: शाबर मंत्रों में ग्रामीण या आंचलिक शब्दों की प्रधानता होती है। इसमें अपनी तरफ से व्याकरण सुधारने या शब्दों को बदलने की आवश्यकता नहीं होती; जैसा लिखा है, वैसा ही प्रवाह में बोलें।

  • शारीरिक व मानसिक पवित्रता: इस विधि को करते समय और धागा बांधते समय साधक और पीड़ित दोनों को शारीरिक स्वच्छता और मन में सकारात्मक व सात्विक विचार रखने चाहिए।

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