भारतीय शाबर तंत्र परंपरा में अदृश्य नकारात्मक ताकतों, अभिचार कर्मों (जैसे जादू-टोना या तांत्रिक बाण) के कारण उत्पन्न होने वाले शारीरिक कष्टों और घावों के निवारण हेतु अत्यंत प्रभावी उपाय बताए गए हैं। जब किसी व्यक्ति पर नकारात्मक शक्तियों का प्रहार होता है, तो शरीर में अकारण ही घाव, अत्यधिक पीड़ा या व्याधियाँ उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में इस अचूक शाबर मंत्र का प्रयोग किया जाता है। शिक्षार्थियों और साधकों की सुगमता के लिए इस पूरी विधि को यहाँ क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है:
| विषय | नियम व निर्देश |
| मुख्य उद्देश्य | जादू-टोना, तांत्रिक बाण या अदृश्य नकारात्मक ऊर्जा से जनित घावों और पीड़ा का निवारण। |
| प्रधान सामग्री | एक स्वच्छ पात्र (काँच या तांबे का गिलास) और शुद्ध पीने का जल। |
| शुभ दिशा | प्रयोग के समय साधक का मुख उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए। |
| मंत्र आवृत्ति | जल को अभिमंत्रित करने के लिए पूरी श्रद्धा से कुल सात (7) बार पाठ। |
| साधना काल/अवधि | विशेष लाभ के लिए यह क्रिया लगातार तीन (3) दिनों तक, दोनों समय (सुबह-शाम) करनी चाहिए। |
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⚠️ महत्वपूर्ण नोट: मंत्र के भीतर जहाँ भी 'अमुक' शब्द का उल्लेख आया है, वहाँ पर आपको उस पीड़ित व्यक्ति के नाम का स्पष्ट उच्चारण करना है जिसके स्वास्थ्य लाभ के लिए आप यह प्रयोग कर रहे हैं।
शाबर मंत्रों की साधना में मानसिक एकाग्रता और सही प्रक्रिया का बहुत महत्व होता है। इस मंत्र का प्रयोग निम्नलिखित चरणों में संपन्न करें:
चरण १ (तैयारी): सबसे पहले एक स्वच्छ काँच या तांबे के गिलास में शुद्ध पीने का जल भर लें। स्वयं उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठ जाएं और अपने मन को पूरी तरह शांत रखें।
चरण २ (मंत्र अभिमंत्रण प्रक्रिया): जल से भरे गिलास को अपने दाहिने हाथ में लें या अपने ठीक सामने किसी साफ चौकी पर रखें। अब ऊपर दिए गए शाबर मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करते हुए कुल ७ बार पाठ करें। ध्यान रहे, प्रत्येक बार मंत्र पूरा होने पर गिलास के जल पर मुख से हल्की सी फूंक (फूत्कार) मारें। सातवीं बार की प्रक्रिया के बाद यह जल पूरी तरह अभिमंत्रित हो जाता है।
चरण ३ (नेत्र प्रक्षालन): इस अभिमंत्रित जल में से थोड़ा सा जल लेकर पीड़ित व्यक्ति की आँखों पर हल्के से छींटे मारें (आँखें धुलाएं), जिससे नकारात्मकता का प्रभाव क्षीण हो सके।
चरण ४ (जलपान): आँखों पर छींटे मारने के बाद, गिलास में बचा हुआ शेष अभिमंत्रित जल पीड़ित व्यक्ति को तुरंत पीने के लिए दे दें।
पीड़ा का शमन: सात बार की इस प्रामाणिक विधि को पूर्ण करने से तंत्र-बाधार्इ जनित असहनीय दर्द और शारीरिक छटपटाहट में तेजी से सुधार होता है।
आरोग्य की प्राप्ति: लगातार तीन दिनों तक दोनों समय (सुबह और शाम) इस प्रयोग को दोहराने से जादू, बाण या किसी भी अदृश्य नकारात्मक शक्ति के कुप्रभाव से उत्पन्न हुआ आंतरिक या बाहरी घाव धीरे-धीरे सूखने लगता है और रोगी को उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
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