यह मंत्र 'जीरा' के माध्यम से सिद्ध किया जाता है, जिसका उपयोग किसी भी प्रकार के टोने-टोटके, नकारात्मक ऊर्जा या ऊपरी बाधा को दूर करने के लिए किया जाता है। इसे सीखने और समझने की विधि नीचे चरणबद्ध तरीके से दी गई है।
"जीरा जीरा मोहाजीरात चोले जीरार शोक्ती ते तबे (फोलानी) आछे जोरे तोम टोले मोहेते मोशान टोले आमार एई जीरा पोड़ार (ओमूकेर) अंगे भूत ना रहे,,कार आज्ञे पोण्डूआर पीरेर आज्ञे"
(नोट: जहाँ कोष्ठक में (अमुक/नाम) लिखा है, वहां उस व्यक्ति का नाम लें जिसके लिए यह प्रयोग किया जा रहा है।)
इस विद्या को प्रभावशाली बनाने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करें:
शुद्धिकरण: एक पात्र में थोड़ा सा स्वच्छ जल लें।
मंत्र का जप: हाथ में जीरा लेकर या पानी के पात्र की ओर देखते हुए, ऊपर दिए गए मंत्र को कुल 7 (सात) बार पूर्ण एकाग्रता और विश्वास के साथ पढ़ें।
सिद्ध करना: मंत्र का उच्चारण करते समय अपनी मानसिक शक्ति को उस व्यक्ति पर केंद्रित रखें जिसे बाधा से मुक्त करना है। 7 बार मंत्र पढ़ने के बाद उस जल या जीरे पर फूंक मारें।
प्रयोग: सिद्ध किए गए जल को प्रभावित व्यक्ति पर छिड़क दें या उन्हें पिला दें (यदि जल प्रयोग के लिए हो)। यह क्रिया नकारात्मक प्रभाव और 'किया-कराया' को समाप्त करने में सहायक सिद्ध होती है।
तन्त्र-मन्त्र विद्या एक संवेदनशील विषय है। यदि आपके मन में इस मंत्र के प्रयोग, विधि या किसी अन्य आध्यात्मिक शंका को लेकर कोई प्रश्न हो, तो उचित मार्गदर्शन लेना अत्यंत आवश्यक है।
परामर्श समय: प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।
संपर्क सूत्र: हमारे केंद्र के साधन विशेषज्ञ से सलाह प्राप्त करने के लिए कॉल करें: 7668607892
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